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तटस्थ स्थानों पर रणजी मैचों की कोशिश फेल, खिलाड़ियों को नहीं आया पसंद

घरेलू क्रिकेट के अनुभवी खिलाड़ी रजत भाटिया ने कहा, ‘यह विचार अच्छा था लेकिन उसके लागू करने का तरीका बेहद खराब था।'

Author नई दिल्ली | January 17, 2017 5:12 PM
रणजी ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में मुंबई के खिलाफ शॉट खेलते गुजरात के कप्तान पार्थिव पटेल। (PTI Photo/11 Jan, 2017)

भारतीय क्रिकेट बोर्ड का रणजी मैचों का तटस्थ स्थानों पर आयोजित करने का पहला प्रयास बुरी तरह विफल रहा और कई शीर्ष घरेलू खिलाड़ियों के अनुसार मेजबान संघों की उदासीनता और खराब योजना के कारण यह व्यवस्था नहीं चल पायी। बीसीसीआई ने प्रतियोगिता को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिये यह फॉर्मूला अपनाया था ताकि टीम घरेलू मैदानों पर मिलने वाले फायदे का लाभ नहीं उठा सकें और उन्हें अलग अलग परिस्थितियों में खेलने का अनुभव हासिल हो। घरेलू क्रिकेट के अनुभवी खिलाड़ी रजत भाटिया ने कहा, ‘यह विचार अच्छा था लेकिन उसके लागू करने का तरीका बेहद खराब था। अधिकतर मेजबान संघों ने दूसरी टीमों के मैचों के आयोजन में दिलचस्पी नहीं दिखायी। सुविधाएं काफी खराब थी चाहे वह हमें अच्छा विकेट देने की बात हो या पर्याप्त गेंदें और बढ़िया भोजन की। इसे बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।’

दिल्ली का यह क्रिकेटर तीन राज्यों के लिये खेल चुका है अभी राजस्थान की टीम से जुड़ा है। पारिवारिक कारणों से इस सत्र में केवल चार मैच खेलने वाले भाटिया ने इस व्यवस्था की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘टीमों को घरेलू मैदानों पर खेलने का फायदा उठाने से रोकने के लिये यह व्यवस्था की गयी थी क्योंकि पहले मैच दो दिन के अंदर समाप्त हो जाते थे लेकिन गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ भले ही मैच तटस्थ स्थानों पर खेले जा रहे थे।’ भाटिया ने कहा, ‘असम के खिलाफ विजाग में हमारे मैच को ही लीजिए। विकेट प्रथम श्रेणी मैच के अनुकूल नहीं था और इसलिए मैच तीन दिन के अंदर समाप्त हो गया। और ऐसा एक अंतरराष्ट्रीय मैच से केवल दो सप्ताह पहले हुआ। जब हमने मैदानकर्मियों से पूछा कि हमें इतना खराब विकेट क्यों दिया गया था तो उनके पास कहने के लिये कुछ नहीं था।’

उस मैच में तेज गेंदबाजों का दबदबा रहा। पंकज सिंह ने नौ विकेट लिये और राजस्थान ने तीन दिन के अंदर पारी और आठ रन से जीत दर्ज की। खिलाड़ियों के लिये एक और मसला मैचों का कार्यक्रम था क्योंकि उन्हें बहुत कम समय में देश के दूरदराज के क्षेत्रों में खेलने के लिये जाना पड़ रहा था। गुजरात और भारत के स्पिनर अक्षर पटेल ने कहा, ‘कार्यक्रम एक बड़ी समस्या थी। कई बार मैचों में केवल तीन दिन का अंतर था और हमें उस स्थान पर जाना था जहां पहुंचना आसान नहीं था। इसका मतलब था कि हमें काफी समय सड़क के रास्ते बसों में बिताना पड़ा।’ लोगों ने भी इन मैचों में दिलचस्पी नहीं दिखायी और इसलिए भी अक्षर को तटस्थ स्थानों का विचार रास नहीं आया।

उन्होंने कहा, ‘ऐसे स्थानों पर मैचों के आयोजन का क्या मतलब है जहां लोग देखने के लिये ही नहीं आयें। जब हम घरेलू मैदानों पर खेलते थे तब कुछ दर्शक तो पहुंचते थे। उम्मीद है कि अगले सत्र से घरेलू और बाहरी मैदानों पर मैचों के आयोजन की व्यवस्था फिर से शुरू कर दी जाएगी।’ तमिलनाडु के सलामी बल्लेबाज अभिनव मुकुंद ने विशेषकर विकेटों की आलोचना की थी। उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान कहा था, ‘मुझे यह विचार पसंद नहीं आया क्योंकि ऐसे में आप साल भर एक जैसी परिस्थिति में खेलते हो। घरेलू मैदान पर खेलना वास्तव में महत्वपूर्ण है।’

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