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टी20 युवाओं का खेल, उम्रदराज हांफे!

उम्रदराज हो रहे विराट और रोहित शर्मा का सुपर फ्लाप होना युवा होते खेल का परिणाम है।

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भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली ! फाइल फोटो।

मनीष कुमार जोशी

आईपीएल 2022 से लोगों की यह धारणा बलवती हो गई कि टी20 क्रिकेट पूर्ण रूप से युवाओं का खेल है। इस खेल में आपको चीते जैसी फुर्ती और बाघ जैसी चपलता चाहिए। आइपीएल 2022 में युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन से सभी हतप्रभ हैं और यही कारण है कि रैना जैसे खिलाड़ी इस समय कमेंट्री बाक्स में बैठे हैं। इस साल की आइपीएल उम्रदराज खिलाड़ियों को खारिज कर रहा है।

उम्रदराज हो रहे विराट और रोहित शर्मा का सुपर फ्लाप होना युवा होते खेल का परिणाम है। इसके बावजूद कुछ टीमों ने उम्रदराज खिलाड़ियों पर भरोसा किया है परन्तु आइपीएल के पहले दौर के समाप्त होते होते उम्रदराज युवा खिलाड़ियों को पछाड़ नहीं पाए हैं। यह कहा जा रहा है कि आने वाले आइपीएल में उम्रदराज खिलाड़ियों की संख्या न के बराबर रह जाएगी। परन्तु उम्रदराज खिलाड़ियों ने कई मौकों पर अपने अनुभव से अपनी टीम की नैया पार लगाई है। मुंबई इंडियंस के विरुद्ध महेन्द्रसिंह धोनी ने अनुभव के दम पर अंतिम चार गेंदो में 16 रन बनाकर टीम को विजय दिलाई है। धोनी के खेल को देखकर लगता है कि अभी उनमे कहीं थोड़ी सी क्रिकेट बाकी है।

आइपीएल शुरू हुआ तब टीम में अनुभवी खिलाड़ियों का होना जरूरी माना गया था। सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीरेन्द्र सहवाग, वीवीएस लक्ष्मण, हरभजन सिंह और जहीर खान जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को टीमों ने साथ रखा था। हरभजन सिंह तो अभी दो वर्ष पहले तक आइपीएल का हिस्सा रहे हैं। लेकिन इन दो साल में पानी बहुत बह चुका है। अब अनुभव की नहीं चपलता की जरूरत है। यदि आपके पास चपलता और शक्ति है तो टीम आपको रोकेगी चाहे आप कितने ही छोटे खिलाड़ी हैं।

आज 2022 में गति, शक्ति और जोखिम का बोलबाला है। जो खिलाड़ी जितनी गति से जोखिम लेगा वह ही सफल है। पलिकल, रितुराज गायकवाड़, नटराजन, उमराब, रवि विश्नोई जैसे युवा शानदार सफलता अर्जित कर रहे हैं। ब्रावो, रिद्धिमान साहा और नबी जैसे उम्रदराज खिलाड़ी गेंद और बल्ले के साथ संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। यहां तक धोनी भी बल्ले से संघर्ष करते दिख रहे हैं। फिर भी कई मौकों पर इन अनुभवी उम्रदराज खिलाड़ियों ने अपनी उपयोगिता साबित की है। अब जब आइपीएल 2022 का पहला दौर समाप्त होने को है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि थोड़े बहुत उम्रदराज खिलाड़ियों को अब तक प्रदर्शन क्या रहा है।

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेन्द्रसिंह धोनी सबसे उम्रदराज खिलाड़ियों में से एक हैं। चेन्नई सुपरकिंग्स की ओर खेल रहे 40 साल के धोनी अब तक बल्ले से संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। मुंबई इंडियंस के विरुद्ध उन्होने जरूर अपने अनुभव की झलक दिखलाई थी जब चेन्नई सुपर किंग्स को अंतिम चार गेंदों में सोलह रनों की जरूरत थी तो अपने अनुभव से टीम को विजय दिलाई।

