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एमएस धोनी और झारखंड टीम पर चोरों की साया, होटल से मोबाइल फोन, मैदान से किट बैग गायब

फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में शनिवार को झारखंड और बंगाल के बीच हुए विजय हजारे ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान झारखंड टीम की ट्रेनिंग किट डग आउट से गायब हो गई।

महेंद्र सिंह धोनी ने होटल से फोन चोरी होने की रिपोर्ट दिल्ली द्वारका सेक्टर 10 पुलिस स्टेशन में दर्ज करायी। (Photo: BCCI)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के तीन मोबाइल फोन दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल से चोरी हो गए हैं। दरअसल, शुक्रवार सुबह जब दिल्ली के द्वारका स्थित वेलकम आईटीसी होटल में आग लग गई थी, उस वक्त विजय हजारे ट्रॉफी का सेमीफाइनल मुकाबला खेलने के लिए महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में झारखंड की टीम इसी होटल में ठहरी हुई थी। एमएस धोनी ने द्वारका के सेक्टर 10 के पुलिस स्टेशन में मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। दरअसल, शुक्रवार सुबह जब दिल्ली के द्वारका स्थित वेलकम आईटीसी होटल में आग लग गई थी। धोनी, झारखंड की टीम के साथ उस होटल में ठहरे हुए थे। आग लगने के बाद खिलाड़ियों को बाहर निकाला गया। पुलिस होटल के सीसीटीवी कैमरे फुटेज की जांच कर रही है।

धोनी ने जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें कहा है कि 17 मार्च सुबह 6:20 पर वेलकम आईटीसी होटल के कर्मचारी आकाश हंस ने मुझे आग लगने की खबर दी थी। इसके बाद हमें किसी दूसरे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। शाम साढ़े चार बजे ट्रैवल मैनेजर संदीप फोगाट और असिस्टेंट विकास हसिजा वेलकम आईटीसी होटल से मेरा सामान लेने पहुंचे तो उन्हें वहां मेरे तीन फोन नहीं मिले। इसकी सूचना होटल स्टॉफ को दी गई। वहीं, फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में शनिवार को झारखंड और बंगाल के बीच हुए विजय हजारे ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान झारखंड टीम की ट्रेनिंग किट डग आउट (बाउंड्री के पास जहां टीम बैठती है) से गायब हो गई, जिससे महेंद्र सिंह धोनी और उनकी टीम बेहद नाराज है।

लाइव मैच के दौरान मैदान के अंदर से हुई इस तरह की चोरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। झारखंड टीम के मैनेजर पीएन सिंह ने कहा कि अगर मैच के दौरान मैदान के अंदर से किसी टीम का सामान चोरी हो जाता है तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल तो उठेंगे ही। उन्होंने इस चोरी की शिकायत डीडीसीए के प्रशासक पूर्व न्यायाधीश विक्रम सेन से करने की बात कही। पीएन सिंह ने बताया, ‘चोरी तो हुआ ही है लेकिन, उससे ज्यादा परेशान करने वाला कारण मैच का आयोजन करने वाले दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अधिकारियों का रवैया है। मैंने एंटी करप्शन ऑफीसर मनोज चौधरी और पूर्व कोषाध्यक्ष रवींद्र मनचंदा सहित कई लोगों से इसकी शिकायत की, लेकिन उन्होंने इसकी जिम्मेदारी लेने से ही मना कर दिया। उन्होंने कहा कि सामान गायब होने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है।’ पीएन सिंह ने कहा कि हमारे खिलाड़ी क्रिकेट खेलते या सामान की सुरक्षा? यदि डीडीसीए सुरक्षा व्यवस्था का इंतज़ाम नहीं कर सकता तो उसे मैच का आयोजन ही नहीं करना चाहिए।

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