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संजना कश्यप की राह में बाधा नहीं बन पाई आर्थिक तंगी, अब देश के लिए स्वर्ण जीतने के लिए रिंग में उतरेंगी

संजना बेहद गरीब परिवार से हैं। उनके पिता फूलचंद फल का ठेला लगाते हैं। मां लक्ष्मी ने बताया, 'संजना अपने पिता और भाई के साथ फल के ठेले पर मदद करती है। हम उसे वह मुकाम नहीं दे पाए, जिसकी हकदार थी, लेकिन अपनी लगन के दम पर वह शहर ही नहीं देश का नाम दुनिया में रोशन करेगी।

Author कानपुर | Updated: August 1, 2019 6:03 PM
Sanjana kashyapसंजना कश्यप (फाइल फोटो)।

उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली संजना कश्यप राष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाज हैं। वे राष्ट्रीय स्तर पर अब तक कई पदक जीत चुकी हैं। अब उनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने का है। उनका यह सपना 2 अगस्त से भूटान में होने वाली हेपकीड़ो बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पूरा हो सकता है। वे सब जूनियर वर्ग में देश भर के 42 मुक्केबाजों के साथ पदक के लिए दावा पेश करेंगी। हालांकि, संजना का यहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं रही। उन्हें बहुत ज्यादा आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, लेकिन यह उनके बुलंद हौसले और उनके माता-पिता की बेटी को शीर्ष पर पहुंचाने की कोशिश ही है कि वे आज देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

संजना बेहद गरीब परिवार से हैं। उनके पिता फूलचंद फल का ठेला लगाते हैं। मां लक्ष्मी ने बताया, ‘संजना अपने पिता और भाई के साथ फल के ठेले पर मदद करती है। हम उसे वह मुकाम नहीं दे पाए, जिसकी हकदार थी, लेकिन अपनी लगन के दम पर वह शहर ही नहीं देश का नाम दुनिया में रोशन करेगी। मुझे इतनी खुशी है कि मेरी बिटिया ने गरीब मां-बाप का भी नाम रोशन किया है। आज पूरा शहर बेटी की वजह से हमें पहचान रहा है। यह हमारे लिए बेहद खुशी की बात है।’

संजना के माता-पिता भले ही अपनी बेटी को बहुत ज्यादा आर्थिक मदद नहीं कर पाए, लेकिन वे कभी भी उसके सपनों की राह में रोड़ा भी नहीं बने। संजना ने 2018 में हरदोई में हुए स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद तो संजना ने पदको की झड़ी लगा दी। उसने सहारनपुर राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड, पटना और गुजरात में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीता। संजना ने पिछले साल दिल्ली में हुए नेशनल स्कूल गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता।

संजना ने बताया, मेरा सपना देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। हम जिस जगह रहते हैं वहां लड़कियों को ज्यादा बढ़ावा नहीं दिया जाता, लेकिन मैं कुछ ऐसा करना चाहती हूं जिससे सभी अपनी बेटियों को मेरी जैसी बनाए। संजना के आदर्श उनके माता-पिता हैं। संजना के कोच आजाद सिंह ने बताया, मुझे संजना के ऊपर गर्व है। वह 3 साल पहले मेरे ट्रेनिंग कैंप में आई थी। उसके अंदर खेलने की बहुत ज्यादा लगन थी, लेकिन आर्थिक तंगी होने के चलते वह अन्य बच्चों की तरह ट्रेनिंग कैंप में नहीं आ पाती थी। जब मुझे इसका पता चला तो मैं मुफ्त में ट्रेनिंग देने लगा।

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