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आस्ट्रेलिया दौरा : प्रमुख तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और उमेश यादव चोटिल होकर टीम से बाहर, भारत की नैया के स्पिनर खेवैया

आस्ट्रेलिया दौरे पर टैस्ट शृंखला खेल रही भारतीय टीम की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं। चोट की समस्या ने टीम की गणित को बिगाड़ कर रख दिया है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: January 7, 2021 1:12 AM
Indian cricketरविचंद्रन अश्विन (बाएं) और रविंद्र जडेजा (दाएं)।

विदेशी पिच पर कमाल करने वाले ईशांत शर्मा पहले ही दौरे से बाहर हैं। अब मोहम्मद शमी के बाद उमेश यादव भी चोटिल होकर शृंखला से बाहर हो गए। बल्लेबाजों में कुछ लय से बाहर हैं तो लोकेश राहुल कलाई की चोट से जूझ रहे हैं। ऐसे में मेहमान टीम को मेजबान को पस्त करने के लिए पुराना नुस्खा ही अपनाना होगा। बीते पांच साल में भारत को जिस तेज गेंदबाजी आक्रमण ने ख्याति दिलाई उसकी जगह सालों से मशहूर स्पिन गेंदबाजी आक्रमण के सहारे कंगारूओं के खिलाफ रण जीतना होगा।

दरअसल,आस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम के तेज आक्रमण को जिन गेंदबाजों से मजबूती मिल रही थी उनमें मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह और उमेश यादव मुख्य थे। इनके पास काफी अनुभव है जिससे टीम दबाव की स्थिति से आसानी से बाहर निकल सकती थी।

हालांकि शमी और यादव की गैरमौजूदगी में युवा टी नटराजन और मोहम्मद सिराज, बुमराह के साथ आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर लगाम कसने की कोशिश करेंगे। मध्य के ओवरों में विकेट चटकाने की जिम्मेदारी अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन पर होगी। हरफनमौला रविंद्र जडेजा भी कंगारूओं को परेशान करने में काफी आगे हैं। शृंखला के दो मैचों में इन दो स्पिनरों ने अपनी काबिलियत का नमूना पेश किया है।

तेज पिच पर स्पिन का दबदबा

तेज गेंदबाजों की मददगार आस्ट्रेलियाई पिच पर भारतीय स्पिनरों का दबदबा काफी पहले से रहा है। अश्विन और जडेजा उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। आस्ट्रेलियाई पिच पर टीम इंडिया के सबसे ज्यादा विकेट हासिल करने वाले गेंदबाजों की सूची निकालें तो स्पिनर आगे हैं।

नए दौर के क्रिकेट में पहले अनिल कुंबले ने कंगारूओं की गिल्लियां उड़ार्इं और आज के दौर में अश्विन और जडेजा। आस्ट्रेलियाई के खिलाफ अश्विन ने 17 टैस्ट में 87 विकेट लिए हैं। जडेजा ने 11 मुकाबलों में 59 विकेट अपने नाम किए हैं। कुंबले ने 20 टैस्ट मैचों में 111 विकेट हासिल किए थे। इन आंकड़ों के सहरे यह कहा जा सकता है कि आस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत के लिए स्पिन गेंदबाजी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं है।

अश्विन की गेंदबाजी ब्रह्मास्त्र

दूसरी तरफ आस्ट्रेलियाई टीम के स्टार बल्लेबाज स्टीव स्मिथ की सारी काबिलियत अश्विन के सामने फेल साबित हो रही है। एडीलेट टैस्ट में वे अश्विन की तीन गेंदों को ही खेल पाएं। वहीं मेलबर्न टैस्ट की पहली पारी में महज दो गेंद खेल कर पवेलियन लौट गए।

तीसरे टैस्ट में खेलने की तैयारी में जुटे विस्फोटक बल्लेबाज डेविड वार्नर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। वे भी अश्विन की कैरम गेंद के आगे घुटने टेकते नजर आते हैं। 26 पारियों में नौ बार वार्नर अश्विन की गेंद पर विकेट गंवा बैठे।

मौजूदा टीम में शामिल आस्ट्रेलियाई पुछल्ले बल्लेबाजों की गिल्लियां भी अश्विन ने खूब उड़ाई है। अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वियों में से एक नाथन लियोन को पांच बार पवेलियन भेजा है। मैथ्यू वेड चार बार अश्विन के शिकार हुए हैं। जडेजा भी आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को पवेलियन भेजने में काफी आगे हैं। इस हरफनमौला खिलाड़ी ने दूसरे टैस्ट में तीन अहम विकेट चटकाए। साथ ही 57 रन की शानदार पारी खेली। अश्विन ने इस मुकाबले में पांच विकेट चटकाए।

सिडनी भारत के लिए खास

सिडनी क्रिकेट मैदान कई मायने में भारतीय टीम के लिए खास है। हालांकि यहां टीम को जीत कम ही मिली लेकिन कई भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी पारी से शोहरत बटोरी। हार-जीत के आंकड़ों को देखें तो 12 मैचों में भारत को महज एक बार जीत मिली है।

पांच मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। तीन बार ऐसे मौके भी आए जब भारतीय टीम ने कंगारूओं को फालोअन खेलने पर मजबूर किया लेकिन, हर बार उसने शानदार जज्बा दिखाया। 1985-86 दौरे में ऐसा ही एक मौका आया जब आस्ट्रेलियाई टीम ने 255 ओवर तक लगातार बल्लेबाजी कर मैच का रुख पलट दिया। 2003-04 और 2018-19 दौरे पर भी भारत ने उसे फालोअन दिया। 1991-92 दौरे पर सिडनी ने ही सचिन तेंदुलकर को ख्याति दी। 148 रन की उनकी पारी ने यह बता दिया था कि भारत ही नहीं दुनिया को एक उम्दा बल्लेबाज मिलने वाला है।

पहले भी रहा है स्पिनरों का जलवा

ऐसा नहीं है कि पहली बार भारतीय स्पिन आस्ट्रेलिया में कमाल कर रही है। इससे पहले भी धीमी गति के गेंदबाजों ने टीम को मैच जीताए हैं। 1977 में पहली बार जब भारतीय टीम आस्ट्रेलिया में टैस्ट जीती थी तब भी स्पिन तिकड़ी के दो गेंदबाजों ने कमाल किया था। बिशन सिंह बेदी और भागवत चंद्रशेखर ने 20 में से 18 विकेट चटकाए थे।

1985-86 की टैस्ट शृंखला के दौरान शिवलाल यादव, रवि शास्त्री और लक्ष्मण शिवरामाकृष्णन ने बॉक्सिंग डे टैस्ट के 17 विकेट अपने नाम किए थे। इसके अगले टैस्ट में भी इनके नाम 14 विकेट हुए। 2004 में सिडनी में खेले गए टैस्ट में अनिल कुंबले ने 12 विकेट अकेले चटकाए।

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