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क्रिकेट में तकनीकी क्रांति

आइसीसी ने भी कई नई तकनीकों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। इसमें ड्रोन के सहारे पिच का निरीक्षण से लेकर बल्लेबाज के बैट पर सेंसर का उपयोग तक शामिल है।

Author Published on: June 13, 2019 1:31 AM
इससे जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाजों को खेलने का तरीका निकाला जा सकता है।

संदीप भूषण

खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए रोजाना किसी न किसी नई तकनीक को हिस्सा बनाया जा रहा है। बात चाहे फुटबॉल की हो या गोल्फ की, सभी में सटीक परिणाम के साथ खिलाड़ियों के खेल को उच्च स्तरीय बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्रिकेट भी इससे अछूता नहीं है। 2017 में इंग्लैंड की धरती पर खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान क्रिकेट में अब तक की सबसे उच्च तकनीक इस्तेमाल की गई। इसी साल आइसीसी ने भी कई नई तकनीकों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। इसमें ड्रोन के सहारे पिच का निरीक्षण से लेकर बल्लेबाज के बैट पर सेंसर का उपयोग तक शामिल है। इन नए उपकरणों ने बल्लेबाजों के साथ अंपायर और प्रशिक्षकों की भी मदद की।

बल्ले पर सेंसर लगाने की तकनीक के सहारे बल्लेबाज अपनी गलतियों के साथ नए गेंदबाज की तरकीबों को भी समझ सकता है। इस सेंसर की मदद से बैकलिफ्ट के कोण से लेकर गेंद पर प्रहार के समय बल्ले की अधिकतम गति तक, सबकी जानकारी क्लाउड के जरिए एक ऐप में संग्रहित हो जाती है। इसके बाद कोच और बल्लेबाज वीडियो समीक्षा के जरिए अपनी गलतियों में सुधार कर सकते हैं।

क्रिकेट में नई तकनीकी खोज के लिए आइसीसी के साथ काम कर रही कंपनी इंटेल ने इस उपकरण को तैयार किया है। कंपनी के मुताबिक इस सेंसर के जरिए बल्ले के हर मूवमेंट को रिकॉर्ड किया जा सकता है। साथ ही इसकी मदद से टीवी पर मैच देख रहे दर्शकों के पास काफी विस्तृत रिपोर्ट पहुंचाई जा सकती है।

कंपनी के मुताबिक सेंसर से बल्ले के किसी भी कोण का आकलन आसानी से किया जा सकता है। साथ ही गेंदबाज की गेंद के कोण और स्विंग का भी पता लगाया जा सकता है। मसलन, जब कोई बल्लेबाज किसी गेंद को हिट करता है और वह गेंद 90 मीटर की दूरी तय कर छक्के के लिए जाती है। इस दौरान सेंसर से यह आंकड़ा मिल सकता है कि गेंदबाज की गेंद की गति और स्विंग के बाद बल्लेबाज ने किसी रफ्तार से बल्ला घुमाया और किस कोण से लगने के बाद गेंद उतनी दूरी तय कर सकी।

आइसीसी के ब्लॉग में कमेंटेटर और पूर्व क्रिकेटर नासेर हुसैन ने कहा कि इस तकनीक से काफी फायदा मिल रहा है। उन्होंने माना कि बगैर सेंसर के उनके द्वारा की गई समीक्षा और सेंसर लगने के बाद की समीक्षा में काफी अंतर है। उन्होने कहा कि जो डाटा उन्हें सेंसर से मिलता है उसे वह आंखों से नहीं पढ़ सकते। उन्होंने कहा कि अभी इस तकनीक का इस्तेमाल उस स्तर पर नहीं किया जा रहा है जिस पर होना चाहिए लेकिन, मुझे विश्वास है कि जल्द ही इसे अपनाया जाएगा। यह कमेंट्री के दौरान समीक्षा में भी काफी मदद पहुंचाएगा। सेंसर तकनीक का इस्तेमाल आस्ट्रेलिया के डेविड वार्नर विश्व कप में कर रहे हैं।

ड्रोन से मैदान का जायजा
ड्रोन लगे कैमरे का इस्तेमाल पिच की जानकारी जुटाने में होता है। इसकी मदद से मैदान का आउटफील्ड, पिच पर घास, घास की स्थिति और उस पर मौजूद आद्रता के बारे में पता लगाया जाता है। पहले भी प्रशिक्षक, कमेंटेटर और टीम के कप्तान मैच से ठीक पहले पिच का आकलन करते थे। लेकिन इससे वे सिर्फ कुछ समय के लिए पिच के बारे में जान सकते थे। ड्रोन कैमरो की मदद से अब खेल के बीच में भी पिच को काफी करीब से देखा जा सकता है और आकलन किया जा सकता है। इस तकनीक की शुरुआत भी आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2017 में हुई।

हॉट स्पॉट
इस तकनीक की मदद से अंपायर यह आसानी से देख सकते हैं कि गेंद बल्ले को छू कर विकेटकीपर के दस्तानों में गई है या नहीं। यह सबसे ज्यादा मददगार तब होती है जब तीसरे अंपायर को एलबीडब्लू का फैसला करना होता है। कभी कभार ऐसा होता है कि गेंद बल्ले को छूने के माइक्रो सेकंड बाद पैड से टकराती है लेकिन मैदानी अंपायर को यह आउट लगाता है। इस स्थिति में हॉट स्पॉट काफी मददगार होता है। इस तकनीक में जब गेंद बल्ले से टकराती है तो कुछ गर्मी पैदा करती है और उसी गर्मी को इंफ्रारेड कैमरे के सहारे देख कर फैसला किया जाता है।

स्पाइडर कैम
स्पाइडर कैम का इस्तेमाल क्रिकेट के अलावा भी कई खेलों में किया जा रहा है। स्पाइडर कैम को कई तारों के सहारे मैदान में टांगा जाता है। इससे मैदान में हो रही गतिविधियों को कई एंगल से देखा जा सकता है। इसके आने से टीवी पर मैच देख रहे लोगों को एक ही शॉट को कई एंगल से देखने का मौका मिल रहा है।

क्या है खासियत
बल्ले पर लगे सेंसर से बल्ले की टाइमिंग का आकलन किया जा सकता है।
इससे यह पता लगाया जा सकता है कि हेलिकॉप्टर शॉट लगाते समय धोनी के बल्ले की गति क्या रही होगी।
इससे विराट कोहली के तेज गेंदबाज और स्पिनर को खेलने की तकनीक का पता लगाया जा सकता है।
इससे जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाजों को खेलने का तरीका निकाला जा सकता है।

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