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डोपिंग ने बीते साल फिर झकझोरा भारतीय भारोत्तोलन को

भारत के सबसे ज्यादा भारोत्तोलक 2015 में प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के दोषी पाए गए जिससे अच्छा प्रदर्शन हाशिए पर चला गया और अब भारतीय भारोत्तोलकों को अगले साल ओलंपिक से बाहर रहना पड़ सकता है..

Author नई दिल्ली | December 26, 2015 12:51 AM
2014 एशियन गेम में कांस्य पदक जीतने वाले शिवा लिंगम। (फाइल फोटो)

भारत के सबसे ज्यादा भारोत्तोलक 2015 में प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के दोषी पाए गए जिससे अच्छा प्रदर्शन हाशिए पर चला गया और अब भारतीय भारोत्तोलकों को अगले साल ओलंपिक से बाहर रहना पड़ सकता है चूंकि भारतीय भारोत्तोलन महासंघ पर निलंबन की गाज गिरने का खतरा है। 2014 में भारतीय भारोत्तोलन बेदाग रहा था लेकिन इस साल फिर डोपिंग का साया खेल पर पड़ा और सबसे ज्यादा दोषी भारत में पाए गए। साल की शुरुआत में 26 भारोत्तोलकों को विभिन्न घरेलू टूर्नामेंटों में प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के कारण आइडब्ल्यूएफ का अस्थायी प्रतिबंध झेलना पड़ा जबकि साल के आखिर में दो महिला भारोत्तोलक एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में डोप टेस्ट में नाकाम रहीं।

दो महिला भारोत्तोलकों प्रमिला क्रिसानी और मिनाती सेठी को अक्तूबर में पुणे में हुई राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में डोपिंग का दोषी पाया गया। उन पर अस्थायी निलंबन लगा दिया गया है। उन्हें नवंबर के आखिर में ह्यूस्टन में विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने वाली भारतीय टीम से भी हटा दिया गया। नियमों के अनुसार एक कैलेंडर वर्ष में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में तीन पाजिटिव टेस्ट से राष्ट्रीय महासंघ पर एक साल का प्रतिबंध लग सकता है यानी एक और पाजीटिव मामला आने पर भारत अगले साल रियो ओलंपिक में नहीं खेल सकेगा। इससे पहले सितंबर में जमीर हुसैन और अपूर्वा छेत्री भी एशियाई चैंपियनशिप से पहले राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी के टेस्ट में नाकाम रहे। दोनों टूर्नामेंट के दौरान पाजीटिव पाए जाते तो भारतीय भारोत्तोलन महासंघ पर अब तक प्रतिबंध लग सकता था।

महासंघ पर पहले 2004, 2006 और 2009 में प्रतिबंध लग चुका है। भारत को दिल्ली में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने के लिए दो करोड़ रुपए जुर्माना भरना पड़ा था। इस साल विभिन्न टूर्नामेंटों के दौरान और उससे बाहर पाजीटिव पाए गए 26 भारोत्तोलकों में से सर्वाधिक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और मणिपुर के थे जिन्हें जनवरी में यमुनानगर में हुई राष्ट्रीय युवा और जूनियर भारोत्तोलन चैंपियनशिप में दोषी पाया गया। महासंघ ने इन चारों राज्य महासंघों पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया था। दोषी भारोत्तोलकों के कोचों पर भी दो साल का प्रतिबंध लगाया गया। महासंघ ने हाल ही में सेना खेल नियंत्रण बोर्ड पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

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