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जब गांगुली के कमरे में सचिन ने भर दिया पानी, पुकारते थे दादी, मास्टर ब्लास्टर ने किए कई खुलासे

मैदान से इतर सचिन अपने साथी खिलाड़ियों के साथ हंसी-मजाक और शरारतें करने से बाज कभी नहीं आते थे। ऐसे ही अपनी जिन्दगी के कुछ चुनिंदा अनुभवों के बारे में सचिन ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया।

बात पार्ल में खेले गए स्टैंडर्ड बैंक ट्राएंगुलर टूर्नामेंट की है, जब इन दोनों खिलाड़ियों ने 258 रनों की साझेदारी निभाई थी। यह साझेदारी उस समय के वनडे अंतरराष्ट्रीय इतिहास की सबसे बड़ी साझेदारी थी। (Photo Source: BCCI)

अगर क्रिकेट का कोई मन्दिर होता तो उसके देवता निश्चित तौर पर सचिन तेंदुलकर कहे जाते। भारतीय क्रिकेट को नया चेहरा देने वाला ये खिलाड़ी भले ही मैदान पर कितना भी गंभीर क्यों न दिखता हो, लेकिन मैदान से इतर सचिन अपने साथी खिलाड़ियों के साथ हंसी-मजाक और शरारतें करने से बाज कभी नहीं आते थे। ऐसे ही अपनी जिन्दगी के कुछ चुनिंदा अनुभवों के बारे में सचिन ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया। इस इंटरव्यू में उन्होंने ड्रेसिंग और होटल के कमरें में की हुई उनकी कुछ शरारतों और चुनिंदा अनुभवों पर खुलकर बात की।

एक वक्त भारतीय क्रिकेट के दो महान ओपनर अगर मैदान पर हों, तो स्कोर कितना बनेगा इसकी भविष्यवाणी कोई क्रिकेट पंडित नहीं कर सकता था। ये दो महान ओपनर सचिन तेंदुलकर और सौरभ गांगुली थे। सौरभ गांगुली को आमतौर पर बेहद गंभीर छवि का इंसान माना जाता है। लेकिन उनसे उलट सचिन तेंदुलकर को टीम खिलाड़ियों के साथ बेहद हंसी-मजाक करने वाला इंसान समझा जाता था। अपने इंटरव्यू में ​सचिन तेंदुलकर ने दादा के साथ की गई अपनी शरारत के बारे में खुलासा किया।

उन्होंने बताया कि इंदौर में टेस्ट मैच चल रहा था। सुबह के ट्रेनिंग सेशन के बाद सारे खिलाड़ी थकी हुई हालत में आकर अपने कमरों में सो गए। सचिन और उनके तीन-चार साथी खिलाड़ियों ने तय किया कि दादा कुछ ज्यादा ही थके हुए दिख रहे हैं। उन्हें कुछ परेशान किया जाना चाहिए। सभी दोस्तों ने मिलकर पानी का पाइप उनके होटल के कमरे में छोड़ दिया। कुछ देर बाद ही कमरे में इतना पानी भर गया कि सौरभ गांगुली के जूते उन पर तैरने लगे। जब दादा सोकर उठे तो उन्होंने सबसे पहले सचिन को ही खोजना शुरू किया।

सौरभ गांगुली को क्रिकेट की दुनिया दादा के नाम से जानती है। लेकिन सचिन के साथ उनका रिश्ता बेहद निजी और अपनेपन से भरा हुआ था। अपने रिश्तों के बारे में बात करते हुए सचिन ने बताया कि दादा से उनकी सबसे पहली मुलाकात अंडर-15 टीम के ट्रायल के दौरान हुई थी। उसके बाद दादा उनके सबसे करीबी दोस्त बन गए। सचिन ने खुलासा किया कि जब सारी टीम सौरभ को दादा कहा करती थी तो मैं उसे ‘दादी’ कहकर बुलाया करता था। इस मजाक पर कई बार तो अंजान लोग पलटकर भी देखा करते थे कि ये आखिरकार हुआ क्या?

क्रिकेट में अपने पुराने दिनों की कई यादों को सचिन ने अपने इंटरव्यू में साझा किया। उन्होंने बताया,’टीम जब मैदान से थकने के बाद वापस आती थी तो टीम को एक एंटरटेनर की जरूरत महसूस होती थी। ये काम आशीष नेहरा को सौंप दिया जाता था। नेहरा जब बोलना शुरू करता था तो सारे दोस्त उसे घेरकर बैठ जाया करते थे। हम सभी सिर्फ बैठकर उसकी बातें सुनते थे और हंसते थे। हमने कई बार बेहद अच्छा क्रिकेट खेला है। वो हमारे सबसे सुनहरे दिन थे।’

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