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मिलिए पप्‍पू यादव के बेटे सार्थक से, जिनका एक ही लक्ष्‍य है- राहुल द्रविड़ की नजर में आना

सार्थक अंडर-19 वर्ल्‍ड कप के लिए चुनी जाने वाली टीम में शामिल होने के लिए पुणे में इन दिनों क्रिकेट की पिच पर संघर्ष कर रहे हैं। उन्‍हें बिहार में चल रहे चुनाव के बारे में कुछ पता नहीं।

Author देवेंद्र पांडे पुणे | October 29, 2015 8:57 PM
मिलिए सांसद पप्‍पू यादव के बेटे सार्थक से, चुनावी बातों से दूर, उनका एक ही लक्ष्‍य है- राहुल द्रविड़ की नजर में आना

चुनावी सरगर्मी से गुजर रहे बिहार में जहां लालू प्रसाद के दो बेटे वोटर्स को रिझाने में लगे हैं, वहीं कभी लालू के करीबी रहे सांसद पप्‍पू यादव के बेटे क्रिकेटर राहुल द्रविड़ की नजर में खुद को लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बुधवार को जब बिहार में तीसरे चरण का मतदान था तो लालू के बेटे तेज प्रताप और तेजस्‍वी चुनावी मैदान में जीत के समीकरण फिट कर रहे थे।

लेकिन जन अधिकार पार्टी के नेता और मधेपुरा से सांसद पप्‍पू के बेटे सार्थक रंजन पुणे में क्रिकेट मैच खेल रहे थे। पप्‍पू और रंजीता रंजन (सुपौल से कांग्रेस सांसद) के 19 साल के बेटे सार्थक उन युवा क्रिकेटर्स में शामिल हैं जो पुणे में अंडर-19 चैलेंजर्स ट्रॉफी के लिए जुटे हैं। इस टूर्नामेंट के जरिए ही वर्ल्‍ड कप के लिए अंडर-19 टीम चुनी जाएगी। यह वर्ल्‍ड कप अगले साल बांग्‍लादेश में होना है।

बिहार चुनाव सार्थक के दिमाग में दूर-दूर तक नहीं है। उनका मकसद केवल राहुल द्रविड़ की नजर में आना है। द्रविड़ पुणे में युवा क्रिकेटर्स की स्‍क्रीनिंग कर रहे हैं।

सार्थक ने कहा, ‘मेरा एक मात्र लक्ष्‍य अच्‍छा खेलना और राहुल सर से काफी कुछ सीखना है। बहुत से लोगों को मेरे परिवार के बारे में पता नहीं है और मैं चाहता भी नहीं कि उन्‍हें पता चले। आज नहीं तो कल सबको पता चल ही जाता है।

सार्थक आक्रामक ओपनर हैं। जोनल गेम में वह दो बार 106 बॉल पर 96 रन बना चुके हैं। वह बताते हैं, ‘मैंने चार जोनल गेम में 265 रन बनाए हैं। दो बार 96 पर आउट ‘ हुआ। मुझे उम्‍मीद है कि मैं अंडर-19 में देश का प्रतिनिधित्‍व कर सकूंगा। मैं नौ साल की उम्र से ही खेल रहा हूं। मैंने कई एज-ग्रुप में दिल्‍ली का प्रतिनिधित्‍व किया है और उम्‍मीद है कि अब देश के लिए भी खेल पाऊंगा।’

खेल सार्थक को विरासत में मिली है। उनकी मां बिहार सर्किट की जानी-मानी टेनिस प्‍लेयर रह चुकी हैं। सार्थक कहते हैं, ‘मैं मां से रोज बात करता हूं। वह मेरी काफी मदद करती हैं।

चूंकि वह भी खिलाड़ी रही हैं तो उनको पता है कि एक खिलाड़ी को किस दौर से गुजरना पड़ता है। मुझे गुस्‍सा जल्‍दी आ जाता है। खास कर तब जब रन नहीं बनते।

मां मुझे समझाती हैं कि धीरज रखा करो, सब ठीक हो जाएगा।’ सार्थक बताते हैं कि घर पर राजनीति की बातें नहीं होती। खाने की टेबल पर क्रिकेट की ही बातें होती हैं।

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