ताज़ा खबर
 

लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लै को बनाएं बीसीसीआई का पर्यवेक्षक

लोढ़ा समिति ने अपने सचिव गोपाल शंकरनारायण के माध्यम से दायर इस रिपोर्ट में पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लै को पर्यवेक्षक नियुक्त करने की सिफारिश की।

Author नई दिल्ली | November 21, 2016 8:26 PM
जस्टिस आरएम लोढ़ा (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड में ठेकों के आबंटन, पारदर्शिता के मानदंडों और भावी घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल मैचों के आयोजन सहित इसके विभिन्न प्रशासनिक कार्यो में ‘मार्गदर्शन के लिये पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लै को इसका पर्यवेक्षक नियुक्त करने का अनुरोध करते हुये शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। समिति ने 14 नवंबर को न्यायालय में पेश अपनी प्रगति रिपोर्ट में प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ से धनाढ्य बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संगठनों में 70 साल से अधिक आयु सीमा का उल्लंघन करने वाले सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से समाप्त होने की घोषणा का भी अनुरोध किया है। समिति ने कहा है कि हालांकि बीसीसीआई का रोजमर्रा का काम इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर रहे हैं और चुनिन्दा प्रबंधक उनकी सहायता कर रहे हैं। लेकिन अब एक पर्यवेक्षक नियुक्त करने की आवश्यकता है जो बीसीसीआई को अपने प्रशासनिक कार्यो, विशेषकर ठेकों के आबंटन, पारदर्शिता के मापदंड, आडिट आदि घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल मैचों के लिये मार्गदर्शन करेगा।

समिति ने अपने सचिव गोपाल शंकरनारायण के माध्यम से दायर इस रिपोर्ट में पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लै को पर्यवेक्षक नियुक्त करने की सिफारिश की है जिन्हें ऑडिटर और सभी आवश्यक सचिवालय कर्मयारियों तथा सहायकों को नियुक्त करने और समिति द्वारा निर्धारित वेतन देने का अधिकार हो। समिति ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संगठनों में पद पर रहने के आधार के संबंध में न्यायालय द्वारा स्वीकृत सिफारिशों का भी हवाला दिया है और कहा है कि इसमें सिर्फ भारतीय नागरिक होने चाहिए जिनकी आयु 70 साल से कम हो। समिति ने कहा है कि ये पदाधिकारी ‘दिवालिया या अस्थिर दिमाग’ वा या मंत्री या सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए। इसमें यह भी शामिल है कि ऐसा व्यक्ति क्रिकेट के अलावा किसी अन्य खेल संगठन या उसके महासंघ में भी कोई पदाधिकारी नहीं होना चाहिए। समिति ने यह भी कहा है कि नौ साल तक पदाधिकारी रह चुका कोई व्यक्ति अयोग्य होगा। इसके अलावा यदि अदालत में किसी व्यक्ति को किसी अपराध करने के आरोप में आरोपित किया जा चुका है तो भी वह अयोग्य होगा।

समिति के अनुसार शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार अयोग्य होने के बावजूद बीसीसीआई और राज्य संगठनों के अनेक पदाधिकारी पदों पर आसीन हैं। समिति ने कहा है कि ऐसे व्यक्तियों को पद पर आसीन रहने के अयोग्य घोषित किया जाये। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा ने समिति की इस पहल का स्वागत करते हुये कहा है कि इससे बिहार जैसे अनेक राज्य लाभान्वित होंगे। आदित्य वर्मा ने ही इस मामले में उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह निर्देश देने का भी अनुरोध कया है कि अब बीसीसीआई के पदाधिकारियों की ओर ध्यान दिये बगैर ही इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी सारे प्रशासनिक और प्रबंधकीय मामले देखेंगे। समिति ने न्यायालय के 18 जुलाई के फैसले का जिक्र करते हुये कहा है कि उसकी अधिकांश सिफारिशों को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 IND vs END दूसरा टैस्ट: एलिस्टेयर कुक ने कहा, कोहली ने मैच में पैदा किया अंतर
2 IND vs ENG: कोहली ने कहा- इंग्लैंड ने कम इच्छा दिखायी, जिससे हमारी जीत तय हुई
3 IND vs ENG विशाखापत्तनम टैस्ट, कोहली ने की गेंदबाजों की तारीफ़