भारत की दिग्गज महिला पहलवान और विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता पूजा ढांडा को भरोसा है कि आने वाले एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करेंगे। जनसत्ता के साथ बातचीत में पूजा ढांडा ने भारत को दोबारा कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिलने, भारतीय रेसलिंग के बदलते माहौल, बच्चों में बढ़ती खेल संस्कृति और विनेश फोगाट की वापसी जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।
साल 2018 में गोल्डकोस्ट में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वालीं पूजा ढांडा ने कहा कि भारतीय रेसलिंग अब फिर से पटरी पर लौट रही है और देश के खिलाड़ी आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स में ढेरों मेडल जीतने का दम रखते हैं।
सवाल: भारत को फिर से कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिली है। इसको किस तरह से देखती हैं?
पूजा ढांडा: बहुत ही बढ़िया है, क्योंकि जब 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स भारत में हुए थे तो उस समय मैंने राष्ट्रमंडल खेल में हिस्सा लेने का सपना देखा था। उस समय हम छोटे थे और भारत में कोई चीज हो रही थी तो हमें लगा कि ये बहुत बड़ी प्रतियोगिता है और इसे जीतना चाहिए। इसके लिए मेहनत करनी चाहिए और इसीलिए हमने अपनी मेहनत को दोगुना कर दिया था।
दरअसल, जब कोई चीज अपने घर में होती है तो कहीं न कहीं बढ़-चढ़कर बड़े चाव के साथ बच्चे प्रैक्टिस करते हैं कि हमें अपना सौ फीसदी देना है और गोल्ड मेडल ही जीतना है। तो निःसंदेह हमारे देशवासियों और हमारे खिलाड़ियों का फायदा होगा। खिलाड़ी जी-जान लगाकर मैदान पर उतरेंगे और मुझे उम्मीद है कि हमारे खिलाड़ी अब तक का सर्वश्रेष्ठ परिणाम लेकर आएंगे।
सवाल: विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप में आपने कांस्य पदक जीता है। 2018 गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में आपने रजत पदक जीता था। अब जब आप बतौर खिलाड़ी बहुत एक्टिव नहीं हैं। अपनी जर्नी का कोई बेस्ट मूवमेंट याद करना चाहेंगी?
पूजा ढांडा: बिल्कुल जब 2018 में ऑस्ट्रेलिया में कॉमनवेल्थ गेम्स में मैंने देश के लिए रजत पदक जीता था। वह मेरी जिंदगी के लिए बहुत ही अहम क्षण था। मेरी जिंदगी बदलने वाला क्षण था। उसने मेरी जिंदगी को हर तरीके से बदल दिया। सामाजिक रूप से, भावनात्मक रूप से, वित्तीय रूप से हर तरीके से मुझे मान-सम्मान हर चीज मिली जो आज मेरी जीवनशैली में झलकती है और हर पल उस पल का शुक्रिया करती हूं।
सवाल: कुछ ही महीनों में एशियाई खेल होने वाले हैं। भारतीय पहलवानों से कितनी उम्मीदे हैं?
पूजा ढांडा: देखिए बिल्कुल भारत की रेसलिंग काफी बढ़ी है। पहले जो नतीजे आए हैं, उससे बेस्ट परिणाम इस समय जो हमारे खिलाड़ी हैं उनसे देने की उम्मीद है। मैं उन सभी को शुभकामनाएं देना चाहती हूं कि वह एशियाई खेलों में अपना बेस्ट करें, क्योंकि इंडिया किसी से पीछे नहीं है।
इंडिया के पास हर सुविधाएं हैं। मेहनत की भी कोई कमी नहीं है। किसी भी चीज की हमारे पास कोई कमी नहीं है। बिल्कुल पूरी उम्मीद है कि न सिर्फ कुश्ती से बल्कि सभी खेलों से बहुत ही अच्छे नतीजे मिलेंगे और अनेकों मेडल हम जीतेंगे।
सवाल: आप अब बच्चों को रेसलिंग की ट्रेनिंग देती हैं। खुद बहुत बड़ी रेसलर हैं। कैसा भविष्य दिख रहा है?
