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सचिन तेंदुलकर ने विराट कोहली को दिया पिंक बॉल टेस्ट जीतने का ‘नुस्खा,’ बताई घड़ी की अहमियत

भारत ने एडिलेड टेस्ट से पहले पिंक बॉल से अब तक केवल एक टेस्ट खेला है। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम गुलाबी गेंद से 7 मैच खेल चुकी है और सभी में जीत हासिल की है। यह बात टिम पेन की टीम के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: December 17, 2020 11:40 AM
सचिन तेंदुलकर ने पिंक बॉल टेस्ट के लिए विराट कोहली को घड़ी की अहमियत बताई है।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सचिन तेंदुलकर ने टीम इंडिया के कैप्टन विराट कोहली को एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में जीत का ‘नुस्खा’ बताया है। उन्होंने भारतीय कप्तान को घड़ी की अहमियत बताई है। एडिलेड टेस्ट एक डे-नाइट टेस्ट है। विराट कोहली एंड कंपनी गुलाबी गेंद से पहली बार विदेशी धरती पर मैच खेल रही है। भारत ने एडिलेड टेस्ट से पहले पिंक बॉल से अब तक केवल एक टेस्ट खेला है। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम गुलाबी गेंद से 7 मैच खेल चुकी है और सभी में जीत हासिल की है। यह बात टिम पेन की टीम के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

टीम इंडिया को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि ऑस्ट्रेलिया अपने घरेलू मैदान पर पिंक बॉल टेस्ट खेल रही है। ऐसे में वह घरेलू परिस्थितियों से ज्यादा वाकिफ होगी। स्पोर्ट्स टुडे से बातचीत के दौरान तेंदुलकर ने कोहली एंड कंपनी को घड़ी पर करीबी नजर रखने की सलाह दी। साथ ही समय को देखते हुए लगातार अपनी रणनीति बदलना जारी रखने की बात कही। तेंदुलकर ने कहा, ‘मैंने अब तक जितने भी पिंक बॉल टेस्ट देखे हैं, उसके आधार पर कह सकता हूं कि आपको घड़ी को लेकर बहुत चौकन्ना होना चाहिए। जब भी सूरज डूब रहा होता है और तापमान नीचे गिर रहा होता है और ओस गिरने से पहले घास अच्छी और ठंडी होती है तब सतह पर थोड़ी अतिरिक्त पार्श्व गति होने लगती है। ऐसी स्थिति में आपको न सिर्फ गेंदबाज बल्कि परिस्थितियों का भी सम्मान करना होता है।’

हालांकि, इस टेस्ट में विराट कोहली के लिए टॉस जीतना भी एक सकारात्मक बात रही। विराट कोहली ने अब तक 26 टेस्ट मैचों में टॉस जीता है। इनमें से उन्होंने 21 में जीत हासिल की है, जबकि 4 मुकाबले ड्रॉ पर छूटे हैं। खास यह है जिस भी टेस्ट मैच में विराट कोहली ने टॉस जीता है भारतीय टीम ने वह मुकाबला गंवाया नहीं है।

सचिन तेंदुलकर ने कहा, ‘पिंक बॉल टेस्ट मैच में आपका पहला सत्र अच्छा हो सकता है। जहां कुछ अधिक मौके लेते हैं और उन्हें भुना सकते हैं। साथ ही ज्यादा आक्रामक तरीके से खेल सकते हैं। संभवत: ऑस्ट्रेलिया में कोलकाता के मुकाबले देर से सूरज डूबता है। मुझे लगता है कि कोलकाता में 4:30 से 6:30 एक महत्वपूर्ण समय था, जहां बल्लेबाजों को न केवल गेंदबाज, बल्कि पिच का भी सम्मान करना था और साझेदारियां करनी थी। एक बार जब गेंद गीली हो जाती है, तो आप थोड़ा ज्यादा शॉट खेलना शुरू कर सकते हैं।’

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