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सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन पर टिकी टीम इंडिया की उम्मीद, घट नहीं रही मुश्किलें!

भारत के पास कोई भी लेफ्ट आर्म पेसर गेंदबाज नहीं है जिसके कारण बल्लेबाजों को दूसरी टीम के सामने इस तरह की गेंदबाजी फेस करने में कठिनाई होती है।

महान क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुल तेंदुलकर। साथ में भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री। (फोटो सोर्स पीटीआई)

राहुल संधू

इस साल की शुरुआत में राजस्थान के लेफ्ट आर्म पेसर को नेट सेशन में टीम इंडिया के लिए गेंदबाजी सौंपने के पीछे भारत का एक कारण रहा था। अंकित एक लेफ्ट आर्म गेंदबाज हैं और भारतीय बल्लेबाज नेट सेशन के समय लेफ्ट आर्म पेसर की गेंद पर खेलने की प्रैक्टिस कर रहे थे क्योंकि विराट कोहली और उनकी टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी लेफ्ट आर्म तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क के खिलाफ खेलने के लिए तैयार होना था। भारत का भाग्य अच्छा रहा कि स्टार्क को सीरीज़ के बीच में ही वापस घर जाना पड़ गया और भारतीय बल्लेबाजों को स्टार्क का सामना नहीं करना पड़ा। ऐसी ही कुछ मुश्किलें भारत के सामने फिर से खड़ी हो गई हैं। भारतीय टीम को एक लेफ्ट आर्म गेंदबाज की जरुरत है।

अब भारतीय टीम की निगाहें मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बेटे पर टिकीं हैं। अर्जुन एक लेफ्ट आर्म पेस गेंदबाज हैं और उन्होंने सोमवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले जाने वाली वनडे सीरीज़ में भारतीय टीम को नेट सेशल में ज्वाइन किया। अर्जुन ने कप्तान विराट कोहली और दूसरे बल्लेबाजों के लिए लेफ्ट आर्म पेसर गेंदबाजी की। बीसीसीआई ने अपने ट्विटर अकाउंट पर बल्लेबाजों को गेंदबाजी करते हुए फोटो भी शेयर की हैं। लेफ्ट आर्म पेसर गेंदबाजी के मामले में भारतीय टीम की मुश्किलें अभी भी कम नहीं हो रही है और टीम को इन गेंदबाजों को खेलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

टीम में कोई भी लेफ्ट आर्म पेसर गेंदबाज न होने का असर रविवार को वांखेडे स्टेडियम में हुए मैच में भी दिखाई दिया। भारत के टॉप बल्लेबाजों को ट्रेंट बॉल्ट ने अपनी गेंदबाजी से एक के बाद एक पवेलियन पहुंचाया। भारत के पास कोई भी लेफ्ट आर्म पेसर गेंदबाज नहीं है जिसके कारण बल्लेबाजों को दूसरी टीम के सामने इस तरह की गेंदबाजी फेस करने में कठिनाई होती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लेफ्ट आर्म पेस गेंदबाजी एक दुर्लभ प्रतिभा है जो कि कम ही देखने को मिलती है। पहले भारतीय टीम के पास जहीर खान थे जो भारतीय बल्लेबाजों की इस कमी को दूर कर रहे थे लेकिन साल 2014 में जबसे वे रिटायर हुए हैं भारतीय खिलाड़ियों के लिए चीजें ठीक नहीं रही हैं।

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