ताज़ा खबर
 

शुरुआत में इतना बैट तोड़ते थे विराट कोहली कि कंपनी ने कहा- साल में दो ही दे पाएंगे

विराट कोहली ने कहा था कि सफलता हासिल करने के लिए सही एटीट्यूड का होना बहुत जरूरी है।
Author नई दिल्ली | December 12, 2017 14:13 pm
विराट कोहली बचपन में भी गुस्से में बैट तोड़ डालते थे। (फाइल फोटो)

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली खेल मैदान पर आक्रामक रवैये को सही मानते हैं। कुछ साल पहले एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि सफलता हासिल करने के लिए सही एटीट्यूड का होना बहुत जरूरी है। हालांकि, इस आक्रामक स्वाभाव के चलते शुरुआत में वह इतना बैट तोड़ते थे कि करार करने वाली कंपनी ने साल में सिर्फ दो ही बैट देने की बात कह डाली थी। इसके बाद उन्होंने खुद पर नियंत्रण रखने की कोशिश शुरू की थी। इसके अलावा स्टार क्रिकेटर ने क्रिकेट के प्रति दीवानगी और अन्य पहलुओं के बारे में भी दिलचस्प जानकारी दी थी।

विराट कोहली ने कुछ वर्षों पहले इंडिया टीवी न्यूज चैनल के ‘आपकी अदालत’ कार्यक्रम में यह बात कही थी। वह साल उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा था। टीवी कार्यक्रम में विराट ने अपने आक्रामक रवैये के बारे में भी खुलकर बात की थी। विराट के पिता प्रेम कोहली नौ-दस साल की उम्र में उन्हें कोच राजकुमार शर्मा के पास ले गए थे। उस उम्र में भी वह इतने आक्रामक स्वाभाव के थे कि बैट पटक कर तोड़ डालते थे। अक्सर ही बैट तोड़ने से ज्यादा खर्च होने की बात भी उन्होंने स्वीकार की थी। साथ ही बताया था कि 14-15 साल की उम्र में उनके कोच राजकुमार शर्मा ने बैट बनाने वाली कंपनी बीडीएम से उनका करार करवाया था। हालांकि, विराट के रवैये में तब भी कोई बदलाव नहीं आया था। उन्होंने दिलचस्प खुलासा करते हुए बताया कि बाद में कंपनी ने साल में सिर्फ दो बैट ही देने की बात कही थी। इसके बाद वह अपने व्यवहार को काबू में रखने का प्रयास करना शुरू कर दिया था।

लंबे समय तक टिके रहने की इच्छा: विराट ने बताया कि वह विकेट पर लंबे समय तक टिका रहना चाहते थे। लंबी पारी खेलने के बाद आऊट होने पर भी गुस्सा होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह हमेशा लंबे समय तक खेलने की कोशिश में रहते हैं। ऐसे में आऊट होने या परफॉर्मेंस नहीं देने पर उन्हें गुस्सा आ जाता है। ऐसे में बैट पटक देते हैं। विराट ने मैदान पर गाली देने की बात को सही नहीं माना और साथ ही कहा था कि वह अपने इस व्यवहार में सुधार लाने की कोशिश कर रहे हैं।

पिता के निधन की सूचना पर भी मैच खेलने का लिया था फैसला: वर्ष 2006 में विराट के पिता का 54 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उस वक्त वह रणजी ट्रॉफी के लिए दिल्ली की ओर से मैच खेल रहे थे। पिता के देहांत की खबर के बाद भी वह मैच खेलते रहे और 90 रन बनाकर टीम को हार से बचाया था। च समाप्त होने के बाद वह पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। उन्होंने बताया कि ईशांत शर्मा ने टीम को इसकी सूचना दी थी। टीम प्रबंधन ने मैच खेलने या न खेलने का फैसला उन पर छोड़ दिया था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
Indian Super League 2017 Points Table

Indian Super League 2017 Schedule