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वर्ल्ड कप विजेता कप्तान का भाई उगाही मामले में दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई दो साल की सजा, ढाई करोड़ का जुर्माना भी भरना होगा

2021 के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में श्रीलंका 180 देशों में से 102वें स्थान पर है, लेकिन काफी कम बार ऐसा होता है कि देश के वरिष्ठ राजनेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में जवाबदेही तय होती है।

फाइल फोटो

श्रीलंका के 1996 विश्व कप विजेता कप्तान अर्जुन रणतुंगा के छोटे भाई को एक व्यवसायी को धमकी देकर उगाही करने के मामले में दो साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई गई है। शहरी विकास मंत्री प्रसन्ना रणतुंगा के खिलाफ मामला 2015 में दर्ज किया गया था। उच्च न्यायालय ने प्रसन्ना को दो साल के कड़े कारावास की सजा सुनाई। प्रसन्ना की पत्नी को तमाम आरोपों से बरी कर दिया गया। प्रसन्ना को ढाई करोड़ रूपये जुर्माना भरने और दस लाख रूपये व्यवसायी को हर्जाने के रूप में देने का आदेश भी दिया गया।

2021 के लिए ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में श्रीलंका 180 देशों में से 102वें स्थान पर है, लेकिन काफी कम बार ऐसा होता है कि देश के वरिष्ठ राजनेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में जवाबदेही तय होती है। कोर्ट ने पाया कि रणतुंगा ने व्यापारी से 2015 में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। उसने पुलिस से शिकायत की थी कि रणतुंगा ने जान से मारने की धमकी दी थी।

कोर्ट के एक अधिकारी ने कहा कि जज ने यह भी फैसला सुनाया कि अगर मंत्री को जुर्माना और मुआवजा देने में लापरवाही की तो उन्हें 12 साल की सजा काटनी होगी। 55 वर्षीय राजनेता की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। वह उस समय पश्चिमी प्रांत के मुख्यमंत्री थे, जो राजधानी कोलंबो को कवर करता है।

रणतुंगा राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के एक प्रमुख सहयोगी हैं और संसद में उनके मुख्य सरकारी व्हिप के रूप में कार्य करते हैं। नवंबर 2019 में राजपक्षे के सत्ता में आने के बाद से उनके छोटे भाई बसिल सहित कई राजनेताओं को सरकार द्वारा “तकनीकी मुद्दों” पर आरोप वापस लेने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों से राहत दे दी गई।

देश के विनाशकारी आर्थिक संकट पर उनके इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों लोग नौ अप्रैल से कोलंबो में राजपक्षे के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। श्रीलंका को विदेशी मुद्रा की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण वह भोजन, ईंधन और दवाओं जैसे सबसे आवश्यक आयातों का भी खर्च वहन नहीं कर पा रहा है।

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