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IND vs WI: क्रिकेट में तकनीक के इस्तेमाल की हो समीक्षा

जडेजा के मामले ने इस प्रक्रिया के इस्तेमाल करने को लेकर फिर ठंडे पड़े बहस को हवा दे दी है। जानकारों ने डीआरएस के इस्तेमाल के तरीके की समीक्षा की बात उठाई है। इस तकनीक के उपयोग के बने हुए नियम-कानून अभी बहुत ज्यादा स्पष्ट नहीं है।

Author Published on: December 26, 2019 1:25 AM
जब कैमरा अंपायर ने देख लिया था कि जडेजा आउट हैं तो उन्हें मैदानी अंपायर को बताने का अधिकार था या नहीं, इसे लेकर डीआरएस नियमों में क्या उल्लेख है इसकी स्पष्टता भी नहीं है।

मनीष कुमार जोशी
भारत और वेस्ट इंडीज के बीच खेली गई एकदिवसीय शृंखला के पहले मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज रविंद्र जडेजा का रन आउट होना विवादास्पद रहा। मैदानी अंपायर ने इसे नॉटआउट करार दिया तो वहीं रिप्ले के दौरान दिखाया गया कि वे आउट थे। यह भी बताया गया कि कैरेबियाई टीम के कप्तान को उनके वीडियो एनालिटिक का इशारा भी आया था जिसके बाद उन्होंने डीआरएस की मांग की। इसके बाद जडेजा को आउट करार दिया गया। इस पूरे प्रकरण को लेकर कोहली ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि डीआरएस का निर्णय लेने में मैदान के बाहर से मदद लेना जायज नहीं है।

दरअसल, ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी कई बार डीआरएस लेने से पहले मैदान के बाहर के व्यक्ति से मदद लेने को लेकर विवाद हो चुके हैं। जडेजा के मामले ने इस प्रक्रिया के इस्तेमाल करने को लेकर फिर ठंडे पड़े बहस को हवा दे दी है। जानकारों ने डीआरएस के इस्तेमाल के तरीके की समीक्षा की बात उठाई है। इस तकनीक के उपयोग के बने हुए नियम-कानून अभी बहुत ज्यादा स्पष्ट नहीं है। जब कैमरा अंपायर ने देख लिया था कि जडेजा आउट हैं तो उन्हें मैदानी अंपायर को बताने का अधिकार था या नहीं, इसे लेकर डीआरएस नियमों में क्या उल्लेख है इसकी स्पष्टता भी नहीं है। सवाल ये भी है कि अगर पूरी दुनिया खिलाड़ी को टीवी पर आउट होते देखती है और मैदानी अंपायर उसे नॉटआउट करार देता है तो मामले में कहीं न कहीं नियमों की अस्पष्टता जाहिर होती है। हम अभी भी तकनीक का किस सीमा तक उपयोग करना है यह तय नहीं कर पाए हैं।

यह मामला पहला नहीं है, इससे पहले भी कई बार डीआरएस से संबंधित विवाद हो चुके हैं। विश्वकप के दौरान वेस्ट इंडीज के विरुद्ध ही रोहित शर्माा के आउट होने की अपील पर डीआरएस लिया गया। इसमें यह तय करना था कि गेंद रोहित के बैट से लगी है या पैड से। कैमरा अंपायर के पास स्पष्ट फुटेज नहीं थे जिससे यह तय हो सके कि गेंद कहां लगी है। इस हालत में हमेशा ही संदेह का लाभ बल्लेबाज को मिलना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रोहित को आउट करार दिया गया। तब वे शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे। इस फैसले के बाद डीआरएस और कैमरा अंपायर की जमकर आलोचना हुई।

अब इस बात को समझना होगा कि हमने सटीक फैसले के लिए तकनीक का इस्तेमाल करना तो शुरू कर दिया लेकिन यह कई बार विवाद का कारण बन रहा है। क्रिकेट ही नहीं बल्कि दुनिया के ज्यादातर खेलों में तकनीक को जगह दी गई है। हालांकि क्रिकेट में तकनीक के इस्तेमाल के साथ उसके नियम भी बनाए गए लेकिन यह बहुत ज्यादा स्पष्ट नहीं है। इस कारण न केवल विवाद खड़े होते हैं, कई बार टीम को एक फैसले के कारण हार का सामना भी करना पड़ता है। अंत में इस जेंटलमैन खेल को शर्मशार होना पड़ता है। खेल में तकनीक का प्रयोग विवाद समाप्त करने के लिए शुरू हुआ लेकिन यह विवाद का कारण बनने लगा।

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