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2009 में जो अनिल कुंबले ने सोचा था, राहुल द्रविड़ की सलाह पर वही प्‍लान लागू करने जा रहा BCCI

बीसीसीआई और राहुल द्रविड़ के बीच गुरुवार को हुए मीटिंग के दौरान युवा क्रिकेटर के साथ भविष्य में आ रही परेशानी को लेकर बात की गई। इस दौरान राहुल द्रविड़ ने इस समस्या से निजात पाने का तरीका सुझाया।

राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले ने जो प्रस्ताव दस साल पहले बीसीसीआई के सामने रखा था, वो अब लागू किया जाएगा। कुंबले ने युवा क्रिकेटर के भविष्य को लेकर बीसीसीआई के सामने अपनी बात रखी थी। यही बात अब पूर्व कप्‍तान और भरोसेमंद बल्‍लेबाज रहे राहुल द्रविड़ ने कहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई और राहुल द्रविड़ के बीच गुरुवार को हुए मीटिंग के दौरान युवा क्रिकेटर के साथ भविष्य में आ रही परेशानी को लेकर बात की गई। इस दौरान राहुल द्रविड़ ने इस समस्या से निजात पाने का तरीका सुझाया। रिपोर्ट की मानें तो द्रविड़ ने युवा क्रिकेटर को क्रिकेट के साथ-साथ किसी दूसरे पेशे की ट्रेनिंग दिलाए जाने की सिफारिश की। आमतौर पर क्रिकेट की चाह रखने वाले ज्यादातर युवा उम्र के एक पड़ाव पर आकर खेलना छोड़ देते हैं। ऐसे में उनके पास कोई दूसरा काम करने का ऑप्शन बहुत कम रह जाता है। युवा जब तक इस बात को समझ पाते हैं तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

राहुल द्रविड़ के विचारों पर ध्यान दिया गया तो युवा क्रिकेटर भविष्य में इस तरह की परेशानियों से बच सकते हैं। नेशनल क्रिकेट एकेडमी यानी एमसीए के सीओओ तूफान घोष के मुताबिक ज्यादातर क्रिकेटर 20 से 21 साल तक क्रिकेट खेलते हैं और इसमें अगर वो लंबे समय तक सफल नहीं रहे तो फिर अपने लिए कोई और पेशा खोजने लगते हैं। ऐसे में कई बार क्रिकेटर काम नहीं मिलने हताश और निराश भी हो जाते हैं, भविष्य में उन्हें इस तरह की मायूसी का सामना न करना पड़ा, इसलिए द्रविड़ के इस प्रस्ताव को आगे लाने की तैयारी की जा रही है।

बता दें कि भारत में इंडिया ए, रणजी ट्रॉफी और आईपीएल जैसे कई टूर्नामेंट है, जहां युवा क्रिकेटर अपना जौहर दिखाते हैं। इन टूर्नामेंटों में खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मैच में खेलने का मौका नहीं मिलता और एक समय के बाद उनके पास करने को कुछ होता नहीं है। द्रविड़ की सलाह पर अगर इन खिलाड़ियों को किसी दूसरे पेशे की ट्रेनिंग मुहैया कराई जाती है तो उन्हें भविष्य में किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

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