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यो-यो टेस्‍ट: कोच रवि शास्‍त्री ने बढ़ाई प्‍लेयर्स की मुश्किल, अब लाने होंगे ज्‍यादा नंबर

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की मुश्किल और बढ़ गई है। टीम प्रबंधन ने खिलाड़ियों के लिए फिटनेस मानकों की दीवार और ऊंची करने का फैसला किया है। टीम प्रबंधन ये चाहता है कि अब योयो टेस्ट में पास होने के लिए खिलाड़ियों को 16.1 की बजाय 16.3 के जादुई आंकड़े को छूना होगा।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और काेच रवि शास्त्री।(File Photo)

फिटनेस टेस्ट में लगातार होते जा रहे भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की मुश्किल और बढ़ गई है। टीम के प्रबंधन ने खिलाड़ियों के लिए फिटनेस मानकों की दीवार और ऊंची करने का फैसला किया है। टीम प्रबंधन ये चाहता है कि अब योयो टेस्ट में पास होने के लिए खिलाड़ियों को 16.1 की बजाय 16.3 के जादुई आंकड़े को छूना होगा। बता दें कि योयो टेस्ट खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता को मापने का सबसे लेटेस्ट पैमाना है। इस नए टेस्ट के कारण ही कई बड़े खिलाड़ियों को मैदान से बाहर बैठना पड़ रहा है। क्रिकेट खिलाड़ियों को ताजा झटका कोच रवि शास्त्री ने दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि योयो टेस्ट में न्यूनतम ​अंक न लाने वाले सभी खिलाड़ियों को भारतीय टीम में जगह नहीं दी जाएगी। फिर चाहें वह नया खिलाड़ी हो या फिर कोई स्टार प्लेयर। उनकी इस सख्ती का असर था कि सोमवार (11 जून) को स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी थे और उससे तीन दिन पहले इंडिया ए टीम के संजू सैमसन को टीम से बाहर कर दिया गया था।

भविष्‍य देखते हुए लिया फैसला: क्रिकेट बोर्ड के सूत्र बताते हैं कि खेल और खिलाड़ियों के सेलेक्शन में किया जा रहा बदलाव भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक,”रवि शास्त्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि हर खिलाड़ी को योयो टेस्ट पास करना ही होगा। ये फैसला उन्होंने भारतीय टीम के कठिन विदेशी दौरों को देखते हुए उठाए हैं, जिसमें अगले साल होने वाला विश्वकप भी शामिल है।” बोर्ड में चयन समिति के अलावा इंडिया ए प्रबंधन के अधिकारी भी शामिल होते हैं।

क्या है यो-यो टेस्ट: टीम इंडिया के कंडिशनिंग कोच शंकर बासु ने खिलाड़ियों के लिए रैंडम फिटनेस टेस्ट ज़रूरी बना दी है। इसके तहत खिलाड़ियों को कड़ी ट्रेनिंग से गुज़रना होता है।खिलाड़ियों की फिटनेस को तय करने वाला ‘यो-यो टेस्ट’ बासु की परियोजना है। इसी के तहत संजू सैमसन और मोहम्‍मद शमी को टीम से बाहर रखा गया है।

ऐसे होता है टेस्ट पास: खिलाड़ियों की फिटनेस परखने के लिए यो-यो टेस्ट ‘बीप’ टेस्ट का एडवांस वर्जन है। 20-20 मीटर की दूरी पर दो लाइनें बनाकर कोन रख दिए जाते हैं। एक छोर की लाइन पर खिलाड़ी का पैर पीछे की ओर होता है और वह दूसरे की तरफ वह दौड़ना शुरू करता है। हर मिनट के बाद गति और बढ़ानी होती है और अगर खिलाड़ी वक्त पर लाइन तक नहीं पहुंच पाता तो उसे दो बीप्स के भीतर लाइन तक पहुंचना होता है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम होता है तो उसे फेल माना जाता है। औसतन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी यो-यो टेस्ट में 21 का स्कोर करते हैं। टीम इंडिया में विराट, रवींद्र जाडेजा, मनीष पांडे लगातार यह स्कोर हासिल कर रहे हैं, जबकि बाकी खिलाड़ियों का स्कोर या तो 19.5 है या उससे ज़्यादा। इंडियन टीम के लिए अभी तक ये स्कोर 16.1 का रखा गया था।

बाहर बैठ रहे हैं स्टार खिलाड़ी: नए नियम के मुताबिक टीम इंडिया में खेलने के लिए सभी खिलाड़ियों को यो-यो टेस्ट निकालना ही पड़ता है। ये टेस्ट राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी, बेंगलुरु में किया जाता है। वैसे तो टीम इंडिया को नियमित तौर पर कई तरह के फिटनेस टेस्‍ट से गुज़रना पड़ता है। इनमें ‘यो-यो’ टेस्‍ट सबसे ज़रूरी है। इसी टेस्ट के कारण मौजूदा भारतीय टीम को सबसे फिट टीम माना जाता हैैै। लेकिन टीम इंडिया के कई टॉप खिलाड़ी भी यो-यो टेस्‍ट पास करने में नाकाम रहे हैं।

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