हेपेटाइटिस ए से प्रभावित होने की वजह से 2024 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में पदक जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने हार नहीं मानी। पिछले एक साल में शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियाई चैंपियन बनने वाली 22 वर्षीय बॉक्सर अब 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने के इरादे से उतरेंगी।

हालांकि, प्रीति पवार का कहना है कि जिंदगी में कुछ भी तय नहीं होता, इसलिए वह पूरी तैयारी के साथ रिंग में उतरेंगी। दिलचस्प बात यह है कि आक्रामक मुक्केबाजी के लिए पहचानी जाने वाली प्रीति रिंग के बाहर पेंटिंग, क्विलिंग और मंडला आर्ट के जरिये खुद को तनावमुक्त रखती हैं।

भारत की युवा मुक्केबाज प्रीति पवार ने अपने करियर की शुरुआत में ही यह सबक सीख लिया था कि जीवन में कुछ भी निश्चित नहीं होता और उम्मीद के अनुरूप योजनाएं काम नहीं करती, इसलिए वह किसी भी चीज को हल्के में नहीं ले रही हैं।

22 साल की बैंथमवेट (54 किग्रा) मुक्केबाज प्रीति पवार पिछले तीन साल में भारत की सबसे होनहार मुक्केबाजों में से एक बनकर उभरी हैं। उन्होंने मुश्किलों का सामना करते हुए लगातार पदक जीते हैं। प्रीति पवार ने 2023 में सीनियर विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल से बाहर होने के बावजूद प्रभावित किया।

प्रीति पवार ने उसी साल बाद में हांगझू एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक के लिए कोटा हासिल करके वापसी की। हालांकि ‘हेपेटाइटिस ए’ होने के कारण उनका ओलंपिक अभियान बाधित हो गया। बीमारी से तैयारी पर असर पड़ने के बावजूद वह राउंड 16 तक पहुंचीं।

इस अनुभव ने प्रीति पवार के नजरिये को और अधिक संतुलित बना दिया है। प्रीति पवार ने कहा, ‘‘मैं राष्ट्रमंडल खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं और भारत के लिए पदक पदक जीतना चाहती हूं। देखते हैं क्या होता है, क्योंकि कभी-कभी हम कुछ योजना बनाते हैं, लेकिन चीजें वैसी नहीं होतीं जैसी हम चाहते हैं।’’

पेरिस ओलंपिक के बाद लंबे ब्रेक के बाद प्रीति पवार ने जबरदस्त वापसी की है। प्रीति पवार ने 2025 विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल में स्वर्ण पदक जीता और फिर स्पेन में एक इंटरनेशनल टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल किया। इसके बाद उन्होंने कड़े मुकाबले के बीच एशियाई चैंपियनशिप का खिताब जीता। एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक भी महत्वपूर्ण हो गया, क्योंकि इस साल के आखिर में एशियाई खेलों में भी कई वही प्रतिद्वंद्वी शामिल हो सकते हैं।

प्रीति पवार ने कहा, ‘‘यह एक अच्छा मुकाबला था और एशियाई खेलों की तैयारी के लिए बहुत अच्छा था, क्योंकि वहां भी मुझे वही प्रतिद्वंद्वी मिलेंगे। इसने मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम किया है। वहां मेरा प्रदर्शन एक अच्छा संकेत था।’’ हालिया सफलता के बावजूद प्रीति पवार का मानना ​​है कि सुधार की काफी गुंजाइश है, क्योंकि वह 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं।

प्रीति पवार ने बताया, ‘‘मैं यह नहीं कहूंगी कि मैं अभी अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हूं, लेकिन पिछले सत्र के अंत और इस नए सीजन की शुरुआत को देखते हुए मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है। फिर भी कुछ चीजें हैं जिन पर मुझे काम करना है। मेरा लक्ष्य ओलंपिक है। मैं कोई भी मौका चूकना नहीं चाहती।’’

प्रीति पवार ने कहा, ‘‘मुझे अपनी स्किल्स पर काम करने की जरूरत है। मुझे अपने काउंटर गेम को बेहतर बनाना है। मुझे मानसिक रूप से भी और ज्यादा तैयारी करनी है। मैं अपने गेम में नई चीजें जोड़ रही हूं। मैं अटैकिंग गेम खेलती हूं, इसलिए उसमें काउंटर अटैक भी जोड़ने की कोशिश कर रही हूं, क्योंकि हमें अलग-अलग तरह के विरोधी मिलते हैं। अगर दोनों खिलाड़ी अटैकिंग गेम खेल रहे हों तो मुझे काउंटर पर खेलना पड़ता है।’’

रिंग के अंदर अपने आक्रामक अंदाज के लिए प्रसिद्ध प्रीति पवार रिंग के बाहर अपना ज्यादातर समय ऐसे शौक पूरे करने में बिताती हैं जिनमें धैर्य और बारीकी की जरूरत होती है। आमतौर पर कोई भी बॉक्सर जोरदार मुक्के मारने वाले अपने हाथों को नाज़ुक कलाकारी से नहीं जोड़ता, लेकिन क्विलिंग और कैलिग्राफी उनके पसंदीदा शौक हैं।

प्रीति पवार ने बताया, ‘‘मुझे क्राफ्ट्स पसंद हैं। जब भी मुझे वीकेंड या ऑफ-सीजन में समय मिलता है तो मैं क्राफ्ट का काम करती हूं। मैं क्विलिंग करती हूं। मैंने पिछले महीने एक फ्रेम बनाया था, लेकिन अभी मैं बॉक्सिंग पर ध्यान दे रही हूं। टूर्नामेंट के दौरान तनाव कम करने के लिए वह अपने साथ एक मंडला आर्ट कलरिंग बुक भी रखती हैं।’’ यह पूछे जाने पर कि उन्हें खाली समय में क्या करना पसंद है, प्रीति पवार बोलीं, ‘‘मैं ध्यान करती हूं। मेरे पास एक स्केचबुक है, मुझे कलरिंग बुक और मंडला आर्ट पसंद है।’’

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