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भारतीय फुटबॉल पर छाया संकट, पीएम मोदी से हुई जांच कराने की मांग

मोहन बागान के अलावा ईस्ट बंगाल, र्चिचल ब्रदर्स, एफसी गोवा, गोकुलम केरल एफसी, मिनर्वा पंजाब एफसी और ऐजल एफसी अन्य क्लब हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री ने हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

Author Updated: July 9, 2019 1:54 PM
पीएम नरेंद्र मोदी। (file pic)

भारतीय फुटबॉल के समक्ष छाया संकट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गया जब आईलीग के छह क्लबों ने उनसे जांच आयोग का गठन करने और अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) की कार्यशैली की जांच करने का आग्रह किया। मोहन बागान के प्रबंध निदेशक स्वप्न साधन बोस के हस्ताक्षर वाले पत्र में आईलीग क्लबों ने प्रधानमंत्री से ‘हस्तक्षेप करने और खेल को बचाने’ की अपील की है।

मोहन बागान के अलावा ईस्ट बंगाल, र्चिचल ब्रदर्स, एफसी गोवा, गोकुलम केरल एफसी, मिनर्वा पंजाब एफसी और ऐजल एफसी अन्य क्लब हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री ने हस्तक्षेप का आग्रह किया है। क्लबों ने पत्र में लिखा, ‘‘हाल के समय में मीडिया में आई खबरें और एआईएफएफ के प्रेस में जारी बयान संकेत देते हैं कि एआईएफएफ 2013 में अस्तित्व में आई आईएसएल को देश की सबसे सीनियर लीग बनाना चाहता है जबकि 2007 में भारत की पहली पेशेवर फुटबॉल लीग के रूप में शुरू हुई आईलीग को दूसरी टीयर और दूसरे दर्जे की टीम बनाने की कोशिश की जा रही है।’’

पत्र के अनुसार, ‘‘भारतीय फुटबॉल के स्तर में तेजी से गिरावट आई है, फुटबॉल भारत सहित दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है लेकिन इसकी लोकप्रियता की बराबरी जहां तक राष्ट्रीय इकाई का सवाल है तो जरूरी और अच्छे प्रशासन के साथ नहीं की गई है।’’ एआईएफएफ अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने पिछले हफ्ते आईलीग क्लबों को आश्वासन दिया था कि उनका भविष्य सुरक्षित है और कहा था कि वे एएफसी से संपर्क करेंगे जिससे कि दो से तीन साल और आईलीग तथा आईएसएल एक साथ काम करते रहें। इसके एक दिन बाद नाराज क्लबों ने उनके अधिकतर प्रस्ताव मान लिए थे। क्लबों ने हालांकि इंडियन सुपर लीग को भारतीय फुटबॉल में शीर्ष स्तर का दर्जा देने के विवादास्पद कदम पर स्पष्टीकरण मांगा था।

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