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सौरव गांगुली ने की गेंदबांजों की तारीफ, सचिन तेंदुलकर संग अपनी जोड़ी को लेकर कही ये बात

बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा, ‘‘भारत में अब यह धारणा बन गयी है कि हम अच्छे तेज गेंदबाज तैयार कर सकते हैं। केवल तेज गेंदबाज ही नहीं बल्कि बल्लेबाज भी फिटनेस के प्रति जागरूक हुए हैं। उनके फिटनेस मानदंड बदले हैं। मुझे लगता कि इसमें काफी बदलाव आया है। ’’

Author Updated: July 6, 2020 4:04 PM
पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के वर्तमान अध्यक्ष सौरव गांगुली

पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के वर्तमान अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा कि वर्तमान में भारत के तेज गेंदबाजी विभाग के मजबूत बनने के मुख्य कारण सांस्कृतिक बदलाव और फिटनेस के बढ़ते मानक हैं। युवा जसप्रीत बुमराह और अनुभवी इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, उमेश यादव और भुवनेश्वर कुमार की उपस्थिति में भारतीय तेज गेंदबाजी विश्व में सबसे मजबूत आक्रमण के रूप में उभरा है।

गांगुली से भारतीय टेस्ट सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल के साथ बीसीसीआई ट्विटर हैंडल पर चैट शो में पूछा गया कि बदलाव लाने में अहम भूमिका किसने निभायी, उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसमें इन सभी का योगदान मानता हूं, कोच, फिटनेस ट्रेनर और मुझे लगता है कि सांस्कृतिक बदलाव भी। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में अब यह धारणा बन गयी है कि हम अच्छे तेज गेंदबाज तैयार कर सकते हैं। केवल तेज गेंदबाज ही नहीं बल्कि बल्लेबाज भी फिटनेस के प्रति जागरूक हुए हैं। उनके फिटनेस मानदंड बदले हैं। मुझे लगता कि इसमें काफी बदलाव आया है। ’’ जवागल श्रीनाथ, जहीर खान और आशीष नेहरा जैसे अच्छे तेज गेंदबाजों की अगुवाई करने वाले गांगुली ने कहा कि वर्तमान गेंदबाजों में यह विश्वास आ गया है कि वे रफ्तार के सौदागर बन सकते हैं।

उन्होंने बीसीसीआई की सीरीज ‘दादा ओपन्स विद मयंक’ में कहा, ‘‘और इससे सभी की समझ में यह बात आ गयी कि अगर वे फिट है, अगर वे दमदार हैं तो फिर हम भी दूसरों की तरह तेज गेंदबाजी कर सकते हैं। ’’ हाल में वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाजी इयान बिशप ने भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण की प्रशंसा की और कहा था कि जिस तरह से 1970 और 1980 के दशक में उनकी टीम ने तेज गेंदबाजी को आगे बढ़ाया वही काम अब भारत कर रहा है।

गांगुली ने कहा, ‘‘मेरी पीढ़ी के या उससे पहले के वेस्टइंडीज के खिलाड़ी नैर्सिगक तौर पर मजबूत और दमदार थे। हम भारतीय कभी नैर्सिगक रूप से इतने मजबूत और दमदार नहीं रहे, इसलिए हमने मजबूत बनने के लिये कड़ी मेहनत की। इसलिए मुझे लगता है कि यह संस्कृति में बदलाव है जो कि बेहद महत्वपूर्ण है। ’’ इस कार्यक्रम के दौरान गांगुली ने याद किया कि किस तरह से दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर उन्हें हमेशा पहली गेंद का सामना करने के लिये मजबूर करते थे क्योंकि उन्हें नान स्ट्राइकर बनना पसंद था।

गांगुली से पूछा गया कि जब उनकी और तेंदुलकर की जोड़ी एकदिवसीय क्रिकेट की मशहूर सलामी जोड़ी हुआ करती थी तो क्या तब सचिन उन्हें पहली गेंद खेलने के लिये स्ट्राइक लेने के लिये मजबूर करते थे, उन्होंने कहा, ‘‘वह हमेशा ऐसा करते थे और इसके लिये उनके पास जवाब भी होता था। ’’ गांगुली और तेंदुलकर ने वनडे में 136 पारियों में पारी का आगाज किया जिसमें 6609 रन बनाये जिसमें 21 शतकीय और 23 अर्धशतकीय साझेदारियां शामिल हैं।

पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि पहली गेंद से बचने के लिये तेंदुलकर के पास हमेशा दो जवाब होते थे। गांगुली ने कहा, ‘‘मैं उनसे कहता था, कभी आपको भी पहली गेंद खेलनी चाहिए। मैं ही हमेशा पहली गेंद खेलता हूं। उनके पास इसके दो जवाब होते थे। पहला उनका मानना था कि अगर उनकी फार्म अच्छी है तो वह जारी रहनी चाहिए और उन्हें नान स्ट्राइकर छोर पर ही खेलना चाहिए। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘और अगर उनकी फार्म अच्छी नहीं है तो वह कहते, ‘‘मुझे नान स्ट्राइकर छोर पर ही खेलना चाहिए’ क्योंकि इससे उन पर से दबाव कम हो जाएगा। ’’ गांगुली ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि टीवी स्क्रीन पर पकड़ लिये जाने के कारण तेंदुलकर को एक दो अवसरों पर पहली गेंद का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘उनके पास अच्छी फार्म और बुरी फार्म के जवाब होते थे जब तक कि किसी दिन आप उनसे आगे निकलकर नानस्ट्राइकर छोर पर खड़े न हो जाओ। टीवी पर सब कुछ आ रहा होता है और ऐसे में उन्हें पहली गेंद का सामना करने के लिये मजबूर होना पड़ता था।
गांगुली ने कहा, ‘‘और ऐसा एक या दो बार हुआ। मैं उनसे आगे निकलकर नान स्ट्राइकर छोर पर खड़ा हो गया था। ’’

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