ग्लासगो 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) से बैडमिंटन, कुश्ती, टेबल टेनिस, हॉकी, क्रिकेट और स्क्वैश जैसे कई लोकप्रिय खेलों को हटा दिए जाने के फैसले ने भारत की पदक संभावनाओं पर गहरा असर डाला है।

बर्मिंघम 2022 के खेलों में इन हटाए गए खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 30 पदक (13 स्वर्ण, 5 रजत और 12 कांस्य) जीते थे, जो भारत के पूरे 61 पदकों का लगभग आधा हिस्सा है। यह नुकसान भारत के लिए नया नहीं है, बल्कि पिछले कई संस्करणों का इतिहास बताता है कि इन खेलों को हटाने से भारत को हमेशा बड़ा आर्थिक व खेल-कूद का नुकसान उठाना पड़ा है।

हटाए गए खेलों में भारत का पुराना दबदबा (2014 और 2018 के आंकड़े)

कुश्ती (Wrestling): बर्मिंघम 2022 में भारत ने कुश्ती में शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 स्वर्ण, 1 रजत और 5 कांस्य सहित 12 पदक हासिल किए थे। अगर पीछे देखें, तो गोल्ड कोस्ट 2018 खेलों में भी भारतीय पहलवानों ने 5 स्वर्ण, 3 रजत और 4 कांस्य सहित कुल 12 पदक देश की झोली में डाले थे। वहीं, ग्लासगो 2014 के खेलों में कुश्ती से भारत को 5 स्वर्ण, 6 रजत और 2 कांस्य समेत कुल 13 पदक मिले थे।

  • बैडमिंटन (Badminton): साल 2022 में पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और सात्विक-चिराग की जोड़ी के दम पर भारत ने 3 स्वर्ण समेत 6 पदक हासिल किए। इससे पहले 2018 में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण (मिक्सड टीम और सायना नेहवाल), 3 रजत और 1 कांस्य सहित कुल 6 पदक जीते थे। 2014 में भी बैडमिंटन से 1 स्वर्ण (पारुपल्ली कश्यप), 1 रजत और 2 कांस्य सहित कुल 4 पदक आए थे।
  • टेबल टेनिस (Table Tennis): बर्मिंघम 2022 में टेबिल टेनिस में अचंत शरद कमल के नेतृत्व में पैरा-इवेंट्स को मिलाकर 4 स्वर्ण समेत 7 पदक आए। 2018 गोल्ड कोस्ट में भारत ने टेबल टेनिस में कमाल करते हुए 3 स्वर्ण, 2 रजत और 3 कांस्य समेत कुल 8 पदक बटोरे थे। 2014 ग्लासगो खेलों में टेबल टेनिस से 1 रजत पदक मिला था।
  • हॉकी और स्क्वैश (Hockey & Squash): बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की महिला क्रिकेट टीम ने रजत पदक जीता, जबकि हॉकी में 2 पदक (1 रजत, 1 कांस्य) और स्क्वैश में 2 कांस्य पदक भारत के नाम रहे। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास पर एक नजर डालें तो 2018 में स्क्वैश में भारत को 2 रजत पदक मिले थे, जबकि 2014 में स्क्वैश में भारत ने पहली बार ऐतिहासिक एक स्वर्ण पदक (दीपिका पल्लीकल और जोशना चिनप्पा) जीता था। इसके अलावा 2014 में पुरुष हॉकी टीम ने रजत पदक अपने नाम किया था।

भारत के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा?

यह नुकसान इसलिए भी गंभीर है क्योंकि राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का रिकॉर्ड कुल मिलाकर शानदार रहा है। भारत ने अब तक कुल 564 पदक जीते हैं और ऑल-टाइम मेडल तालिका में चौथे स्थान पर बना हुआ है। दिल्ली 2010 खेलों में 38 स्वर्ण समेत 101 पदक जीतकर भारत दूसरे स्थान पर रहा था। वहीं, पिछले 3 कॉमनवेल्थ गेम्स के पदकों की तुलना करें तो भारत का प्रदर्शन बहुत शानदार रहा।

  • 2014 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल: भारत ने कुल 64 पदक (15 स्वर्ण, 30 रजत, 19 कांस्य) जीतकर पदक तालिका में 5वां स्थान हासिल किया था।
  • 2018 गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेल: भारत ने कुल 66 पदक (26 स्वर्ण, 20 रजत, 20 कांस्य) के साथ अंक तालिका में तीसरा स्थान हासिल किया था
  • 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल: निशानेबाजी (Shooting) हटने के बावजूद भारत ने 61 पदक (22 स्वर्ण, 16 रजत, 23 कांस्य) जीतकर चौथा स्थान हासिल किया था।
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पाई चार्ट के जरिये समझिए 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की पदक संख्या।
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पाई चार्ट के जरिये समझिए 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की पदक संख्या।
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पाई चार्ट के जरिये समझिए 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की पदक संख्या।

राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के बजट बचत वाले इस फैसले से केवल 10 खेल ही आगामी प्रतियोगिता का हिस्सा रहेंगे। भारतीय ओलंपिक संघ अब शेष बचे खेलों जैसे भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग), मुक्केबाजी (बॉक्सिंग) और एथलेटिक्स में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेलों की गैरमौजूदगी में 2026 की पदक तालिका में भारत के लिए शीर्ष-5 में जगह बनाना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

Exclusive: कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतूंगी, 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन निखत जरीन को हराने वालीं साक्षी चौधरी का ऐलान

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