महाराष्ट्र की आबादी लगभग 13 करोड़ और गुजरात की आबादी 8 करोड़ के आसपास है, लेकिन दोनों की 3-3 घरेलू क्रिकेट टीमें हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ के आसपास है, लेकिन यहां सिर्फ एक टीम है, जो बताता है कि देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले सूबे से अन्याय हो रहा है। जनसत्ता के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में यूपी के क्रिकेट ढांचे पर सवाल उठाते हुए यशस्वी जायसवाल के कोच ज्वाला सिंह ने कहा कि यूपी की 3-4 रणजी टीमें होनी चाहिए।

गोरखपुर के मूल निवासी ज्वाला सिंह ने पूर्वांचल में क्रिकेट की जबरदस्त लोकप्रियता और अद्भुत प्रतिभा के बारे में बात की। वहां के बच्चों को एकलव्य बताया, जो सुविधाओं के अभाव में टीवी देखकर और कमेंट्री सुनकर क्रिकेट सीखने की कोशिश करते हैं। करियर बनाने के लिए उन्हें दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। ज्वाला सिंह ने यशस्वी जायसवाल, सरफराज खान, शिवम दुबे और यश दुबे जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण दिया। ये खिलाड़ी पूर्वांचल से आते हैं, लेकिन दूसरे राज्यों का प्रतिनिधित्व करके भारतीय टीम तक पहुंचे हैं।

क्रिकेट में भी संसाधनों की कमी

ज्वाला सिंह ने कहा, ”मुझे लगता है कि भारत में जैसे हर क्षेत्र में संसाधन होने चाहिए वह क्रिकेट में भी नहीं है। आप देखें कि गोवा जहां पर शायद दो या तीन जिले हैं उनको रणजी का दर्जा मिला हुआ है। मुझे नहीं पता शायद गोवा की आबादी 40-50 लाख से भी कम होगी, जहां तक मुझे लगता है। त्रिपुरा को आपने रणजी ट्रॉफी का दर्जा दिया हुआ है। मैं छोटे-छोटे राज्यों की बात कर रहा हूं। पुडुचेरी के पास रणजी ट्रॉफी की टीम है। इसके साथ-साथ पूर्वोत्तर में अभी हाल ही में लोढ़ा कमेटी जब आई थी उसने सभी को दर्जा दे दिया। जहां पर टैलेंट की अभी बहुत कमी है।”

यूपी की आबादी देखकर नहीं बनी टीम

ज्वाला सिंह ने कहा, ”अगर आप बीसीसीआई का रिकॉर्ड फॉलो करते होंगे तो 20-20 रन पर वहां कि टीमें आउट हुई हैं। उत्तराखंड बनने के बाद भी उत्तर प्रदेश की जनसंख्या लगभग 21 करोड़ के ऊपर है। अगर यूपी की जनसंख्या देखें और दुनिया में देशों से तुलना करें तो सतावें से 10वें नंबर के बीच आ सकता है। अगर मैं गलत नहीं हूं तो अमेरिका की शायद 37 करोड़ के आसपास है। इंग्लैंड की 7 करोड़ है। इंग्लैंड से तीन गुना ज्यादा। रणजी ट्रॉफी की जो टीमें हैं यानी बीसीसीआई ने जो टीम बनाई है वह यूपी राज्य को देखकर नहीं बनी है।”

दूसरे राज्य से खेलकर भारतीय टीम तक पहुंच रहे खिलाड़ी

ज्वाला सिंह ने कहा, ”अगर आप टैलेंट की बात करें तो पूर्वांचल से अभी भी इंडियन टीम में यशस्वी जायसवाल खेल रहे हैं। सरफराज खान खेल रहे हैं। शिवम दुबे खेल रहे हैं। यश दुबे खेल रहे हैं। अगर ढूंढेंगे तो कितने नाम मिल जाएंगे, जो यूपी के हैं और कहीं से खेलकर इंडिया खेल रहे हैं। यहां के बच्चों को काफी दिक्कत होती है। दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। वहां खेलना पड़ता है। फिर वहां से आ रहे हैं।”

