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मध्य प्रदेश पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन: चेले पर भारी पड़े गुरु, 23 साल बाद सच हुआ सपना तो मैदान पर ही रोने लगे चंद्रकांत पंडित; देखें Video

रणजी ट्रॉफी फाइनल में मुंबई को हराकर मध्य प्रदेश के चैंपियन बनने से चंद्रकांत पंडित की पुरानी यादें ताजा हो गई जब 1999 में इसी चिन्नास्वामी स्टेडियम में उनकी अगुआई वाली मध्य प्रदेश की टीम ने पहली पारी में बढ़त के बावजूद फाइनल गंवा दिया था।

रणजी ट्रॉफी फाइनल में मुंबई पर जीत के बाद एमपी टीम ने चंद्रकांत पंडित को उठा लिया। (स्क्रीनग्रैब/ट्विटर)

मध्य प्रदेश ने रविवार को पांचवें और अंतिम दिन घरेलू क्रिकेट की दिग्गज टीम मुंबई को एकतरफा फाइनल में छह विकेट से हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब जीतकर इतिहास रचा। कोच चंद्रकांत पंडित ने इसी मैदान पर 23 साल पहले रणजी ट्रॉफी का खिताबी मुकाबला गंवाया था, लेकिन इस बार वह टीम को चैंपियन बनाने में सफल रहे। तब वह मध्य प्रदेश के कप्तान थे।

जैसे ही रजत पाटीदार ने विजयी रन बनाया, सबकी निगाहें पंडित पर चली गईं, जिन्होंने आंखों में आंसू लिए मैदान पर कदम रखा और आसमान की ओर देखा। बतौर कोच पंडित का यह छठा रणजी ट्रॉफी खिताब था। मुंबई के कोच अमोल मजूमदार भी उनकी कोचिंग में खेल चुके हैं, ऐसे में गुरु चेले पर भारी पड़ गया। पंडित ने डब्ल्यू.वी रमन के साथ एक ऑन-फील्ड इंटरव्यू में बताया कि वह क्यों जीत के बाद इतने भावुक हो गए थे।

पंडित ने कहा कि उनके लिए उसी स्टेडियम में वापस आना बहुत मायने रखता है जहां उनकी निगरानी में वह हार हुई थी, लेकिन इस बार वह यह सुनिश्चित करने में सक्षम थे कि एमपी बेहतर क्रिकेट खेले। 1999 में इसी चिन्नास्वामी स्टेडियम में उनकी अगुआई वाली मध्य प्रदेश की टीम ने पहली पारी में बढ़त के बावजूद फाइनल गंवा दिया था और पंडित के करियर का अंत निराशा के साथ हुआ। पंडित के मार्गदर्शन में विदर्भ ने भी चार ट्रॉफी (लगातार दो रणजी और ईरानी कप खिताब) जीती जबकि उसके पास कोई सुपरस्टार नहीं थे।

अंतिम दिन मुंबई अपनी दूसरी पारी में केवल 269 रन बनाकर आउट हो गई, जिससे एमपी को जीत के लिए 108 रन का मामूली लक्ष्य मिला। इसे टीम ने चार विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। सत्र में 1000 रन बनाने से सिर्फ 18 रन दूर रहे सरफराज खान (45) और युवा सुवेद पार्कर (51) ने मुंबई को हार से बचाने का प्रयास किया, लेकिन कुमार कार्तिकेय (98 रन पर चार विकेट) की अगुआई में गेंदबाजों ने मध्य प्रदेश की जीत सुनिश्चित की। लक्ष्य का पीछा करते हुए मध्य प्रदेश ने हिमांशु मंत्री (37), शुभमन शर्मा (30) और रजत पाटीदार (नाबाद 30) की पारियों की बदौलत 29.5 ओवर में चार विकेट पर 108 रन बनाकर जीत दर्ज की।

रणजी ट्रॉफी जब शुरू हुई तो मध्य प्रदेश की टीम बनी भी नहीं थी और तब ब्रिटिश युग के राज्य होलकर ने देश के कई दिग्गज क्रिकेटर दिए, जिसमें करिश्माई मुशताक अली और भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान सीके नायुडू भी शामिल रहे। होलकर 1950 के दशक तक मजबूत टीम थी, जिसे बाद में मध्य भारत और फिर मध्य प्रदेश नाम दिया गया।

मध्य प्रदेश ने इसके बाद कई अच्छे क्रिकेटर तैयार किए, जिसमें स्पिनर नरेंद्र हिरवानी और राजेश चौहान भी शामिल रहे जिनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोटा लेकिन प्रभावी रहा। अमय खुरसिया ने भी काफी सफलता हासिल की। मध्यक्रम के बल्लेबाज देवेंद्र बुंदेला दुर्भाग्यशाली रहे क्योंकि वह 1990 और 2000 के दशक में उस समय खेले जब मध्य क्रम में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज खेल रहे थे।

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