यहां जरूर महसूस हुआ कि टीम को उनके अनुभव का लाभ मिल रहा है। धोनी ने इस बार आइपीएल में केकेआर के विरुद्ध 50 रन बनाए हैं जो अब तक सर्वाधिक हैं। मुंबई इंडियंस के विरुद्ध 13 गेंद में 28 रन उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। कुल मिलाकर 40 वर्षीय धोनी युवाओं से काफी पीछे छूट रहे हैं परन्तु अपने अनुभव का पूरा लाभ चेन्नई सुपरकिंग्स को दे रहे हैं। वे मैदान में रविन्द्र जडेजा को कप्तानी में सहयोग करते दिखते हैं। नाजुक मौकों पर संयम से बल्लेबाजी करते हुए साथी बल्लेबाजों को सलाह देते हुए दिखते हैं।

धोनी अपने अंदर की सारी क्रिकेट अपनी टीम के लिए उड़ेल रहे हैं। धोनी की तरह ही फेफ डु प्लेसिस भी उम्रदराज हैं और अपनी बची हुई क्रिकेट को पूरी तरह से टीम को दे रहे हैं। प्लेसिस आरसीबी के कप्तान हैं और उनके कंधों पर बड़ी भारी जिम्मेदारी है। दो मैचों को छोड़कर वे अपने बल्ले के साथ संघर्ष कर रहे हैं। पहले मैच में पंजाब किंग्स इलेवन के विरुद्ध उन्हाने 88 रन बनाए और लखनऊ के खिलाफ 96 रनों की पारी खेली।

इसके अलावा छह मैचों में 30 का स्कोर भी पार नहीं कर पाए। चार मैचों में तो दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाए। प्लेसिस सलामी बल्लेबाज के तौर पर बल्लेबाजी करने आते हैं। आरसीअी ने 7 करोड़ में प्लेसिस को खरीदा है। उनकी कीमत उनके अनुभव के लिए लगाई गई है और उनका लाभ टीम को मिल रहा है। उनके प्रदर्शन में निरन्तरता नहीं है जो बताती है कि वे युवा नहीं हैं।

फिर भी अपने भीतर बची हुई क्रिकेट को वे आइपीएल में बिखेर रहे हैं। इसी तरह 38 वर्षीय ब्रावो को चेन्नई सुपर किंग्स ने इस बार 4.40 करोड़ में खरीदा है। ब्रावो की पहचान एक हरफनमौला के रूप में है परन्तु मुख्यत: वे एक गेंदबाज हैं। बल्लेबाजी में तो 2022 आइपीएल के प्रथम चरण में दहाई का आकंड़ा छू नहीं पाए हैं परन्तु गेंदबाजी से अपनी उपस्थित का अहसास कराया है। ब्रावो ने 7 मैचों में 10 रन देकर 12 विकेट लिए हैं जिसे संतोषजनक कहा जा सकता है, परन्तु युवा प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता है। इसे अनुभवी खिलाड़ी का प्रदर्शन कहा जा सकता है।

इसी प्रकार 37 साल के रिद्धिमान साहा को गुजरात टाईंटंस ने 1.90 करोड़ में खरीदा परन्तु यह उम्रदराज खिलाड़ी गुजरात के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रहा है। विकेटकीपर बल्लेबाज को टीम न दो मैच ही खिलाए और उसमें भी 36 रन ही बना पाए हैं। साहा अपनी योग्यता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। इसी तरह अफगानिस्तान के नबी को केकेआर ने 1 करोड़ रुपए में खरीदा लेकिन केकेआर उनका उपयोग करने से डर रही है। उम्रदराज होने के मुहाने पर खड़े रोहित और विराट कोहली भी बुरी तरह विफल रहे हैं।

आइपीएल 2022 संदेश दे रही है कि टी-20 अब शुद्ध रूप से युवाओं का खेल हो गया है। अब यह धारणा गलत साबित हो रही है कि टी-20 में उम्रदराज खिलाड़ियों को खपाया जा सकता है। यह साल बता रहा है कि उम्रदराज खिलाड़ियों को टी-20 में बिलकुल भी नहीं खपाया जा सकता है। फिर भी धोनी, प्लेसिस और ब्रावो जैसे खिलाड़ी अपनी पूरी ताकत के साथ जुटे हैं और अपने में बाकी जितनी भी क्रिकेट है उसका सौ फीसद टीम को दे रहे हैं और मौका पड़ने पर अपने प्रदर्शन से यह जता भी देते हैं कि वे टीम में क्यों हैं। प्लेसिस के 96 रन और धोनी की 13 गेंद में 28 रन की पारियां उनकी उपयोगिता दर्शाती है और यह भी बताती है कि उम्रदराज खिलाड़ियों को टीम में बने रहने के लिए अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी होगी।

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