भारतीय टीम मैनेजमेंट लंबे अरसे से टेस्ट प्रारूप में नंबर 3 के बल्लेबाज की खोज कर रहा है, लेकिन टीम इंडिया को अब तक कोई ऐसा भरोसेमंद बैटर नहीं मिला जो राहुल द्रविड़, चेतेश्वर पुजारा जैसे बैटर्स के बाद इस पोजीशन पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए खेल सके। पिछले 18 महीनों में टीम इंडिया ने नंबर 3 पर कई बल्लेबाजों को आजमाया जिसमें करुण नायर, साई सुदर्शन जैसे बल्लेबाज शामिल हैं, लेकिन उन्होंने भी निराश ही किया।
अब कहानी शुरू होती है श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में खेले गए गॉल टेस्ट मैच से जहां तीसरे नंबर पर देवदत्त पडीक्कल को आजमाया गया। देवदत्त पडिक्कल को भारतीय टेस्ट टीम में तब जगह मिली जब साई सुदर्शन चोटिल हो गए और वो टीम से बाहर हो गए। देवदत्त पडिक्कल को तीसरे नंबर पर खेलने का मौका मिला और श्रीलंका में बल्लेबाजी के लिए मुश्किल पिच पर उन्होंने 167 रन की तगड़ी पारी खेली और इस मैच में भारत को जीत मिली।
देवदत्त पडिक्कल के द्वारा खेली गई इस पारी के बाद कई क्रिकेट एक्सपर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अब अगर साई सुदर्शन टीम में आ भी जाएं तो देवदत्त से ही तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कराई जाए। सबका मानना है कि देवदत्त के पास स्पिन को खेलने की बड़ी काबिलियत है। यही नहीं तीसरे नंबर के लिए जिस टेंपरामेंट की जरूरत होनी चाहिए वो इस बल्लेबाज के पास है तो क्या अब साई अगर ठीक होकर आते हैं तो क्या उन्हें तीसरे नंबर पर मौका मिलेगा। अब आपको बताते हैं कि वो कौन-कौन से कारण हैं जिसकी वजह से अगर साई आते भी हैं तो उनके लिए तीसरे नंबर पर खेलना मुश्किल होगा।
इन-फॉर्म खिलाड़ी को देनी चाहिए प्राथमिकता
तीसरे नंबर पर देवदत्त ने अच्छा प्रदर्शन किया है और उन्होंने खुद को इस नंबर पर साबित किया है। भारतीय टीम प्रबंधन की ये रणनीति रही है कि वो अक्सर उन खिलाड़ियों को मौका देते हैं जो लय में हैं। अब पडीक्कल ने मिले मौके के भुनाया है और जब कोई खिलाड़ी रन बना रहा है तो उसे प्लेइंग इलेवन में बनाए रखना हर लिहाज से सही होगा। वहीं साई के लिए वापसी करने के बाद तुरंत लय हासिल करना आसान नहीं होगा।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट का शानदार अनुभव
देवदत्त पडिक्कल ने घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी और इंडिया-A) में लाल गेंद से लगातार रन बनाए हैं। तकनीकी रूप से उनका खेल लंबी पारी खेलने और परिस्थितियों के अनुसार ढलने के अनुकूल है जिससे उन्हें टेस्ट टीम में ऊपरी क्रम पर स्थिरता मिलती है। देवदत्त के पास फर्स्ट क्लास क्रिकेट का बेहतरीन अनुभव है जिसमें उन्होंने अब तक खेले 57 मैचों की 95 पारियों में 4011 रन 44.56 की शानदार औसत से बनाए हैं जिसमें 14 शतक और 21 अर्धशतक शामिल हैं।
बाएं हाथ के बल्लेबाज का विकल्प
भारत को टॉप-ऑर्डर में दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाजों का संयोजन चाहिए होता है। चूंकि देवदत्त पडिक्कल भी बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं इसलिए टीम संतुलन में बिना कोई बदलाव किए साई सुदर्शन की जगह पडिक्कल आसानी से फिट बैठते हैं। यही नहीं टेस्ट प्रारूप में सफलता के लिए बेंच स्ट्रेंथ का मजबूत होना भी जरूरी है। देवदत्त पडिक्कल को लगातार मौके देने से टेस्ट टीम में नंबर 3 या मध्यक्रम के लिए एक पक्का और भरोसेमंद बैकअप तैयार होगा।
सिराज हैं बेन स्टोक्स से आगे, टॉप-10 में दो भारतीय; WTC 2025-27 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले टॉप-10 बॉलर
मोहम्मद सिराज ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में दो विकेट लिए और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में बेन स्टोक्स को पीछे छोड़ दिया। (इस खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
