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सौरभ गांगुली पर वीरेंद्र सहवाग ने की बड़ी भविष्यवाणी, दादा ने भी खोले वीरू-युवी के राज

सौरभ गांगुली ने भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में से एक बनने के लिए कई बड़े मैच खेले हैं। वहीं मैदान के बाहर वह ऐसे शख्स रहे, जिस पर उनके खिलाड़ी भरोसा करते थे। सहवाग ऐसे ही खिलाड़ी हैं, जो आज भी गांगुली के एहसानमंद हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली (बाएं) और पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग।

वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह, ये दोनों ही खिलाड़ी भारत ​को क्रिकेट के मैदान पर मिली कई जीतों के नायक रहे हैं। वहीं सौरभ गांगुली की बात करें तो कैप्टन होने के नाते जीत की ज्यादातर कहानियां उनके ही इर्द-गिर्द घूमती हैं। गांगुली ने भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में से एक बनने के लिए कई बड़े मैच खेले हैं। वहीं मैदान के बाहर वह ऐसे शख्स रहे, जिस पर उनके खिलाड़ी भरोसा करते थे। सहवाग ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं, जो आज भी सौरभ गांगुली के एहसानमंद हैं। सहवाग आज भी गांगुली का उन पर भरोसा करने के लिए शुक्रिया करना नहीं भूलते हैं। एक वक्त में गांगुली के सबसे करीबियों में शामिल रहे सहवाग आज भी नेतृत्व करने की उनकी क्षमता पर भरोसा करते हैं।

वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह सोमवार (30 अप्रैल) को नई​ दिल्ली में थे। वह सौरभ गांगुली की आॅटोबायोग्राफी,’ ए सेंचुरी इज नॉट इनफ’ के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। सहवाग और युवराज कार्यक्रम में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। जब उनसे सौरभ गांगुली के बीसीसीआई के अध्यक्ष बनने की संभावनाओं पर सवाल किया गया तो उन्होंने ये जवाब दिया। सहवाग ने कहा,” दादा ( सौरभ गांगुली) 100 फीसदी एक दिन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन वह दिन आने से पहले दादा बीसीसीआई के प्रेसिडेंट बनेंगे।” तीनों क्रिकेट खिलाड़ियों ने अपने बीते दौर की मैदान और निजी जिन्दगी की मनोरंजक यादों को साझा किया, जो अभी तक एक रहस्य ही थीं।

जब गांगुली की किट पैक करते थे सहवाग और धोनी : सहवाग ने बताया, दादा मैच के बाद अक्सर हमारी तरफ आते और हमसे अपनी किट बैग को पैक करने के लिए कहते थे। उन्हें मैच के बाद तुरंत ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए भागना होता था, इसलिए वह हमसे मुझसे ये काम करवाया करते थे। यहां तक कि धोनी भी उनके किट बैग को पैक किया करते थे। इस बात पर युवराज ने भी स​हमति जताई। लेकिन गांगुली ने इस कहानी में थोड़ा सुधार करते हुए अलग ही बात बताई। गांगुली ने कहा, ये कहानी पूरी तरह से सही नहीं है। दरअसल मुझे प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए भागना होता था और युवराज को नाइट आउट के लिए भागना होता था। वह उसमें जरा भी लेट नहीं होना चाहता था। इसके पीछे एक कारण छिपा होता था। युवराज खेल खत्म होने के बाद, बाकी किसी भी खिलाड़ी से पहले मेरी किट को पैक कर देता था। जैसे ही गांगुली ने ये बात कही, पूरा हॉल ठहाकों से भर गया।

जब गांगुली ने दिया युवराज को सहारा : वीरू और युवराज ने उन दिनों को भी याद किया, जब वह टीम में नए थे और गांगुली ने उन दिनों में उनका समर्थन किया था। युवराज ने कहा कि, जब मैं टीम में शामिल हुआ तो दादा ने कहा कि बड़े दिनों के बाद इंडियन टीम में कोई अच्छा फील्डर आया है। दो—तीन मैच के बाद मैं अगली इनिंग्स में अच्छा नहीं खेल पाया और स्पिन गेंदबाजी से जूझने लगा। लेकिन दादा ने मुझे सहारा दिया क्योंकि वो जानते थे कि मैं मैच जिताने वाला खिलाड़ी हूं। गांगुली ने कहा, कि मैं हरभजन, युवराज और वीरू जैसे खिलाड़ियों को सिर्फ इसीलिए सहारा देता था क्योंकि ये बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे और मैं ये बात जानता था। सबसे पहले मैंने उनके दिमाग से टीम से निकाले जाने का डर हटा दिया, क्योंकि मैं उनके साथ खड़ा था। मैंने उनके भीतर इस डर को महसूस किया था।

जब सहवाग को सेलेक्टर्स ने नकारा था : गांगुली ने बताया कि, मुझे याद है कि मुझसे एक सेलेक्टर ने साल 2001 में साउथ अफ्रीका के दौरे पर सहवाग को न ले जाने के लिए कहा था। क्योंकि वह तेज गेंदबाजों को अच्छे से नहीं खेल पाता था। लेकिन मैंने उसे अपने साथ ले जाने की जिद की। वहां पर सहवाग ने ब्लोएमफैनिटियन में अपने पहले टेस्ट मैच में शतक लगाया। बता दें कि सहवाग इंडिया के हेड कोच के पद के दावेदार थे, लेकिन उनकी बजाय रवि शास्त्री को इंडियन टीम के कोच के तौर पर चुना गया था।

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