Deepa Malik Retirement: डॉक्टर ने कहा था कभी चल नहीं पाएंगी, 20 साल की मेहनत के बाद बन गईं थीं ‘खेल रत्न’

दीपा पैरालम्पिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। उन्होंने 2016 रियो पैरालम्पिक में शॉटपुट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दीपा मलिक को खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया था। (सोर्स -सोशल मीडिया)

पैरा-एथलीट दीपा मलिक ने सोमवार यानी 11 मई 2020 को संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने नेशनल स्पोर्ट्स कोड का पालन करते हुए यह फैसला लिया। भारत के पैरालम्पिक समिति (पीसीआई) के अध्यक्ष के रूप में अपने पद को संभालने के लिए उन्होंने संन्यास ले लिया। दीपा ने कहा, ‘‘इलेक्शन के लिए पीसीआई को पहले ही पत्र सौंप चुकी थी। नई कमेटी को मान्यता देने के लिए हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही थी। यह समय पैरा-स्पोर्ट्स को समर्थन देने का है।’’

संन्यास की घोषणा करने के साथ ही दीपा ने इस बात के भी संकेत दिए कि वे 2022 में एशियाई खेलों में हिस्सा ले सकती हैं। दीपा क जन्म हरियाणा के सोनीपत में 30 सितंबर 1970 को हुआ था। उनका जीवन पिछले 19 सालों से व्हीलचेयर पर ही गुजर रहा है। दरअसल, दीपा जब 30 साल की थीं तो एक बीमारी के कारण उनका ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद कमर के नीचले हिस्से में उन्हें लकवा मार गया था। इस कारण वे चल नहीं सकती हैं। उन्हें जब डॉक्टर ने बताया कि वे चल नहीं पाएंगी तो दीपा की आंखों से आंसू निकल गए थे।

दीपा पैरालम्पिक में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। उन्होंने 2016 रियो पैरालम्पिक में शॉटपुट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। दीपा आईपीसी ओशिनिया एशिया चैंपियनशिप (मार्च, 2016) में जेवलिन इवेंट में एक गोल्ड और शॉटपुट में एक सिल्वर मेडल जीती थीं। दीपा एशियन पैरा गेम्स 2010 में जेवलिन में ब्रॉन्ज, 2014 में जेवलिन में सिल्वर, 2018 जकार्ता में डिस्कस थ्रो और जेवलिन में ब्रॉन्ज मेडल जीती थीं। उन्हें 2012 में अर्जुन अवॉर्ड, 2014 में प्रेसिडेंट रोल मॉडल और 2019 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

नेशनल स्पोर्ट्स कोड के मुताबिक, एक सक्रिय एथलीट किसी भी फेडरेशन में आधिकारिक रूप से पद पर नहीं रह सकता है। इसी नियम का हवाला देते हुए हुए दीपा ने संन्यास का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि संन्यास की घोषणा करना महत्वपूर्ण है। मुझे देश के नियमों के मुताबिक ही चलना होगा। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो मैं 2022 के एशियन गेम्स के वक्त अपने फैसले की समीक्षा कर सकती हूं।

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