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संदीप पाटिल ने कहा- धोनी को कप्‍तानी से हटाने पर कई बार हुआ था‍ विचार, सचिन संन्‍यास नहीं लेते तो हो सकते थे ड्रॉप

धोनी और कोहली की तुलना के सवाल पर संदीप पाटिल ने कहा, एक उत्तरी ध्रुव है, एक दक्षिण ध्रुव।

क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी पत्रकारों से बात करते हुए (फाइल फोटो)

भारतीय टीम के पूर्व चयनकर्ता संदीप पाटिल ने बुधवार को एक बातचीत में कहा कि क्रिकेटर खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले से ‘स्तब्ध’ रह गए थे। पाटिल ने ये भी कहा कुछ लोगों की ये राय सही नहीं है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों गौतम गंभीर और युवराज सिंह के बाहर होने के पीछे धोनी का हाथ था। पाटिल ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, “जाहिर है हमारी इस बारे (धोनी को कप्तानी से हटाने के) में कुछेक बार बातचीत हुई थी। हम किसी और को ये जिम्मा देकर एक प्रयोग करना चाहते थे लेकिन विश्व कप (2015) करीब होने के कारण हमें लगा कि ये सही समय नहीं होगा।” पाटिल ने आगे कहा, “हमें लगा कि नए कप्तान को थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। इसीलिए हम विश्व कप में धोनी की कप्तानी में ही उतरे। मेरे ख्याल से विराट को सही समय पर कप्तानी मिली। विराट टीम की कमान वनडे में भी संभाल सकते हैं लेकिन ये फैसला नए चयनकर्ता लेंगे।” पाटिल का कार्यकाल पिछले हफ्ते ही पूरा हुआ है।

पाटिल ने एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि टेस्ट सिरीज के निकट होने के कारण वो धोनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले से स्तब्ध रह गए थे। पाटिल ने कहा, “वो बहुत मुश्किल शृंखला थी। मैं ये नहीं कहूंगा कि धोनी डूबते जहाज के कप्तान थे लेकिन चीजों हमारे हित में नहीं हुईं। और ऐसे में आपका एक वरिष्ठ खिलाड़ी रिटायर होने का फैसला लेता है। ये स्तब्ध कर देने वाला था लेकिन आखिरकार ये उनका (धोनी का) निजी फैसला था।” धोनी और कोहली की तुलना के सवाल पर पाटिल ने कहा कि दोनों में बहुत फर्क है। पाटिल ने कहा, “एक उत्तरी ध्रुव है, एक दक्षिण ध्रुव। हर कप्तान खुद अपनी टीम बनाना चाहता है और अपने खिलाड़ियों की खूबियां जानता है। विराट को ‘एंग्री यंग मैन’ माना जाता है लेकिन उनका गुस्सा उनके काबू में रहता है। धोनी हमेशा शांत रहते हैं लेकिन अपनी बात रखने से कभी पीछे नहीं हटते। मैं जब धोनी के गंभीर और युवराज से संबंधों से जुड़ी खबरें पढ़ीं तो मुझे दुख हुआ। धोनी ने कभी उनके चयन का विरोध नहीं किया।” पाटिल के अनुसार गंभीर और युवराज को निकालना का फैसला पूरी तरह चयनकर्ताओं का था। पाटिल ने कहा, “दोनों कप्तानों ने कभी किसी खिलाड़ी का विरोध नहीं किया।”

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पाटिल ने सचिन तेंदुलकर द्वारा एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के पहले की परिस्थितियों के बारे में भी खुलासे किए। पाटिल ने मराठी चैनल एबीपी माझा को दिए इंटरव्यू में कहा कि सचिन तेंदुलकर अगर वनडे क्रिकेस से संन्यास नहीं लेते तो उन्हें टीम ने निकाला जा सकता था। पाटिल ने कहा, “12 दिसंबर, 2012 को हम सचिन से मिले और उनसे उनकी भविष्य की योजना के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि वो रिटायर होने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। लेकिन चयनकर्ताओं की राय सचिन के बारे में बन चुकी थी।…और बोर्ड को इसके बारे में बता दिया गया था। शायद सचिन को भी ये लग गया था कि ये होने वाला है क्योंकि अगली बैठक से पहले सचिन ने फोन करके कहा कि वो वनडे से संन्यास ले रहे हैं। अगर उन्होंने उस वक्त संन्यास का फैसला न लिया होता तो हमने उन्हें पक्का टीम से निकाल दिया होता।”

हालांकि पाटिल ने एबीपी को दिए अपने एक अन्य साक्षात्कार में इस घटना को ब्योरा थोड़ा अलग ढंग से दिया। पाटिल ने एबीपी को दिए इंटरव्यू में बताया कि नागपुर में चल रहे भारत-इंग्लैंड टेस्ट मैच के दौरान वो उनके तत्कालीन साथी राजिंदर सिंह हंस सचिन से मिले थे और उनकी भविष्य की योजना के बारे में पूछा था। संदीप पाटिल ने कहा, “जहां तक मुझे याद है वो नागपुर में 12 दिसंबर 2012 का दिन था। सचिन आउट हो गए थे और चयनकर्ताओं ने उनसे मिलने और उनकी मर्जी पूछने का फैसला किया। चयनकर्ताओं का प्रमुख होने के नाते मैंने ही वो बैठक कराई ताकि उनके विचार पता किए जा सकें। ये अच्छा काम था। ये एक दिन या एक महीने में नहीं हुआ। सचिन (नवंबर) 2013 में रिटायर हुए थे।” पाटिल के अनुसार सचिन टेस्ट क्रिकेटर पर ध्यान देना चाहते थे और उस समय वो वनडे टीम में नियमित खेल भी नहीं रहे थे। पाटिल ने कहा, “सचिन ने मुझे और संजय जगदाले (बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव) को फोन किया। फिर सामूहिक रूप से ये फैसला लिया गया कि वो वनडे से संन्यास लेंगे।”

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