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चीरफाड़: बल्लेबाजों की वजह से खाई मार

इंग्लैंड में एक और क्रिकेट सीरीज भारत हार गया। यह हार चुभेगी। हम बेहतर आक्रमण के साथ बड़ी उम्मीदें लेकर गए थे। तेज गेंदबाजी आक्रमण अब तक का बेहतरीन था।

Author September 6, 2018 4:26 AM
भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों को बखूबी खेलते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अक्सर ही स्पिनरों के सामने भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ा जाती है।

इंग्लैंड में एक और क्रिकेट सीरीज भारत हार गया। यह हार चुभेगी। हम बेहतर आक्रमण के साथ बड़ी उम्मीदें लेकर गए थे। तेज गेंदबाजी आक्रमण अब तक का बेहतरीन था। किसी भी पिच पर रविचंद्रन अश्विन की विकेट झटकने की कला साथ में अतिरिक्त एडवांटेज था। पांच टैस्ट मैचों की सीरीज का अभी एक टेस्ट बचा है और हम 1-3 से पीछे हैं। सीरीज के दौरान मैच पर बनी पकड़ को भारतीय खिलाड़ियों ने फिसल जाने दिया। सौ रन से पहले आधी टीम को पेवेलियन में पहुंचाने के बावजूद अगर आप विपक्षी टीम को पुछल्ले बल्लेबाजों की मदद से चंगुल से निकल जाने देते हो तो आप जीत के कतई हकदार नहीं। यही भारतीय टीम के साथ हुआ।

भारत एजबेस्टन में पहला टैस्ट 31 रन से हारा, लार्ड्स में पारी और 159 रन से करारी पराजय मिली, ट्रेंट ब्रिज में 203 रन से शानदार जीत के साथ भारत ने वापसी की उम्मीद जगाईं। लेकिन साउथंपटन में 60 रन से हार के साथ सीरीज जीतने का सपना रफूचक्कर हो गया। परिणाम से साफ है कि दूसरे टैस्ट में इंग्लैंड टीम जबकि तीसरे में भारतीय टीम बेहतर थी। पहला और चौथा टेस्ट किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था। इंग्लैंड ने बेहतर प्रदर्शन से परिस्थितियों को बदला। इसमें कोई संदेह नहीं कि जसप्रीत बुमरा, ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी ने बेहतरीन गेंदबाजी की। लेकिन मैच सिर्फ गेंदबाजों से ही नहीं जीते जाते। बल्लेबाजी भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। बल्लेबाज रन बटोरकर बड़ा स्कोर खड़ा नहीं करेंगे तो गेंदबाज कितनी लड़ाई लड़ सकते हैं। वास्तव में बल्लेबाजी हमारी कमजोर कड़ी रही। अनुभव था लेकिन सहवाग, सचिन, लक्ष्मण, द्रविड़ और सौरभ गांगुली जैसे कौशलमय खिलाड़ी नहीं थे।

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फिर गेंदबाजी में जिस स्पिनर को हम अपनी ताकत समझते थे, वही कमजोर साबित हुआ। अश्विन अपनी साख के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए। कुलदीप यादव के जरिए इंग्लैंड को नतमस्तक करने का दांव भी पहले टैस्ट में खेला गया। पिछले डेढ़ दशक से बल्लेबाजी हमारी ताकत रही है। लेकिन मोर्चे पर लड़ते नजर आए विरोट कोहली। चंद पारियों में अजिंक्या रहाणे के साथ उनकी महत्त्वपूर्ण साझेदारी हुई जरूर, पर तीसरे टैस्ट को छोड़कर वह मैच विजयी साबित नहीं हुई। विराट कोहली दुनिया के नंबर वन बल्लेबाज हैं। चार टैस्ट मैचों की आठ पारियों में उन्होंने 68.00 की औसत से 544 रन बनाकर (दो शतक, तीन अर्धशतक) सुर्खियां बटोरीं। चेतेश्वर पुजारा ने 48.20 की औसत से 241 रन जुटाए। अगर चौथे टैस्ट में उनकी नाबाद 132 रन की पारी को अलग कर दिया जाए तो उनका प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं रहा। रहाणे ने दो अर्धशतकों की मदद से आठ पारियों में 220 रन बनाए। 21.80 उनका औसत रहा। शिखर धवन ने 26.73 की औसत से 158 रन बनाए। केएल राहुल तो आठ पारियों में 14.12 की औसत से मात्र 113 रनों का योगदान दे पाए। ऋषभ पंत चार पारियों में 43 रन ही बटोर सके।

टैस्ट क्रिकेट में खासे सफल रहे मुरली विजय ने दो टैस्ट मैचों में पारी की शुरुआत की, मगर कभी सहज दिखाई नहीं दिए। फिर राहुल और शिखर धवन की जोड़ी को आजमाया गया। शिखर धवन भी परेशानी में ही दिखे और विकेट के करीब लपके गए। चेतेश्वर पुजारा की नंबर वन पोजीशन की दावेदारी को पहले तो अनदेखा किया गया। जब मौका मिला तो पुजारा ने एक हाफ सेंचुरी और एक नाबाद शतकीय पारी से जोरदार जवाब दिया। जब 246 के विजयी लक्ष्य को पाने के लिए उनके दृढ़ खेल की जरूरत थी तो वे भी घुटने टेक गए।

भारतीय बल्लेबाज स्पिनरों को बखूबी खेलते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अक्सर ही स्पिनरों के सामने भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ा जाती है। मोइन अली तो पहले भी भारतीय बल्लेबाजों को परेशान करते रहे हैं। इंग्लैंड के स्वेन और मोंटी पानेसर ने भी तंग किया है। हार्दिक पांड्या से बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन स्वभाव के विपरीत रक्षात्मक खेलना उन्हें रास नहीं आया। दिनेश कार्तिक के पहले टैस्ट में विफल रहने पर पंत को मौका दिया गया। पर उनकी कीपिंग और बल्लेबाजी में अपरिपक्वता की झलक मिली।

भारत के तेज गेंदबाजों की इस बात के लिए तो तारीफ करनी होगी कि उन्होंने इंग्लैंड के खतरनाक ओपनर एलिस्टेयर कुक और कप्तान जो रूट को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। जहां रूट सात पारियों में केवल एक हाफ सेंचुरी लगा पाए वहीं कुक तो जूझते ही रह गए। भारतीय टीम प्रबंधन शायद किसी भी तरह के परीक्षण का खतरा मोल लेना नहीं चाहता जो क्रम एक बार बन गया, उसी पर चलते रहो। जब लक्ष्य छोटा हो तो परीक्षण करना चाहिए। पंत और पांड्या जैसे बल्लेबाज संभलकर खेलेंगे तो रन नहीं बनेंगे और विकेट निकलते रहेंगे।

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