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भारत को ‘पिच’ नहीं सिर्फ ‘अच्छा खेल’ दिलाएगा जीत, बेंगलुरू में आॅस्ट्रेलिया का पलड़ा रहा है भारी

बेंगलुरु के चिन्नास्वामी में भारतीय टीम का कंगारुओं के साथ अब तक पांच बार आमना-सामना हो चुका है। ऑस्ट्रेलिया की टीम ने दो टेस्ट और भारत को एक मैच में जीत मिली है, दो टेस्ट मैच ड्रॉ रहे थे।

Author बेंगलुरू | February 28, 2017 11:49 AM
बेंगलुरू में भारत और आॅस्ट्रेलिया की टीमें अब तक 5 बार एक दूसरे से टकरायी हैं। इसमें आॅस्ट्रेलिया को दो बार जीत और एक बार हार का सामना करना पड़ा वहीं, दो टेस्ट मैच ड्रॉ रहे हैं। (Photo: BCCI)

महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के पुणे स्थित स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट मैच में आॅस्ट्रेलिया के हाथों 333 रनों से करारी ​शिकस्त झेलने के बाद टीम इंडिया की निगाहें बेंगलुरू के एम चिन्नास्वामी मैदान में होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में जीत दर्ज कर श्रृंखला में बराबरी हासिल करने पर टिकी होंगी। पुणे टेस्ट मैच से पहले भारत ने पूरे होम सीजन में शानदार प्रदर्शन किया था। लेकिन, आॅस्ट्रेलिया को स्पिन की जाल में फंसाने के लिए तैयार की गई पिच पर भारतीय बल्लेबाज खुद धराशायी हो गए और बाएं हाथ के आॅस्ट्रेलियाई स्पिनर स्टीव ओ कीफे ने मैच में कुल 12 विकेट चटकाकर कंगारुओं को 13 साल बाद भारत में पहली टेस्ट जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

चार टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मैच 4 मार्च से बेंगलुरू के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाना है। उससे पहले भारतीय टीम को अब नए सिरे से रणनीति बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पुणे टेस्ट से सीख लेते हुए भारतीय कप्तान विराट कोहली और कोच अनिल कुंबले एक बार फिर कंगारुओं को स्पिन के जाल में फंसाने की रणनीति से परहेज करेंगे क्योंकि दांव एक बार उल्टा पड़ चुका है और आॅस्ट्रेलियाई टीम ने अपनी तैयारियों का नूमना भी पेश कर दिया है। जब एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के पिच क्यूरेटर के श्रीराम से दूसरे टेस्ट से पहले पिच के मिजाज के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया। बेंगलुरु के चिन्नास्वामी में भारतीय टीम का कंगारुओं के साथ अब तक पांच बार आमना-सामना हो चुका है। इन पांचों टेस्ट मैचों में भारतीय टीम को सिर्फ एक मैच में ही जीत मिली थी। ऑस्ट्रेलिया की टीम यहां भारत को दो टेस्ट मैचों में हरा चुकी है और दो टेस्ट मैच ड्रॉ रहे थे।

पुणे की पिच पर भारतीय गेंदबाजों को इतना ज्यादा टर्न मिल रहा था कि उनकी गेंद ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के बल्ले से काफी दूर जा रही थी। रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा आम भारतीय पिचों पर भी ठीक-ठाक स्पिन करा लेते हैं और पुणे की पिच पर तो स्क्वॉयर टर्नर था, इसलिए उनकी गेंद जबरदस्त घूम रही थी। इसी कारण एलबीडब्ल्यू के फैसले भी उनके पक्ष में नहीं जा रहे थे, क्योंकि गेंद जितनी ज्यादा टर्न हो रही थी, वह स्टंप से उतनी ही बाहर जाती हुई दिख रही थी। वहीं, ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर नाथन लियोन और स्टीव ओकीफी जो उतना टर्न नहीं कराते भारतीय गेंदबाजों से ज्यादा प्रभावी रहे।

सही लाइन लेंथ के साथ हल्के से टर्न ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का काम आसान कर दिया और उन्हें टीम इंडिया के धुरंधरों को एलबीडब्लू और कैच आउट करने में आसानी हुई। अब बेंगलुरू में भारत को रैंक टर्नर पिच नहीं बल्कि, स्पिन फ्रैंडली पिच बनानी होगी, जहां पहले ओवर से ही गेंद टर्न न करे, बल्कि पहले और दूसरे दिन तीसरे सत्र तक पिच बल्लेबाजों के अनुकूल रहे और दूसरे दिन शाम से ​गेंद टर्न होना शुरू कर। उससे पहले विराट कोहली के लिए मैच में टॉस जीतना अहम होगा, जिससे वो पहले बल्लेबाजी कर बड़ा स्कोर खड़ा करें और आॅस्ट्रेलियाई टीम को चौथी पारी खेलना पड़े। जब स्पिनरों को पिच से उतनी मदद नहीं मिलेगी और उन्हें अपनी स्किल का प्रयोग करना पड़ेगा तो भारतीय स्पिन गेंदबाज आॅस्ट्रेलियाई गेंदबाजों से बेहतर साबित होंगे।

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