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श्रीलंका ने ICC से की भारत की शिकायत, कहा- हम ऐसे हाल में नहीं खेल सकते

टेस्‍ट के दूसरे दिन के दूसरे सत्र में पांच से ज्यादा श्रीलंकाई खिलाड़ी मैदान पर मास्क लगाकर उतरे थे।

दिल्ली में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के चौथे दिन श्रीलंकाई टीम मास्क पहने नजर आई।

श्रीलंका के क्रिकेट बोर्ड ने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट परिषद से दिल्‍ली में टेस्‍ट मैच के दौरान खराब वायु गुणवत्‍ता की शिकायत की है। लंका के खेल मंत्री दयासिरी जयसेकरा ने कहा कि श्रीलंका क्रिकेट की ओर से आईसीसी को मंगलवार (5 दिसंबर) को शिकायत की गई थी। बोर्ड ने कहा कि ‘हम इस तरह नहीं खेल सकते जब चार खिलाड़ी उल्‍टी कर चुके हैं।’ श्रीलंका और भारत के बीच दिल्‍ली के फिरोज शाह कोटला मैदान पर तीसरा और आखिरी टेस्‍ट खेला गया था। फिरोजशाह कोटला मैदान पर दूसरे दिन के दूसरे सत्र में पांच से ज्यादा श्रीलंकाई खिलाड़ी मैदान पर मास्क लगाकर उतरे थे। प्रदूषण के कारण मैच तीन बार रोका गया था। भोजनकाल के बाद रविवार को श्रीलंकाई खिलाड़ियों को मास्क पहने देखा गया था। अंपायरों ने इस बारे में खिलाड़ियों के साथ बात की और इस कारण 15 मिनट के लिए मैच रुका रहा। दिन की शुरूआत में ही सुरंगा लकमल को उल्टी हुई थी और वह कुछ ओवरों के लिए मैदान से बाहर चले गए थे। हालांकि वह वापस मैदान पर आ गए थे। श्रीलंका के कुछ खिलाड़ी चौथे दिन सात खिलाड़ी मैदान पर मास्क पहन कर उतरे थे।

श्रीलंका टीम के अंतरिम कोच निक पोथास ने इस बात को माना कि फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन मंगलवार को उनकी टीम के कुछ खिलाड़ियों की डॉक्टर ने जांच की थी, लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि वो क्या टेस्ट थे वो उन्हें नहीं पता। ऐसी खबरें थी प्रदूषण की समस्या से जूझ रही श्रीलंका टीम के खिलाड़ियों की जांच के लिए डॉक्टर को बुलाया गया था।

भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने श्रीलंकाई खिलाड़ियों द्वारा की गई प्रदूषण की शिकायत पर कहा कि यह मुद्दा जितना था उससे ज्यादा बताया गया। शमी ने हालांकि कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अब प्रदूषण की समस्या इतनी परेशान नहीं करती, क्योंकि वे अब इसके आदी हो गए हैं।

शमी ने कहा, “जितनी ये प्रदूषण वाली बात है जाहिर सी बात है कि सोचने का विषय है, लेकिन जितना बताया जा रहा था उतना भी नहीं था। हो सकता है कि हम इस तरह के वातावरण के आदि हो गए है, ज्यादा उस चीज को बर्दाश्त करते हैं तो हो सकता हमें दिक्कात न हो, लेकिन प्रदूषण की जो वजह से उसे कम किया जाए तो बेहतर है। दिक्कत तो हमेशा हम लोगों को ही आनी है, लेकिन हमें अब आदत हो गई है।”

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