भारत में जब भी कम उम्र के किसी खिलाड़ी के सीनियर टीम में तहलका मचाने की बात होती है, तो इन दिनों क्रिकेट के युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी का जिक्र जरूर होता है। भारतीय महिला हॉकी टीम में भी एक ऐसी ही 18 वर्षीय युवा सनसनी अपना डंका बजा रही है। नाम है सुनेलिता टोप्पो।
ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के एक छोटे से गांव ‘कुकुड़ा’ से निकलकर, टूटी हॉकी स्टिक से खेलते और छोटे कपड़े पहनने पर समाज के तानों को दरकिनार करते हुए, सुनेलिता ने राष्ट्रीय टीम तक का जो सफर तय किया है, वह किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है।
एफआईएच विश्व कप क्वालिफायर में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरीं सुनेलिता टोप्पो की कहानी हर उस युवा के लिए मिसाल है, जो अभावों के बीच भी आसमान छूने की हिम्मत रखता है।
भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर चुकी है। भारतीय महिला हॉकी टीम पूल बी में तीन मैच में सात अंक लेकर शीर्ष पर रही। अब टीम की निगाहें एफआईएच विश्व कप क्वालिफायर जीतने पर हैं।
कुकुड़ा में 11 अप्रैल 2007 में जन्मीं सुनेलिता टोप्पो भी इसी भारतीय टीम का हिस्सा हैं। सुनेलिता टोप्पो टूर्नामेंट में भारत की ओर से सबसे ज्यादा गोल करने वालों में नवनीत कौर के बाद दूसरे नंबर पर हैं। नवनीत ने अब तक 4, जबकि सुनेलिता ने दो गोल किए हैं।
जिस उम्र में खिलाड़ी जूनियर टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रही होती हैं, उस उम्र में सुनेलिता सीनियर टीम में अपना डंका बजा रही हैं। जनसत्ता से बातचीत में सुनेलिता टोप्पो ने छोटे से गांव से विश्व कप तक के सफर के बारे में विस्तार से चर्चा की।
किसान मेले में पड़ा हॉकी खेलने का बीज
जिस देश में ज्यादातर बच्चे क्रिकेटर बनने की सोचते हैं, वहां हॉकी को करियर बनाने का ख्याल कैसे आया, के सवाल पर सुनेलिता टोप्पो ने बताया, ‘मैं जहां की रहने वाली हूं, वहां पर हॉकी ज्यादा प्रसिद्ध है। सुंदरगढ़ में कुकुड़ा गांव (राजगंगपुर ब्लाक) है हमारा। हमारे गांव में किसान मेला होता है। मैंने पहली बार वहीं लड़कियों को हॉकी खेलते देखा था। वही देखकर मेरी भी हॉकी खेलने की इच्छा हुई।’
सुनेलिता ने बताया, ‘मैंने अपने पापा से बोला कि मुझे भी हॉकी खेलना है, तो तब से मैंने स्टार्ट किया। यह करीब साल 2015 की बात है। साल 2018 में मुझे सुंदरगढ़ स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एसएआई) स्पेशल एरिया गेम्स (एसएजी) में दाखिला मिल गया। वहीं रहते हुए मैंने साई (SAI) और ओडिशा राज्य की ओर से टूर्नामेंट खेले।’
SAI लीग में निखरी सुनेलिता की प्रतिभा
सुनेलिता टोप्पो ने बताया कि 2021 में साई लीग शुरू हुई। उसमें उन्होंने सब-जूनियर और जूनियर स्तर पर खेला। उसके बाद 2022 में गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों में ओडिशा का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय खेलों में ओडिशा हॉकी टीम का प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक नहीं रहा था। टीम क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई थी, लेकिन सुनेलिता टोप्पो अपने खेल से जरूर हॉकी प्रेमियों को प्रभावित करने में सफल रहीं।
15 साल में जूनियर इंडिया टीम में चयन
यही वजह रही कि उसी साल यानी 2022 में ही सुनेलिता को भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में चुन लिया गया। जूनियर टीम में रहते हुए सुनेलिता ने 2023 में जापान में हुए जूनियर एशिया कप में स्वर्ण पदक जीता। जूनियर एशिया कप में सुनेलिता टोप्पो ने कुल पांच गोल दागे। इसमें सेमीफाइनल में जापान के खिलाफ गोल भी शामिल है। सेमीफाइनल में भारत ने जापान को 1-0 से हराया था और वह एकमात्र गोल सुनेलिता टोप्पो का ही था।
16 साल में सीनियर महिला टीम में चयन
