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विस्फोटक बल्लेबाजी से हुई थीं मशहूर, हरमनप्रीत कौर को नहीं मिल रही पांच महीने से सैलरी

हरमनप्रीत ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, ''उन्हें पिछले पांच महीने से सैलरी नहीं मिली है, रेलवे अधिकारी उनका इस्तीफा भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं''। हरमनप्रीत के मुताबिक रेलवे अधिकारी उनसे इस्तीफा स्वीकार करने के लिए 27 लाख रुपयों की मांग कर रहे हैं।

हरमनप्रीत कौर।

महिला विश्व कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 171 रनों की शानदार पारी खेल हरमनप्रीत कौर रातोंरात स्टार बन गईं थी। कौर की प्रतिभा को देखते हुए पंजाब पुलिस ने पिछले साल जुलाई में हरमनप्रीत को डीएसपी के पद की पेशकश की थी। तीन साल पहले हरमनप्रीत को खेल कोटा के तहत वेस्टर्न रेलवे में नौकरी मिली थी। इसके तहत रेलवे के साथ हरमनप्रीत ने पांच साल के बॉन्ड पर साइन किया था। हरमनप्रीत अब रेलवे की नौकरी छोड़ पंजाब पुलिस को ज्वॉइन करना चाहती हैं, लेकिन वेस्टर्न रेलवे उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रहा है। हरमनप्रीत ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, ”उन्हें पिछले पांच महीने से सैलरी नहीं मिली है, रेलवे अधिकारी उनका इस्तीफा भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं”। हरमनप्रीत के मुताबिक रेलवे अधिकारी उनसे इस्तीफा स्वीकार करने के लिए 27 लाख रुपयों की मांग कर रहे हैं। हरमनप्रीत ने बताया कि वेस्टर्न रेलवे के साथ उनका पांच साल तक काम करना था, लेकिन उन्होंने अभी तीन साल ही काम किया है।

हरमनप्रीत कौर।

बॉन्ड के तहत समय से पहले नौकरी छोड़ने पर उनसे 27 लाख रुपयों की मांग की जा रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से अनुरोध किया है कि वह हरमनप्रीत के इस्तीफे को स्वीकार कर उन्हें पंजाब पुलिस में शामिल होने दें। हरमनप्रीत का पक्ष लेते हुए अमरिंदर सिंह ने पीयूष गोयल को लेटर के जरिए लिखा, कि ”वो किसी प्राइवेट जॉब के लिए रेलवे की नौकरी नहीं छोड़ रही हैं। वो अपने भविष्य को और बेहतर बनाने के लिए इस नौकरी को छोड़ना चाहती हैं, उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए”।

वहीं वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजर अनिल कुमार गुप्ता ने कहा, ”नियम के मुताबिक खेल कोटा से नौकरी पाने वालों को यदि समय से पहले काम छोड़ना है तो उन्हें पांच साल की सैलरी जमा कराना जरूरी है। अगर वो ऐसा करते हैं तो उन्हें रेलवे की तरफ से नौकरी छोड़ जाने की अनुमति मिल जाती है”। अनिल कुमार गुप्ता के मुताबिक इस मामले पर कोई फैसला रेलवे बोर्ड ही कर सकती है।

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