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PCI अध्यक्ष बनने से पहले ही ले लिया था संन्यास, रिटायरमेंट की खबरों पर बोलीं दीपा मलिक

रियो पैरालंपिक खेल 2016 की गोला फेंक की एफ 53 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली 49 साल की दीपा को दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर फरवरी में हुए चुनाव मे पीसीआई का अध्यक्ष चुना गया था। खेल मंत्रालय ने पीसीआई को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।

Author May 12, 2020 1:19 PM
रियो पैरालंपिक खेल 2016 की गोला फेंक की एफ 53 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली 49 साल की दीपा

पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी दीपा मलिक ने सक्रिय खेलों से संन्यास ले लिया है और उन्होंने यह फैसला इस साल की शुरुआत में भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) का अध्यक्ष बनने से पहले कर लिया था। दीपा ने हालांकि इसका खुलासा सोमवार को किया।

रियो पैरालंपिक खेल 2016 की गोला फेंक की एफ 53 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली 49 साल की दीपा को दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर फरवरी में हुए चुनाव मे पीसीआई का अध्यक्ष चुना गया था। खेल मंत्रालय ने पीसीआई को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। दीपा ने पीटीआई से कहा, ‘‘किसने कहा कि मैंने आज संन्यास लेने की घोषणा की?

नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले पिछले साल सितंबर में ही मैंने संन्यास ले लिया था लेकिन मैंने सार्वजनिक घोषणा नहीं की थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने संन्यास से संबंधित पत्र पिछले साल सितंबर में पीसीआई को सौंपा था जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके बाद ही मैं पीसीआई अध्यक्ष पद के लिए चुनौती पेश कर पाई थी और मैंने चुनाव जीता तथा अध्यक्ष बनी।’’ दीपा को पिछले साल देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया था।

दीपा ने आज ट्वीट किया था जिसे उन्होंने बाद में हटा दिया। इसमें कहा गया था, ‘‘चुनाव के लिए पीसीआई को बहुत पहले ही पत्र सौंप दिया था, नई समिति को स्वीकृति देने के लिए उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार है और अब खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय से मान्यता के लिए सक्रिय खेलों से संन्यास की सार्वजनिक घोषणा करती हूं। पैरा खेलों की सेवा करने और अन्य खिलाड़ियों की मदद का समय है।’’ रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के कारण कमर के नीचे लकवे की शिकार दीपा ने कहा कि उन्होंने आज पेंशन के लिए आवेदन दिया है जिसकी पैरालंपिक पदक विजेता होने के कारण वह हकदार हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘बात सिर्फ इतनी सी है कि मैंने पेंशन के लिए आवेदन दिया है। पीसीआई अध्यक्ष होने के कारण मैं अब प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकती, मैं नए सफर पर निकल चुकी हूं। लेकिन इसे गलत समझा गया और काफी लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि क्या आपने संन्यास ले लिया है।’’ दीपा ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि आज यह बड़ा मुद्दा क्यों बन गया क्योंकि मैं अब खेलों में सक्रिय नहीं हूं। मैंने सोचा भी नहीं था कि ऐसा होगा।’’

देश की प्रतिष्ठित खिलाड़ियों में से एक दीपा को 1999 में रीढ़ के ट्यूमर का पता चला था जिसके बाद वह कमर के नीचे लकवे की शिकार हो गईं। उन्होंने हालांकि 2011 आईपीसी विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की गोला फेंक की एफ52-53 स्पर्धा में रजत पदक सहित कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते। दीपा ने एशिया पैरा खेलों में चार पदक जीते जिसमें 2010 में भाला फेंक की एफ52-53 स्पर्धा का कांस्य, 2014 में भाला फेंक की एफ52-53 स्पर्धा में रजत और 2018 में दो कांस्य पदक (चक्का फेंक एफ52-53 और भाला फेंक एफ53-54) शामिल हैं।
दीपा को 2012 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

पीसीआई के महासचिव गुरशरण सिंह ने पुष्टि की है कि दीपा ने चुनाव लड़ने से पहले अपने संन्यास लेने का पत्र जमा कराया था। उन्होंने कहा, ‘‘उसने पत्र जमा कराया था और चुनाव अधिकारी ने पत्र के कारण उसके नामांकन पत्र को स्वीकृति दी थी। अगर ऐसा नहीं होता को वह चुनाव कैसे लड़ती। गुरशरण ने कहा कि पीसीआई लॉकडाउन के कारण खेल मंत्रालय को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा नहीं करा पाया और यही कारण है कि खेल मंत्रालय ने सोमवार को उसे मान्यता नहीं दी।

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