पूजा ढांडा: देखिए पहले और अब में फर्क यह है कि वर्तमान में माता-पिता बहुत छोटी उम्र से ही बच्चों को खेल में डाल रहे हैं, जिससे उनकी फिटनेस बरकरार हो और वे बड़े खिलाड़ी बन सकें। पहले ऐसा होता था कि बड़ी उम्र के बाद थोड़ा सा मुश्किलें आती थीं। अब बच्चे चूंकि शुरुआत से ही 3-4 साल से ही खेलों में आ रहे हैं तो उनका फिटनेस लेवल अलग ही हो जाता है। उनकी अचीवमेंट जल्दी आने लग जाती हैं।
यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि यंगस्टर्स में आगे बढ़ने की बहुत ज्यादा उत्सुकता है। निःसंदेह आने वाले ओलंपिक खेलों, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में हम देखेंगे कि आज से 10-15 साल बाद बहुत अच्छा कर रहे हैं और इसका फायदा हमें वहां मिलेगा।
सवाल: आपने कहा कि अब बच्चे बहुत छोटी उम्र से खेलों में आ रहे हैं। किसी भी खेल में शुरुआत करने के लिए क्या सही उम्र होनी चाहिए?
पूजा ढांडा: देखिए, कुश्ती में ऐसा नहीं है कि हमें जाते ही बच्चे को मैट पर डालना है। अगर हमारे पास छोटे से छोटा बच्चा आता है तो हमारे पास फिटनेस के बहुत से विकल्प होते हैं। हम उन्हें अलग अलग फिटनेस जोन में डालते हैं, ताकि उनका फिटनेस लेवल डेवलप हो और वे धीरे-धीरे रेसलिंग की तरफ बढ़ सकें, क्योंकि कुश्ती एक टफ गेम है।
रेसलिंग पावर वाला गेम है तो आप सीधे किसी भी बच्चे को रेसलिंग में नहीं डाल सकते हैं। उससे पहले उसके कुछ फिटनेस टेस्ट होते हैं। उसके हिसाब से हम रेसलिंग के लिए तैयार करते हैं। तो अगर आप चाहो तो अपने बच्चे को 4-5 साल की उम्र से भी रेसलिंग में डाल सकते हैं, क्योंकि फिटनेस एक ऐसी चीज है जो जन्म से आती है।
सवाल: पिछले दो वर्षों में भारतीय रेसलिंग काफी डिस्टर्ब रही है। अब चूंकि एशियाई खेलों के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं है। ऐसे में आपको क्या लगता है कि भारतीय रेसलिंग पटरी लौट चुकी है?
पूजा ढांडा: बिल्कुल, भारतीय रेसलिंग कुछ समय के लिए डिस्टर्ब हुई थी, लेकिन अब फिर से अपनी गति पकड़ रही है। हमें उम्मीद है कि आने वाले खेलों में पुराने विवादों का कोई असर नहीं पड़ेगा और हमारे खिलाड़ी बड़ी संख्या में मेडल जीतेंगे।
सवाल: हाल ही में विनेश फोगाट वाला मामला भी सामने आया। अदालत ने उनको ट्रायल्स में हिस्सा लेने देने के लिए डब्ल्यूएफआई को निर्देश भी दिये। इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह से देखती हैं ?
पूजा ढांडा: विनेश फोगाट का वापसी करना बहुत बड़ी बात है। उनको हमारी तरफ से शुभकामनाएं कि वह आगे भी देश के लिए अच्छा करें। बहुत बहुत धन्यवाद।
विनेश फोगाट अगर ट्रायल्स में जीत भी गईं तब भी क्या नहीं मिलेगा एशियन गेम्स का टिकट? यहां फंस रहा पेंच
विनेश फोगाट को हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने अनुमति दे दी थी कि वह एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल्स में हिस्सा ले सकती हैं। मगर एक पेंच फिर भी फंस रहा है कि वह शायद ट्रायल्स में जीत के बावजूद एशियाड का टिकट नहीं हासिल कर पाएंगी। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)
