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लोढ़ा पैनल की सिफारिशों के अध्ययन के लिए यूपीसीए ने गठित की समिति

जब यह पूछा गया कि यूपीसीए के लगभग सभी निदेशक 70 बरस से अधिक उम्र के हैं और इन्हें कब हटाया जाएगा तो शुक्ला ने कहा कि इस बारे में बीसीसीआई की एजीएम में फैसला होगा।
Author कानपुर | September 23, 2016 15:52 pm
इंडियन प्रीमियर लीग के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) के निदेशक राजीव शुक्ला (फाइल फोटो)

लोढ़ा समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) ने शुक्रवार (23 सितंबर) को पांच सदस्यीय समिति का गठन किया। संघ साथ ही अभी 70 साल से अधिक उम्र के अपने निदेशकों को नहीं हटा रहा और इस पर फैसला बीसीसीआई की बैठक के बाद मिले दिशानिर्देशों के आधार किया जाएगा। शुक्रवार को यूपीसीए की वार्षिक आम सभा के बाद संघ के निदेशक राजीव शुक्ला ने बताया कि संघ के चुनाव अगले साल होने हैं इसलिए अभी यथास्थिति बनाए रखी गई है। अगले वर्ष जब चुनाव होंगे तब लोढा समिति की सिफारिशों का आकलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने के लिए आज (शुक्रवार, 23 सितंबर) संघ ने पांच सदस्यीय समिति बनाई जो इन्हें लागू करने के बारे में अपनी रिपोर्ट देगी।

जब यह पूछा गया कि यूपीसीए के लगभग सभी निदेशक 70 बरस से अधिक उम्र के हैं और इन्हें कब हटाया जाएगा तो शुक्ला ने कहा कि इस बारे में बीसीसीआई की एजीएम में जो फैसला होगा और उसके बाद जो निर्देश मिलेंगे उसी के अनुसार कार्रवाई होगी। इस साल यूपीसीए के चुनाव नहीं होने इसलिए इस बाबत कोई फैसला नहीं किया गया। शुक्ला से पूछा गया कि प्रदेश के पूर्व रणजी खिलाड़ियों को निदेशक बनने का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा तो उन्होंने कहा कि पूर्व खिलाड़ियों को एक बार मौका दिया गया था लेकिन उन्होंने यूपीसीए का कोई भी पद लेने से इनकार कर दिया था।

पूर्व खिलाड़ियों के यूपीसीए में पद लेने से इनकार करने का कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि संघ के पद मानद और बिना वेतन के होते हैं जबकि पूर्व रणजी खिलाड़ी ऐसे पद चाहते हैं जिसमें उन्हें कुछ पैसा मिले इसलिए पूर्व खिलाड़ियों को विभिन्न चयन समिति में पद या कोच या मैनेजर का पद दिया जाता है ताकि उन्हें कुछ पैसा भी मिल सके। उन्होंने कहा फिर भी अगली बार जब चुनाव होंगे तो अधिक से अधिक खिलाड़ियों को मौका देंगे क्योंकि हमारे पास युवा सदस्यों की पूरी टीम है।

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