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वीडियो: जब एमएस धोनी के छक्के ने क्रिकेट इतिहास में 2 अप्रैल की तारीख को कर दिया हमेशा के लिए अमर

भारत ने श्रीलंका को 6 विकेट से मात देकर 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया था। भारतीय टीम ने 10 गेंद शेष रहते ही, 4 विकेट पर 277 रन बना कर मैच जीत लिया था।

Author नई दिल्ली | April 2, 2017 1:29 PM
वनडे विश्व कप 2011 के फाइनल मुकाबले में विजयी छक्का जड़ते भारत टीम के तत्कालीन कप्ताना महेंद्र सिंह धोनी।(Photo: BCCI)

आज का दिन भारतीय खेल इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो चुका है। आज ही के दिन 6 साल पहले 2 अप्रैल 2011 को पूरे देश ने एक साथ जश्न मनाया था। यूं तो भारत उत्सवधर्मी देश है और यहां हर त्योहार को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है, लेकिन 2 अप्रैल 2011 को कोई त्योहार नहीं था, फिर भी देश में ऐसा माहौल था जैसा किसी त्योहार में भी देखने को नहीं मिलता। भारतीय क्रिकेट इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। वनडे विश्वकप फाइनल में यह पहली बार हो रहा था जब उपमहाद्वीप की दो टीमें फाइनल में एक दूसरे के आमने सामने थे, दूसरा दोनों ही देश इस विश्वकप के मेजबान देश थे।श्रीलंका और भारत के बीच वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में 2 अप्रैल 2011 को खेला गया वह मैच आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के दिलो दिमाग में ताजा होगा। तत्का​लीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 6 विकेट से पराजित कर 28 सालों के बाद दूसरी बार आईसीसी क्रिकेट विश्वकप 2011 जीता था।

श्रीलंका ने मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए महेला जयवर्धने की शतकीय पारी (103) की बदौलत 50 ओवर में 6 विकेट पर 274 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। जवाब में भारत की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही, दोनों सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर लासिथ मलिंगा की कातिलाना गेंदबाजी के शिकार हो गए। इसके बाद गौतम गंभीर ने वर्तमान कप्तान विराट कोहली के साथ तीसरे विकेट के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी कर भारत को मैच में बनाए रखा। विराट कोहली को तिलकरत्ने दिलशान ने अपनी ही गेंद पर कैच कर भारत को तीसरा झटका दे दिया। तब मैदान पर कदम रखा महेंद्र सिंह धोनी ने। धोनी अमूमन छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आते थे, मगर इस फाइनल मुकाबले में उन्होंने कप्तान के रूप में खुद को उपर बल्लेबाजी के लिए प्रमोट किया। दूसरे छोर पर मौजूद गौतम गंभीर ने रन रेट को कभी धीमा नहीं होने दिया और महेंद्र सिंह धोनी ने उनके साथ मिलकर भारत को मजबूत कर दिया।

गंभीर और धोनी ने चौथे विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी कर मैच भारत की तरफ मोड़ दिया था, तभी गौतम गंभीर 97 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद युवराज सिंह ने महेंद्र सिंह धोनी का मैच खत्म होने तक साथ निभाया। जब मैच जीतने के लिए भारत को 11 गेंदों पर 4 रन की दरकार थी, धोनी ने वही किया जो वे बखूबी करते रहे हैं। उन्होंने नुवान कुलशेखरा की गेंद को लांग ऑन बाउंड्री के ऊपर शानदार छक्के के लिए खेल दिया। भारत ने श्रीलंका को 6 विकेट से मात देकर 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया था। भारतीय टीम ने 10 गेंद शेष रहते ही, 4 विकेट पर 277 रन बना कर मैच जीत लिया था। मैन ऑफ द मैच महेंद्र सिंह धोनी 91 रन बनाकर नाबाद रहे। युवराज सिंह को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब दिया गया। युवराज ने क्रिकेट विश्व कप 2011 के नौ मैचों में चार अर्धशतक और एक शतक की बदौलत 362 रन बनाए थे, साथ ही 15 विकेट भी चटकाए थे।

नुवान कुलशेखरा की गेंद को एमएस धोनी ने जैसे ही छह रन के लिए मैदान के बाहर पहुंचाया, दूसरे छोर पर मौजूद युवराज सिंह खुशी से उछल पड़े और रोते हुए धोनी को गले लगा लिया। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के साथ ही सारे टीम मेंमबर्स की आंखें खुशी से छलक पड़ीं थीं। यह महान सचिन तेंदुलकर का आखिरी विश्व कप था और अपने 21 साल के लंबे करियर में उनका सपना भारत को विश्व विजेता बनते हुए देखने का था। महेंद्र सिंह धोनी और गौतम गंभीर ने फाइनल मुकाबले में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा दिखाते हुए सचिन के साथ ही भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के सपने को पूरा किया था। मैच के बाद हरभजन सिंह और सुरेश रैना ने सचिन को अपने कंधे पर बैठाकर पूरे मैदान का चक्कर लगाया। सचिन के हाथ में तिरंगा था और पूरी भारतीय टीम उनके पीछे पीछे मैदान के चक्कर लगा रही थी। भारतीय क्रिकेट इतिहास में यह तीसरा बड़ा मौका था। इससे पहले 1983 में कपिल देव के नेतृत्व में भारत ने पहली बार विश्व कप खिताब जीता था। उसके बाद महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में ही भारत ने 2007 में पहले टी20 विश्व कप फाइनल में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था।

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