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रणजी क्रिकेट में बेटे की पारी देख बोले पूर्व सांसद- चुनावी नतीजों से ज्यादा बेटे की बल्लेबाजी देख होती है टेंशन, बच्चों को राजनीति से दूर ही रखना चाहूंगा

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे और पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई का बेटा चैतन्य हरियाणा की रणजी टीम में खेलता है।

बड़ौदा शहर के मोती बाग मैदान में कुलदीप बिश्नोई (Express Photo by Bhupendra Rana)

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे और पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई एक राजनेता होने के साथ ही क्रिकेटर के पिता भी हैं। उनका बेटा हरियाणा की रणजी टीम के लिए खेलता है। रणजी ट्रॉफी के चौथे क्वार्टर फाइनल में हरियाणा की टीम का मुकाबला झारखंड से हुआ। कुलदीप विश्वोई ने इस मैच को पूरे समय मैदान में बैठकर देखा। वह लगातार हरियाणा की टीम को प्रोत्साहित कर रहे थे, हालांकि जब हरियाणा की टीम विकेट चटकाने में विफल हो रही थी तब वह चिंतित भी हो उठते। कुलदीप का मोबाइल भी साइलेंट मोड पर रहा और तीन दिन तक उनका ध्यान सिर्फ मैच पर रहा।

गुजरात में बड़ौदा शहर के मोती बाग मैदान में हुए इस मैच के दौरान अक्सर वह कहते सुने गए, “भाई विकेट लो, अरे ऐसा मत करो, उसको बोलिंग दो। इसको ऊपर से मारना चाहिए था, मैं खेलता तो ऊपर से ही मारता था।” हालांकि अंत में हरियाणा की टीम झारखंड को जीत से नहीं रोक पाई। सोमवार को हरियाणा की टीम को पांच विकेट से हराकर झारखंड ने सेमीफाइनल में जगह बना ली। लेकिन हरियाणा की ओर से सबसे ज्यादा रन बिश्नोई के बेटे चैतन्य बिश्नोई ने ही बनाए।

कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि वह इस साल तीन रणजी मैच देखने गए हैं, जिसमें से एक हरियाणा वाला भी है। उन्होंने बताया कि वह मैच अपने बेटे की वजह से देखने नहीं आए थे, बल्कि बचपन से उनका पहला प्यार भी क्रिकेट रहा है। कुलदीप ने कहा, “मेरे कोच योगराज सिंह (युवराज सिंह के पिता) थे। मैं क्रिकेट में काफी अच्छा था लेकिन अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। हालांकि मेरे दोनों बेटों और बेटी के साथ ऐसा नहीं है। वह जो चाहे बन सकते हैं, लेकिन मैं चाहूंगा कि मेरे बच्चे राजनीति से दूर ही रहें। अब राजनीति गंदी हो गई है।” झारखंड के खिलाफ खेलते हुए बल्लेबाज चैतन्य बिश्नोई ने दोनों पारियों में क्रमश: 41 और 52 रन बनाए थे। हालांकि पिता कुलदीप को उम्मीद थी कि उनका बेटा लंबी पारी खेलेगा लेकिन कौशल सिंह की बॉल पर आउट होकर चैतन्य को पवेलियन लौटना पड़ा। कुलदीप ने कहा, “चुनावी नतीजों से ज्यादा टेंशन बेटे की बल्लेबाजी देखकर होती है।”

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