यूपी में तीन से चार रणजी टीमें हों

ज्वाला सिंह ने कहा, ”आप सोचिए कि कितना मुश्किल होता अपना घर छोड़ना। यूपी इतना बड़ा है और 11 लोग ही रणजी ट्रॉफी खेलेंगे। तीनों फॉर्मेट मिला ले तो 25 लोग खेलेंगे। उत्तर प्रदेश के साथ न्याय नहीं हो रहा है। इसका समाधान यह है कि कम से कम यूपी में तीन से चार रणजी टीमें हों। एक तो है तीन और होनी चाहिए। तब कहीं इन बच्चों को मौका मिलेगा और जब ऐसा होगा तो किसी को अपना घर छोड़ के नहीं जाना पड़ेगा।”

पूर्वांचल के बच्चों को एकलव्य करार दूंगा

ज्वाला सिंह ने कहा, ”मैं वेस्टइंडीज (कैरेबियाई देश) छोड़कर दुनिया की सभी क्रिकेट खेलने वाली देशों में गया हूं। मैं इंग्लैंड, अफ्रीका, न्यूजीलैंड हर जगह गया हूं, देखा हूं, रहा हूं। जो टैलेंट हमारे पूर्वांचल में है, यूपी में उस बेल्ट में है, जहां से मैं आता हूं वहां अविश्वसनीय टैलेंट है। वहां पर तो बच्चों को कोचिंग नहीं मिलती है। मैं वहां के बच्चों को एकलव्य करार दूंगा क्योंकि बिना कोच के वो टीवी देख के हम भी टीवी देख के क्रिकेट सीखते हैं।”

सबसे ज्यादा क्रिकेट का क्रेज पूर्वांचल में है

ज्वाला सिंह ने कहा, ”मुझे लगता है कि सबसे ज्यादा क्रिकेट का क्रेज पूर्वांचल में ही है। कहीं न कहीं जो सुविधाएं हैं उसको मैच नहीं करती हैं। अभी उत्तर प्रदेश को खुद का स्टेडियम मिला है छह-आठ साल पहले भी वह भी यूपीसीए (उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन) का नहीं है। हालांकि, मैं राजनीतिक बात नहीं करना चाहता हूं, लेकिन जब से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने हैं कुछ हद तक सुधार हुआ है।”

सुविधाएं बढ़ा देंगे, लेकिन मौके कैसे बढ़ाएंगे

ज्वाला सिंह ने कहा, ”अभी गोरखपुर में भी एक क्रिकेट स्टेडियम बन रहा है। बनारस में भी बन रहा है। अब बूम आ रहा है। आप सुविधाएं बढ़ा देंगे, लेकिन मौके कैसे बढ़ाएंगे। आज यूपी के बच्चे दूसरे राज्यों में क्यों जाते हैं, क्योंकि यहां पर नौकरी नहीं मिलती है। मैं क्रिकेट के ऊपर की बात कर रहा हूं। यहां पर आप कौन से सेक्टर में जॉब है। ये समस्या है और मैं क्रिकेट की बात करूंगा। मुझे लगता है कि यहां पर एक या दो टीम बढ़ानी चाहिए।”

मेरठ मेवरिक्स ने जीता खिताब

रिंकू सिंह की अगुआई वाली मेरठ मेवरिक्स ने भुवनेश्वर कुमार की अगुआई वाली लखनऊ फॉल्कंस को 94 रनों से हराकर यूपी टी20 लीग 2026 का खिताब जीता। मेरठ ने दूसरी बार खिताब जीता। इससे पहले 2024 में माधव कौशिक की कप्तानी में मेरठ ने पहले सत्र का खिताब जीता था। पूरी खबर पढ़ें।