इंडियन प्रीमियर लीग 2026 (IPL 2026) में राजस्थान रॉयल्स के ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से मेला लूट लिया है। 15 साल के वैभव ने 15 पारियों में उन्होंने 242.86 के स्ट्रराइक ररेट से 680 रन ठोक दिये हैं। उन्होंने भारतीय टीम का दरवाजा खटखटा दिया है। हालांकि, वैभव सूर्यवंशी की फील्डिंग पर सवाल उठे हैं, जिस पर उनके कोच मनीष ओझा ने आलोचकों को करारा जवाब दिया है। जनसत्ता से बातचीत में उन्होंने राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों का नाम लेते हुए सवाल किया कि इनमें से किसी फील्डिंग जोंटी रोड्स जैसी थी?
वैभव की फील्डिंग पर सवाल उठाने वाले भारत के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को लेकर मनीष ओझा ने कहा कि वह फील्डर अच्छे थे तो उनसे रन कहां बनते थे। मनीष ओझा ने कहा कि वैभव अभी बच्चे हैं और धीरे-धीरे फील्डिंग में सुधार आएगा। हर चीज में उनसे असाधारण प्रदर्शन की उम्मीद करना संभव नहीं है। मनीष ओझा ने बातचीत में वैभव की सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों के साथ तुलना पर भी अपने विचार रखे। इसके अलावा उन्होंने जसप्रीत बुमराह और पैट कमिंस जैसे गेंदबाजों के खिलाफ बड़े-बड़े शॉट लगाने का कारण भी बताया।
मोहम्मद कैफ की बात मत ही करिये
मनीष ओझा ने वैभव सूर्यवंशी की फील्डिंग पर कहा, “आप सभी मैच में वैभव की फील्डिंग देखिए। किसी से भी एक आधा मैच में कोई मिस फील्डिंग हो जाती है तो इसका मतलब यह नहीं कि उनकी फील्डिंग खराब है। दूसरी चीज कि भारत के जितने भी दिग्गज बल्लेबाज रहे हैं राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली कौन इसमें जोंटी रोड्स था? वैभव तो अभी बच्चा है। अभी तो उसका सीखने का दौर चल रहा है, जो परिपक्व हो गए थे वे भी तो उस तरह से फील्डिंग नहीं कर पा रहे थे। मोहम्मद कैफ की बात मत ही करिएगा। वह बहुत अच्छे फील्डर थे, लेकिन यह भी तो बताएं कि उनसे रन कहां लगते थे?
आलोचकों को कुछ ना कुछ चाहिए
मनीष ओझा ने कहा, ‘‘क्रिकेट रन बनाने और विकेट लेने का खेल है। वहां मिल्खा सिंह नहीं बनना होता है। वैभव अभी बच्चा है। धीरे-धीरे जिस माहौल में है वह फील्डिंग भी सुधारेगा। पहले से उसने बहुत सुधार किया है। अब आलोचकों को कुछ ना कुछ चाहिए तो कुछ न कुछ उठाते हैं, लेकिन यदि ध्यान से देखिए उनके शुरुआती मैच और अब में बहुत अंतर आया है।’’
मनीष ओझा ने कहा, ‘‘उनकी फील्डिंग खराब नहीं है। उनकी फील्डिंग बेहतरीन नहीं है। उनकी फील्डिंग अच्छी है। आप हर चीज में वैभव से बेहतरीन और असाधारण उम्मीद करेंगे तो संभव नहीं है। वह भी इंसान है, कोई मशीन तो नहीं है कि आप बटन दबाएं हर चीज एकदम से हो जाए। आप डिमांड करें कि चलो तुम जोंटी रोड्स की तरह हवा में उड़ जाओ तो वैसे जंप करके वह कैच पकड़ लें, ऐसा संभव नहीं है। एक औसत खिलाड़ी की तुलना में देखें तो उनकी फील्डिंग बहुत अच्छी है।’’
विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर से तुलना गर्व की बात
मनीष ओझा ने कहा, “यदि वैभव की तुलना विराट कोहली या सचिन तेंदुलकर से हो रही है तो यह बहुत ही गर्व बात है, लेकिन मेरा मानना है कि सभी खिलाड़ी अपने आप में अनोखे होते हैं, अलग होते हैं। वैभव के खेलने की शैली अलग है। सचिन तेंदुलकर के खेलने की शैली अलग थी। विराट कोहली अलग शैली में खेलते हैं तो कोई किसी तुलना नहीं कर सकता।’’
मनीष ने बताया, ‘‘…लेकिन हां यह जरूर बोला जा सकता है कि सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली महानतम क्रिकेटरों में से एक हैं। उनके नाम बहुत बड़े-बड़े माइलस्टोन हैं। वैभव अपने भविष्य में प्रदर्शन के दमपर उस माइलस्टोन पर पहुंच पाए तो यह एक बहुत बड़ी बात होगी। कोच के तौर पर मेरे लिए बहुत गर्व की बात होगी। खिलाड़ी के तौर पर वैभव के लिए बहुत बड़ी बात होगी और पूरे बिहार के लिए बहुत बड़ी बात होगी कि यहां का बच्चा सचिन तेंदुलकर जैसे महान क्रिकेटर के प्रदर्शन के अगल-बगल पहुंच रहा है।”
गेंदबाज कोई भी हो शैली नहीं बदलती
वैभव सूर्यवंशी ने जसप्रीत बुमराह, पैट कमिंस और जोश हेजलवुड जैसे दुनिया के दिग्गज गेंदबाजों के खिलाफ भी आक्रमकता नहीं छोड़ी। इनके खिलाफ भी पहली ही गेंद से आक्रमकता दिखाई। मनीष ने इसे लेकर बताया, “वैभव की यह खासियत शुरू से रही है कि आप उनको जो भी बताते हैं उन सभी चीजों को वह प्रैक्टिस में बखूबी उसका अभ्यास किया करते थे और जब वह मैच खेलने जाया करते थे चाहे किसी भी स्तर का मैच रहे सामने किसी भी स्तर के गेंदबाज रहे, लोकल टूर्नामेंट रहे या स्टेट मैच हो, सब में उनके खेलने की शैली बिल्कुल प्रैक्टिस की तरह ही हुआ करती थी।’’
गेंदबाज का चेहरा या शोहरत नहीं देखते वैभव सूर्यवंशी
शुरुआती चरण से यह उनकी तैयारी थी उनको इस तरह तैयार कराया गया था कि मैच को कैसे हैंडल करना है। मैच में बैट्समैन गेंदबाज को नहीं गेंद को देखते हैं क्योंकि बॉलर कोई भी हो वह गेंद ही फेकेगा। शुरू से ही उनके दिमाग में यह डाला गया कि खेलने की शैली बदलती नहीं है, जैसे प्रैक्टिस में कुछ करें और मैच में कुछ और करें।
वैभव ने बताई गई सभी गाइडलाइंस को ठीक से पालन किया और उसको अपनाया। वह जैसा प्रैक्टिस में करते थे वैसे ही मैच में कर रहे हैं। वही चीज आज उनको बहुत मदद कर रही है। मैच में जब वह जाते हैं तो बड़े बड़े गेंदबाज सामने होते हैं, लेकिन वह उनका चेहरा, उनका नाम, उनकी शोहरत को नहीं देखते, बल्कि उनकी गेंद को देखते हैं और उसके मेरिट के हिसाब से खेलते हैं।
वैभव सूर्यवंशी T20 के डॉन ब्रैडमैन
वैभव सूर्यवंशी ने एलिमिनेटर मुकाबले में हैदराबाद के खिलाफ 12 छक्के लगाए और क्रिस गेल के 14 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा। उनकी पारी के बाद खुद गेल भी प्रभावित हुए और नया नाम उन्हें दिया। ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने टी20 का ब्रैडमैन तक इनडायरेक्टली बता दिया। पूरी खबर पढ़ें।
