क्या सफल होगा विभिन्न प्रारूपों में कप्तानों का प्रयोग

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने टी-20 टीम की कप्तानी छोड़ने का एलान किया है।

रोहित शर्मा एवं विराट कोहली। फाइल फोटो।

भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने टी-20 टीम की कप्तानी छोड़ने का एलान किया है। उन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से जानकारी साझा की। वे टी-20 विश्व कप के बाद इस पद से मुक्त होकर पूरी तरह से अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान लगाना चाहते हैं। हालांकि इस फैसले के कयास लंबे समय से लगाए जा रहे थे। मई में ही पूर्व चयनकर्ता किरण मोरे ने संकेत दिए थे कि इंग्लैंड दौरे के बाद कोहली इस जिम्मेदारी को रोहित शर्मा को सौंप सकते हैं। विश्व में पहले से अलग-अलग प्रारूपों के लिए अलग-अलग कप्तान का चलन है और इसमें कई देश काफी सफल भी रहे हैं।

विराट के इस फैसले से प्रशंसक भले ही भौचक हों लेकिन क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि वे काफी समय से इसका संकेत दे रहे थे। उन्होंने ट्विटर पर एक पत्र साझा कर अपने इस फैसले से अवगत कराया। उनके भविष्य की योजनाएं क्या हैं, इसे भी इस पत्र के माध्यम से बताया गया। क्रिकेट के जानकारों की मानें तो पत्र में लिखी बातों के अलावा भी कई वजहों ने इस फैसले में अहम भूमिका निभाई है। वैसे कोहली ने पत्र में काम के दबाव को अपने फैसले की मुख्य वजह बताया है। साथ ही वे अपनी बल्लेबाजी को और निखार देना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें कप्तानी के दबाव को किनारे रखना होगा।

जैसा कोहली ने बताया, ‘उसके मुताबिक वे काम के दाबव को कम करना चाहते हैं। उन्होंने सिर्फ टी-20 कप्तानी छोड़ी है।’ कोहली जब से तीनों फॉर्मेट के कप्तान बने हैं, तब से अब तक टीम इंडिया ने 67 टी-20 मैच खेले हैं। इनमें से सिर्फ 45 में ही कोहली टीम का हिस्सा रहे हैं। यानी, 33% मैचों में कोहली को आराम दिया गया। वहीं जो बात इस फैसले में पर्दे के पीछे से काम कर रही थी उसमें आइसीसी जैसे बड़े मुकाबलों में उनकी कप्तानी में कोई खिताब नहीं जीतने का दबाव अहम है। दूसरी तरफ आइपीएल में भी कुछ अच्छा नहीं हो रहा। इस पद के प्रबल दावेदार रोहित इस मामले में काफी आगे निकले। मैच जीतने की बात हो या आइपीएल खिताब, सभी में उनका पलड़ा भारी है।

रोहित के बेहतर प्रदर्शन और कोहली के खराब खेल के कारण बीसीसीआइ के भीतर भी आवाज उठने लगी थी। कई दिग्गजों ने कोहली के कार्यभार पर विचार करने के लिए कहा था। साथ ही मुंबई को पांचवीं बार चैंपियन बनाने के रोहित के कारनामे ने उन्हें इस पद के लिए प्रबल दावेदार बना दिया। दो साल से कोहली का बल्लेबाज के रूप में प्रदर्शन खराब रहा है। उनके ऊपर कप्तानी का दबाव दिख रहा है। 2016 से 2018 के बीच कोहली करिअर के सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे। इस दौरान ज्यादातर उन्होंने सिर्फ टैस्ट मैचों की कप्तानी की थी। वनडे और टी-20 में वो धोनी की कप्तानी में खेल रहे थे।

भारत में पहले भी रहे अलग प्रारूप में अलग कप्तान : देश में पहली बार अलग-अलग प्रारूप में अलग कप्तान बनाने का चलन 2007 में शुरू हुआ। टी-20 विश्व कप के दौरान यह प्रयोग किया गया। महेंद्र सिंह धोनी कप्तान बनाए गए और सफल भी रहे। भारत ने टी-20 विश्व कप खिताब पर कब्जा जमाया। धोनी के इस शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें आॅस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली एकदिवसीय शृंखला के लिए कप्तान बना दिया गया। इस कदम के बाद कयास का दौर शुरू हुआ। चर्चा होने लगी कि धोनी को अब टैस्ट टीम की कप्तानी भी सौंपी जा सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। वर्तमान कप्तान राहुल द्रविड़ की जगह अनिल कुंबले को टैस्ट टीम का कप्तान बना दिया गया। कुंबले ने दस टैस्ट मैचों में टीम की कमान संभाली। ये पहला मौका था जब एकदिवसीय और टी-20 का कप्तान अलग और टैस्ट का कप्तान अलग था। हालांकि, इस दौर में कुंबले सिर्फ टैस्ट खेलते थे। धोनी तीनों प्रारूप में खेल रहे थे। टैस्ट में वे उपकप्तान की भूमिका में थे। कुंबले के संन्यास के बाद नवंबर 2008 में धोनी तीनों प्रारूप में टीम इंडिया के कप्तान बन गए।

