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युवराज सिंह का क्रिकेट करियर खत्‍म? चीफ सेलेक्‍टर ने दिया अहम बयान

चीफ सेलेक्‍टर एमएसके प्रसाद के बयान ने कई अटकलों को जन्‍म दे दिया है।
Author August 14, 2017 18:57 pm
बाएं हाथ के दिग्‍गज बल्‍लेबाज युवराज सिंह।

श्रीलंका के खिलाफ अगामी एकदिवसीय दौरे के लिये खब्बू बल्लेबाज युवराज सिंह को टीम में जगह नहीं मिलने पर मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने आज यहां कहा कि युवी को आराम दिया गया है और उनके लिये दरवाजे बंद नहीं हुये हैं। टीम में युवराज का चयन नहीं होने पर यह कयास लगाये जा रहे थे कि उनका करियर खत्म हो गया लेकिन ऐसी आशंकाओं पर विराम लगाते हुये प्रसाद ने कहा कि युवराज को आराम दिया गया है और हम विश्व कप के लिये टीम को तैयार कर रहे हैं जिसके तहत युवाओं को मौका दिया गया है। प्रसाद ने कहा, ‘‘ किसी भी खिलाड़ी के लिये दरवाजा बंद नहीं होता है। सब को क्रिकेट खेलने का अधिकार है। यह उनका जुनून है। वे अपने जुनून का पीछा कर रहे हैं। हम विभिन्न संयोजनों को आजमाना चाहते है। टीम चयन के समय सभी संभावित नामों पर चर्चा की गयी थी। टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी आंद्रे अगासी का उदाहरण देते हुये उन्होंने कहा कि उनका करियर का ग्राफ 30 वर्ष की उम्र के बाद चढ़ा था। तीस वर्ष की उम्र तक उन्होंने दो या तीन खिताब ही जीते थे। आॅस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में भारत ए टीम के शानदार प्रदर्शन के लिये उन्होंने कोच राहुल द्रविड़ की तारीफ करते हुए कहा कि द्रविड़ जैसा कोच मिलने से युवाओं को काफी फायदा हो रहा है।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व चयनकर्ता सबा करीम ने कहा कि बाएं हाथ के दिग्गज बल्लेबाज युवराज सिंह के लिय टीम में वापसी करना अब काफी मुश्किल होगा। सबा करीम ने कहा, ‘‘ युवराज किसी योद्धा की तरह है लेकिन मुझे लगता है कि चयनकर्ता अगामी विश्व कप में उनकी फॉर्म से ज्यादा फिटनेस को देख रहे हैं। 20 ओवर के मैच की फिटनेस और 50 ओवर के मैच की फिटनेस में काफी फर्क होता है।’’ करीम ने कहा, ‘‘मनीष पांडे काफी क्षमतावान खिलाड़ी है और उन्हें और ज्यादा मौके देने चाहिये। भारत ए टीम के कप्तान के रूप में उन्होंने शानदार खेल दिखाया है और शायद वह इस टीम के सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक हैं।’’

लगभग 17 वर्ष के क्रिकेट करियर में युवी ने भारतीय टीम को कई यादगार लम्हें दिये हैं। बात चाहे 2007 में हुये पहले टी-20 विश्व कप की हो या 2011 में भारत में आयोजित विश्व कप की, दोनों ही विश्वकप में उन्होंने लगभग अपने दम पर टीम को चैंपियन बनाया। 2011 के विश्वकप के दौरान कैंसर से जूझते हुये उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल का प्रदर्शन किया। कैंसर से निजात पाने के बाद भी युवी ने शानदार तरीके से मैदान में वापसी की।

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