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सीओए की बैठक का अहम निर्णय आईपीएल में व्यवधान पैदा करने वाले राज्य संघों को मिलेगी कड़ी सजा

बोर्ड के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि यह पाया गया है कि कुछ राज्य ईकाइयां साफ झूठ बोल रही है क्योंकि मैचों के आयोजन का खर्च बीसीसीआई और फ्रेंचाइजी आधा आधा बांटते हैं।

Author नई दिल्ली | March 17, 2017 11:44 PM
सीओए की आज यहां हुई बैठक में यह महसूस किया गया कि राज्य ईकाइयां भ्रामक जानकारियां फैलाने की कोशिश कर रही है जबकि उन्हें आईपीएल मैचों के आयोजन के लिये कभी अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ा है।

प्रशासकों की समिति ने आज सर्वसम्मति से फैसला लिया कि इंडियन प्रीमियर लीग मैचों में व्यवधान पैदा करने की कोशिश करने वाली राज्य ईकाइयों को कड़ी सजा मिलेगी और उचित कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी। सीओए की आज यहां हुई बैठक में यह महसूस किया गया कि राज्य ईकाइयां भ्रामक जानकारियां फैलाने की कोशिश कर रही है जबकि उन्हें आईपीएल मैचों के आयोजन के लिये कभी अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ा है। बोर्ड के एक शीर्ष सूत्र ने कहा कि यह पाया गया है कि कुछ राज्य ईकाइयां साफ झूठ बोल रही है क्योंकि मैचों के आयोजन का खर्च बीसीसीआई और फ्रेंचाइजी आधा आधा बांटते हैं ।

कुछ राज्य ईकाइयां अलग तस्वीर पेश करने की कोशिश में हैं। सूत्र ने कहा, पिछले नौ सत्रों में सात मैचों की मेजबानी करने वाली ईकाई को 60 लाख रूपये की जरूरत पड़ी है जिसमें से 30 लाख रूपये आईपीएल फ्रेंचाइजी ने और बाकी 30 लाख बीसीसीआई ने दिये हैं। यहां राज्य ईकाइयां कहीं तस्वीर में ही नहीं है। उन्होंने कहा, मसलन कानपुर दो मैचों का आयोजन कर रहा है तो उसे उसी के मुताबिक पैसे मिलेंगे। दिल्ली डेयरडेविल्स आईपीएल शुरू होने से पहले बीसीसीआई को 30 लाख रूपये दे देता है और टूर्नामेंट के बाद बीसीसीआई बाकी पैसे देता है। शशांक मनोहर के आईसीसी चेयरमैन के पद से इस्तीफा देने के मसले पर भी बात की गई । सीओए ने तय किया कि राजस्व माडल और संवैधानिक सुझावों पर वह अन्य सदस्य बोर्ड से बातचीत करेगा।

आईपीएल के पिछले सभी टूर्नामेंटों के दौरान पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं लेकिन इस बार ऐसे कदम उठाने की कोशिश की गई है जिससे कि इनसे बचा जा सके। नये दिशानिर्देशों के अनुसार इच्छुक पक्ष ऐसी कंपनियां होनी चाहिए जिनका सालाना टर्नओवर 30 करोड़ रुपये हो और वह 35 प्रतिशत राशि की बैंक गारंटी देने को तैयार हों और साथ ही उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हो। प्रशासकों की समिति (सीओए) के प्रभार संभालने के बाद पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है और आरएफपी जारी करने के बाद इस दिशा में पहला कदम उठाया जाएगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इवेंट मैनेजमेंट की विशेषज्ञ कंपनियों को ही अनुबंध दिया जाएगा।

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