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500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों से बन रहे हैं हार्डबोर्ड, आरबीआर्इ को एक टन नोट के बदले मिलते हैं ₹ 250

हार्डबोर्ड बनाने वाली कंपनी द वेस्‍टर्न इंडिया प्‍लाईवुड लिमिटेड में पिछले तीन सप्‍ताह में लगभग 80 टन पुराने नोट आ चुके हैं।
पुराने नोट जिनके बंद होने का ऐलान 8 नवंबर को किया गया था।

केंद्र सरकार के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के फैसले के बाद एक सवाल सबके मन में है कि पुराने नोटों का क्‍या होगा। ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के चलते 500 और 1000 रुपये के 23 बिलियन नोट बैंकों के पास आएंगे। इन नोटों को जलाने के साथ ही इनसे गड्ढ़े भरने या उनसे कोयले की ईंटें बनाई जाएगी। अब एक नई रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक की केरल यूनिट ने पुराने नोटों को हार्डबोर्ड बनाने की फैक्‍ट्री में भेजा है।

हार्डबोर्ड बनाने वाली कंपनी द वेस्‍टर्न इंडिया प्‍लाईवुड लिमिटेड में पिछले तीन सप्‍ताह में लगभग 80 टन पुराने नोट आ चुके हैं। कन्‍नूर जिले में मौजूद इस फैक्‍ट्री को आरबीआई नोटों के टुकड़े कर बेच रही है। फैक्‍ट्री में इन नोटों के बारीक-बारीक कतरनें की जाती है और इसे लुगदी में बदल दिया जाता है। इसके बाद 95 फीसदी लकड़ी के लुगदी के साथ पांच फीसदी नोटों की लुगदी को मिलाकर हार्डबोर्ड बनाए जाते हैं। कंपनी एक टन पुराने नोटों के बदले आरबीआई को 250 रुपये देती है।

फैक्‍ट्री के जनरल मैनेजर पीएम सुधाकरन नैयर ने एनडीटीवी को बताया, ”पहले आरबीआई इन नोटों को केवल जला रही थी और अब हम इनका यूज कर रहे हैं। पुराने नोटों की लुगदी के इस्‍तेमाल को लेकर हमें सतर्क रहना होता है। यदि उनका सही इस्‍तेमाल नहीं हुआ तो हार्डबोर्ड कचरा हो जाएगा।” कंपनी के एमडी पीके मयान मोहम्‍मद के अनुसार, शुरुआत में नोटों का इस्‍तेमाल मुश्किल था। लेकिन अब नया तरीका तलाशा है जिससे कामयाबी मिली है।

गौरतलब है कि कुछ सालों पहले तक दुनियाभर के केंद्रीय बैंक बंद किए गए नोटों को जलाते थे। लेकिन बाद में जब सामने आया कि जलाए जाने से पयार्वरण को नुकसान पहुंचता है। इसके बाद से नोटों को रिसाइकल करने का काम शुरू किया गया। कई जगहों पर नोटों से कोयले की ईंटें बनाई जाती है। लेकिन इससे भी जमीन को नुकसान होने की जानकारी सामने आई है।

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