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यूथ ओलंपिक: पिता को जंगल माफिया ने मार डाला था, बेटा भारत के लिए सिल्‍वर मेडल लाया

यूथ ओलंपिक 2018 में सूरज पंजवार ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। 40 मिनट और 59.17 सेकेंड में रेस पूरी कर ली।

Author Updated: October 17, 2018 1:53 PM
Suraj Panwar, Youth Olympics 2018ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाले सुरज पंजवार। (एक्सप्रेस फोटो)

यूथ ओलंपिक 2018 में देश के लिए ‘सिल्वर’ जीतने वाले सूरज पंजवार के पिता की हत्या जंगल माफिया ने कर दी थी। वे अपने पिता के बारे में जो कुछ भी जानते हैं, अपनी मां पूनम देवी से सुना है। सूरज के जन्म के कुछ दिन बाद उनके पिता उदय सिंह पंजवार और दो अन्य लोगों की हत्या देहरादून के नजदीक जंगल माफिया ने कर दी थी। मंगलवार (16 अक्टूबर) को जब 18 वर्षीय सूरज ने ब्यूनस एरिज में हो रहे यूथ आेलंपिक गेम्स में 5000 मीटर रेस में सिल्वर मेडल जीता, उनकी मां की खुशी का ठिकाना न रहा। यह सूरज द्वारा अपने परिवार को दिया गया सबसे बड़ा तोहफा है। सूरज ने 40 मिनट और 59.17 सेकेंड में रेस पूरी कर ली। हालांकि, इक्वाडोर के ऑस्कर पेटिन, जिन्होंने 40 मिनट 51.86 सेकेंड में अपनी दौड़ पूरी की, उनसे पीछे रह गए। सूरज को सिल्वर पर ही संतोष करना पड़ा।

उदय सिंह के सबसे छोटे बेटे सूरज ने पीटी शू के साथ अपनी दौड़ की शुरूआत की थी और ओलंपियन मनीष सिंह रावत द्वारा दिए गए पुराने जूते के साथ ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता। सूरज कहते हैं, “जब मैं छह माह से भी छोटा था, तभी देहरादून के असरोदी रेंज के मोहंद क्षेत्र में मेरे पिता और दो अन्य फॉरेस्ट गार्ड की हत्या कर दी गई थी। यदि आज वे जीवित होते, यह मेडल उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी होती। मैं भारत के लिए एक मेडल जीतना चाहता था। यह मेरे द्वारा परिवार को दिया गया सबसे बड़ा तोहफा होगा।”

सूरज आगे कहते हैं, “मेरे पिता जी एक नॉन-कांट्रैक्ट कर्मचारी थे और मेरी मां ने प्राथमिक शिक्षा भी नहीं ली थी। इसलिए वे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट नर्सरी में काम कर रही है। उनके पास इतने भी पैसे नहीं थे कि यहां आने से पहले वे मेरे लिए नए जूते खरीद सकें। मनीष रावत भाई ने मुझे अपने एक जोड़ी पुराने जूते दिए, जिसे पहन मैंने कॉमनवेल्थ गेम में हिस्सा लिया था। जूता साइज में हल्का बड़ा था, लेकिन मैंने एक और जोड़ी मोजे पहन लिए ताकि किसी तरह की समस्या न हो।”

सूरज अपने गांव कारबेरी में अपने दोस्तों के साथ दौड़ते थे और पड़ोस के गांव स्थित स्कूल में पढ़ने जाते थे। पीटी टीचर विकास यादव ने सूरज को एथलेटिक्स 2014 में शामिल होने के लिए उत्साह बढ़ाया। सूरज को स्कूल स्तर पर दौड़ प्रतियोगिता के लिए चयनित किया गया। इसके दो साल बाद वे देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए चुने गए। वे कहते हैं, “साधन के अभाव में मैं पैदल ही स्कूल जाता था। अक्सर जल्दबाजी होने की वजह से मैं तेजी से चलता था। जब मैंने रेस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना शुरू किया तो मेरी मां ने 200 रुपये में एक जूता खरीद दिया। ज्यादा इवेंट में भाग लेता था तो जूते फट जाते थे। मम्मी फिर भी पैसा बचा के मुझे जूते ले देती। जब 2016 में मेरा चयन महाराणा प्रताप काॅलेज में हुआ, मैंने दो छात्रों के साथ मिलकर एक कमरा लिया।”

सूरज कहते हैं, “कोयंबटूर में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मुझे स्पोर्ट्स एक्सीलेंस प्रोग्राम में शामिल किया। मतलब कि मेरे पास अब एक कमरा था और सही खाना मिलता था। इससे मुझे काफी बढ़ावा मिला।” सूरज को गोल्ड मेडल कोयंबटूर में 32 वें जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप में 22 मिनट और 37.37 सेकेंड के समय के साथ यू -16 श्रेणी में 5000 मीटर रेस वॉक के लिए मिला था। स्वर्ण पदक के बाद उन्होंने हैदराबाद में आयोजि नेशनल एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 10,000 मीटर दौड़ 45 मिनट और 35.47 सेकेंड में पूरी की, सिल्वर मेडल मिला। पिछले साल वियजवाडा में आयोजित जूनियर नेशनल एथलेटिक्स में 10000 मीटर वाक में उन्हें ब्रांज मेडल मिला था। इस साल अप्रैल में उन्होंने अंडर 20 कैटेगरी के तहत जूनियर फेडरेशन कप में 1000 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद बैंकॉक में एशियन क्वालिफिकेशन मीट में सिल्वर मेडल जीता।

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