तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी राज्य में खेलों को बढ़ावा देने में जुटे हैं। राज्यभर में नई प्रतिभाएं तलाशी जा रही हैं। इसके बावजूद सूबे के जो खिलाड़ी पहले से पदक जीत रहे हैं, उन्हें आवश्यक सुविधाएं नहीं मुहैया कराई जा रहीं। ऐसा भी नहीं कि खिलाड़ी आवाज नहीं उठा रहे, पर सुनवाई ही नहीं हो रही।

यह कहना इंडियन एथलेटिक्स सीरीज 3 की 100 मीटर महिला दौड़ की विजेता नित्या गांधे का है। उन्होंने ‘जनसत्ता’ से बातचीत में कहा कि सरकार से जो मदद खिलाड़ियों को मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल रही। सरकार से अपेक्षित सहयोग मिले तो तेलंगाना देश और दुनिया में पदकों से चमक उठेगा।

तेलंगाना की धाविका नित्या गांधे पांच साल से राष्ट्रीय कैंप में जी-जान से मेहनत कर रही हैं। एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में 4×100 मीटर रिले में रजत पदक विजेता नित्या का लक्ष्य सौ मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़ने का है, लेकिन राज्य सरकार की बेरुखी से आहत हैं। नित्या का कहना है कि राज्य सरकार से वह सहयोग नहीं मिल रहा, जो अन्य राज्यों के खिलाड़ियों को मिलता है।

तेलंगाना से बहुत कम खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचते हैं। हमें केवल प्रशिक्षण, प्रायोजक और चिकित्सा सहायता की सुविधाएं चाहिए। यदि सरकार खिलाड़ियों का सहयोग करेगी तो न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि पूरा राज्य पदक से चमक उठेगा। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘पदक जीतने पर ही लोग उनसे संपर्क करते हैं, क्योंकि फोटो अखबार में छपता है, लेकिन असली मदद शून्य है।’’

पीटी सर ने पहचानी नित्या की प्रतिभा

नित्या कहती हैं कि एथलेटिक्स की शुरुआत आईसीएससी स्कूल से हुई। उन्होंने कहा कि स्कूल में पीटी सर ने मेरी प्रतिभा को पहचाना। 10वीं के बाद एथलेटिक्स में करियर बनाने का फैसला किया, जिसमें परिवार, स्कूल और कालेज का पूरा साथ मिला। नित्या ने कहा कि तमाम मुश्किलों के बाद भी भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) एचटीसी हैदराबाद में नागपुरी रामेश्वर सर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया।

उन्होंने बताया, ‘‘मैंने अंडर-18 और अंडर-20 स्तर पर कई पदक जीते। कोविड-19 के बाद राष्ट्रीय शिविर पटियाला पहुंचीं, जहां से फिर प्रशिक्षण में तेजी आई।’’ वर्तमान में नित्या के कोच श्रीनिवास हैं। नित्या कहती हैं कि श्रीनिवास सर ने मेरी हर खामियों को देखा, फिर उन पर काम किया और मुझे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार किया।

आर्थिक मदद के अलावा अन्य सुविधाएं शून्य

पश्चिम-मध्य रेलवे में तीन साल से कार्यरत नित्या को इनाडु के सीएसआर कार्यक्रम के जरिये हर महीने 10 हजार रुपये मिलते हैं, पर एशियाई चैंपियनशिप में पदक के बाद भी राज्य सरकार से कोई सहयोग नहीं मिलता। आर्थिक सहयोग के अलावा अन्य सुविधाएं भी शून्य हैं।

हाल ही में एशियाई चैंपियनशिप में पदक के बाद खेल मंत्रालय की योजना ‘TOPS’ में टीम के सदस्यों को शामिल किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘टाप्स के तहत अकेले देश या विदेश में प्रशिक्षण नहीं ले सकते। वह जब पूरा दल तैयार होगा तब भेजा जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय खेलों में तीन पदक जीते उसमें राज्य से कुछ सहयोग मिला। पर एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में भी कोई अतिरिक्त मदद नहीं मिली। मैंने हाल ही में राज्य में सर्टिफिकेट और एक पत्र जमा किया। साथ ही इस साल सितंबर में शुरू होने वाले एशियाई खेलों की तैयारी के लिए भी एक पत्र राज्य सरकार को लिखा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया।’’

100 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ना लक्ष्य

उन्होंने कहा, ‘‘4×100 मीटर रिले टीम राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालिफाई कर चुकी है और एशियाई खेलों के लिए भी उम्मीदें बंधी हैं। मेरा लक्ष्य 100 मीटर का राष्ट्रीय रिकार्ड तोड़ना है। मुझे नहीं पता कितना समय लगेगा, लेकिन मेहनत करूंगी।’’

बता दें कि इंडियन एथलेटिक्स सीरीज 3 की 100 मीटर महिला दौड़ में तेलंगाना की नित्या ने प्रतियोगिता में 11:63 सेकंड के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया था। कर्नाटक की स्नेहा एसएस 11:63 सेकंड के साथ दूसरे तथा हरियाणा की तमन्ना 11:64 सेकंड के साथ तीसरे पायदान पर रहीं थीं।

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