सात साल बाद एक बार फिर देश में दो कप्तान का दौर आया। साल 2014 दिसंबर के महीने की बात है। भारतीय टीम आॅस्ट्रेलिया दौरे पर थी। धोनी ने बीच शृंखला में कप्तानी छोड़ने के साथ ही टैस्ट से संन्यास का एलान कर दिया। कोहली टैस्ट टीम के कप्तान बनाए गए। वहीं, वनडे और टी-20 की कप्तानी धोनी करते रहे। जनवरी 2017 में धोनी ने वनडे और टी-20 की भी कप्तानी छोड़ दी। हालांकि, वे इन दोनों प्रारूप में खेलते रहे। इसके बाद से विराट तीनों प्रारूप में टीम के कप्तान हैं। सात साल बाद एक बार फिर भारतीय टीम को अलग-अलग प्रारूप में अलग-अलग कप्तान मिलेगा। इस बार टैस्ट और वनडे में एक कप्तान होगा तो टी-20 में अलग। टीम के उपकप्तान रोहित शर्मा इस रेस में सबसे आगे हैं।

विश्व के कई देश कर रहे हैं यह प्रयोग : आइसीसी के 12 स्थायी सदस्य हैं। यानी, वे देश जो टैस्ट, टी-20, वनडे तीनों प्रारूप में खेलते हैं। इनमें से सात देशों में इस वक्त अलग-अलग प्रारूप में अलग कप्तान हैं। जिन तीन देशों में तीनों प्रारूपों के एक ही कप्तान हैं, उनमें भारत, न्यूजीलैंड और पाकिस्तान शामिल हैं। वहीं, आयरलैंड और जिंबाब्वे के लिए आखिरी बार टैस्ट में कप्तानी करने वाले विलियम पोर्टरफील्ड और बैंडन टेलर क्रिकेट के संन्यास ले चुके हैं।

एकदिवसीय विश्व कप चैंपियन इंग्लैंड और टी-20 चैंपियन वेस्ट इंडीज में अलग-अलग प्रारूपों में अलग कप्तानों का चलन है। 2018 में गेंद से छेड़छाड़ के बाद आॅस्ट्रेलिया में भी वनडे टी-20 की कप्तानी एरॉन फिंच कर रहे हैं तो टैस्ट में टिम पेन टीम के कप्तान हैं। साउथ अफ्रीका में टैस्ट और वनडे, टी-20 के कप्तान अलग हैं। पाकिस्तान में इस वक्त तीनों प्रारूपों में बाबर आजम कप्तान हैं, लेकिन छह महीने पहले तक वहां भी अलग-अलग प्रारूप के अलग कप्तान थे। बांग्लादेश में तो इस वक्त तीनों फॉर्मेट में तीन अलग कप्तान हैं।

‘स्प्लिट कप्तानी’ पर क्या है दिग्गजों की राय

पूर्व विकेटकीपर और मुख्य चयनकर्ता किरण मोरे ने टैस्ट और सीमित ओवर के प्रारूप में अलग-अलग कप्तान बनाए जाने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि मुझे विश्वास है कि रोहित शर्मा को जल्द मौका मिलेगा। ‘स्प्लिट कप्तानी’ भारत में काम कर सकती है। मुंबई की जीत के बाद पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने भी लिमिटेड ओवर क्रिकेट में रोहित शर्मा को कप्तान बनाने की बात कही थी। पूर्व चयनकर्ता मदन लाल ने भी इसका समर्थन किया था। हालांकि पूर्व कप्तान कपिल देव इस तरह के प्रयोग के खिलाफ थे। कपिल ने कहा था कि एक कंपनी के दो सीईओ नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा था कि हमारी संस्कृति में ऐसा नहीं हो सकता है। इसकी वजह बताते हुए कपिल ने कहा था कि तीनों प्रारूपों में हमारी 70 से 80 फीसद टीम एक जैसी होती है। ऐसे में टीम के लोग अलग-अलग कप्तानी की थ्योरी और सोच को पसंद नहीं करेंगे।

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