जूनियर एशिया कप में अच्छे प्रदर्शन का नतीजा रहा कि सुनेलिता को 2023 में भारतीय सीनियर महिला टीम में जगह मिली। सुनेलिता ने बताया, ‘जूनियर टीम साउथ अफ्रीका दौरे पर थी। उसके बाद सीनियर टीम के लिए ट्रायल हुआ। उसमें मेरा चयन हुआ और मैं सीनियर टीम में चुन ली गई।’
सुनेलिता ने बताया, ‘जब हॉकी खेलना शुरू किया था तब तो बहुत मुश्किल था, क्योंकि छोटे से गांव से आना, फिर उस तरह के इक्विपमेंट वगैरह हो गया, जैसे हॉकी स्टिक वगैरह, शू वगैरह, जर्सी वगैरह खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे।’
सुनेलिता ने बताया, ‘उस समय मेरी मौसी (मां की कजिन) अनुपा बरला भी इंडिया के लिए खेलती थीं।’ सुनेलिता की मां और पिता दोनों चर्च में काम करते हैं। सुनेलिता के परिवार में माता-पिता के अलावा दो भाई और हैं।
सुनेलिता बताती हैं, ‘जब तक मैं इंडिया के लिए नहीं खेली थी तब तक तो बहुत दिक्कत होती थी, क्योंकि मेरे दो भाई भी हैं। उन्हें भी पढ़ाना था। जब मैंने स्टार्ट किया तब इतना पैसा नहीं था। तब मैंने पापा से बोला कि हम तीन हैं तो आप उतना ज्यादा अफोर्ड नहीं कर सकते तो मुझे हॉकी खेलने दीजिए। इस वजह से मैंने स्टार्ट किया कि खेलूंगी तो अपने परिवार के लिए कुछ कर पाऊंगी।’
टूटी-फूटी स्टिक से हुई करियर की शुरुआत
क्या कभी ऐसा समय भी आया कि हॉकी स्टिक, शूज या अन्य इक्विपमेंट खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे? यह पूछने पर सुनेलिता ने बताया, ‘जब स्टार्ट किया तो उस समय तो कुछ था ही नहीं, क्योंकि हमारे गांव में फाइबर स्टिक नहीं मिलती थी। सीनियर खिलाड़ियों की जो भी टूटी-फूटी स्टिक मिलती थी उसे लेकर खेलना स्टार्ट किया था।’
अपनी सफलता में माता-पिता के योगदान को लेकर सुनेलिता ने कहा, ‘मुझे यह लगता है कि मम्मी-पापा का सपोर्ट बहुत बड़ी चीज है। जैसे मैंने बोला कि खेलना है तो उन्होंने पूरा सपोर्ट किया।’ सुनेलिता ने बताया, ‘हमारे उधर लड़कियां का स्कर्ट या शॉर्ट पहनकर खेलना सामान्य बात नहीं है। गांव-वाले ऐतराज करते हैं। वहां लड़कियां स्कर्ट या शॉर्ट्स वगैरह नहीं पहन सकतीं।’
सुनेलिता ने बताया, ‘…लेकिन मेरे मम्मी-पापा ने मुझे खेलने से कभी मना नहीं किया। उन्होंने सपोर्ट किया। वह मेरे लिए बहुत अच्छी बात रही। उन्होंने कोच को मना नहीं किया। कोच ने हां बोला तो खेलने के लिए भेज दिया। उन्होंने यह नहीं सोचा कि गांव वाले क्या बोलेंगे? कि लड़की को क्यों खिला रहा है? तो मम्मी-पापा बहुत सपोर्ट किए हैं इस चीज के लिए।’
डोमिनिक टोप्पो से सीखा हॉकी का ककहरा
सुनेलिता टोप्पो ने हॉकी का ककहरा डोमिनिक टोप्पो (Dominic Toppo) से सीखा। डोमिनिक टोप्पो ने पिछले दो दशकों में करीब 130 से ज्यादा हॉकी के खिलाड़ी तैयार किए हैं। इनमें से 13 ने देश का प्रतिनिधित्व किया है। डोमिनिक टोप्पो की हॉकी फैक्ट्री आधुनिक समय की अकादमियों से अलग ही एक दुनिया है।
डोमिनिक अपने समय में डिफेंडर्स को छकाते हुए गेंद के साथ अकेले ही एक पोस्ट से दूसरे पोस्ट तक दौड़ जाते थे, लेकिन सही मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण भारतीय हॉकी टीम के लिए खेलने का सपना सिर्फ एक सपना बनकर रह गया। डोमिनिक टोप्पो के बारे में सुनेलिता टोप्पो ने बताया, ‘नहीं, उनकी कोई अकादमी नहीं है। उनका अलग ही सेट-अप है। उन्होंने ही हमारे गांव में लड़कियों को हॉकी खेलना सिखाया था।’
अगला लक्ष्य ओलंपिक खेलना और मेडल जीतना
अगले लक्ष्य के बारे में सुनेलिता टोप्पो ने बताया, ‘अभी वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है तो अभी उसे ही देख रहे हैं। वर्ल्ड कप क्वालिफाई करना बहुत अच्छी बात है। अब इस चीज पर फोकस है कि हम वर्ल्ड कप में बहुत अच्छी परफॉर्मेंस दें। …और अभी तो हमारे लिए दो साल बहुत महत्वपूर्ण हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स हैं। ओलंपिक क्वालिफायर है। एशियन गेम्स हैं। तो यही है कि हम बेस्ट करें और मेरा मुख्य लक्ष्य ओलंपिक खेलना और उसमें मेडल जीतना है।’
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