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छत्तीसगढ़ रणजी ट्रॉफी में खेलेगा, बीसीए की अनदेखी

गैर मान्यता प्राप्त क्रिकेट एसोसिएशन आफ बिहार (सीएबी) के सचिव आदित्य वर्मा ने आरोप लगाया कि बीसीसीआइ अध्यक्ष शशांक मनोहर सहित बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने एन श्रीनिवासन के खिलाफ अपनी लड़ाई में उनका इस्तेमाल किया

Author , मुंबई / दिल्ली | February 19, 2016 11:31 PM
बीसीसीआइ

बीसीसीआइ ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ को पूर्ण सदस्य का दर्जा दे दिया जिससे यह बोर्ड की 28वीं मान्यता प्राप्त इकाई बन गया जो रणजी ट्राफी में भाग लेगा। बीसीसीआइ ने बयान में कहा कि सदस्यों ने बीसीसीआइ की मान्यता समिति की छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ की पूर्ण सदस्यता देने की सिफारिशों को मंजूरी दे दी। यह अब बीसीसीआइ के सभी टूर्नामेंट में मध्य क्षेत्र का हिस्सा होगा। छत्तीसगढ़ अब काफी लंबे समय एसोसिएट सदस्य रह चुका है और उसके पास रायपुर में सारी सुविधाओं से पूर्ण स्टेडियम भी है। इस बैठक में छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ (सीसीएस) के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया भी मौजूद थे।

दिलचस्प बात है कि अस्वीकृत क्रिकेट एसोसिएशन आफ बिहार (सीएबी) को बीसीसीआइ ने अनदेखा किया है। इसके सचिव आदित्य वर्मा आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग याचिका और एन श्रीनिवासन के खिलाफ अभियान का चेहरा थे। यहां तक कि वर्मा को बैठक के लिए भी आमंत्रित नहीं किया गया जबकि विरोधी गुट अब एसोसिएट सदस्यता दर्जा हासिल करने के लिए दावेदार दिखता है। वर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मनोहर एंड कंपनी ने उनका इस्तेमाल किया। हालांकि एक दिलचस्प कदम यह भी उठाया गया कि बिहार क्रिकेट संघ (बीसीए) को कार्यकारी समिति की बैठक में भाग लेने की अनुमति दे दी गई जो राज्य का विरोधी गुट है। इसके सचिव मृत्युंजय तिवारी ने बैठक में शिरकत की। गैर मान्यता प्राप्त क्रिकेट एसोसिएशन आफ बिहार (सीएबी) के सचिव आदित्य वर्मा ने आरोप लगाया कि बीसीसीआइ अध्यक्ष शशांक मनोहर सहित बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों ने एन श्रीनिवासन के खिलाफ अपनी लड़ाई में उनका इस्तेमाल किया और अपना काम निकलने के बाद आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में याचिकाकर्ता को उसके हाल पर छोड़ दिया।

श्रीनिवासन विरोधी मुहिम का चेहरा रहे वर्मा को पता चला कि बोर्ड की कार्य समिति की बैठक में हिस्सा लेने के लिए बिहार राज्य के उनके विरोधी क्रिकेट संघ बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) के सचिव मृत्युंजय तिवारी को आमंत्रित किया गया है। वर्मा ने कहा कि आज मुझे लग रहा है कि बीसीसीआइ अध्यक्ष शशांक मनोहर ने मेरा इस्तेमाल किया। मुझे यह बताने में कोई हिचक नहीं है कि जब मैंने श्रीनिवासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और भारतीय क्रिकेट में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया तो उन्होंने मेरा पूरा समर्थन किया। उन्होंने क्रिकेट एसोसिएशन आफ बिहार की मान्यता के मामले में मदद का वादा किया था। अब मुझे पता चला है कि कुछ प्रशासक जब पद पर नहीं होते तो मुखौटा पहने होते हैं।

निराश वर्मा ने कहा कि सभी एक जैसे हैंं। वर्मा ने कहा कि उन्हें मनोहर पर काफी विश्वास था लेकिन विदर्भ के इस वकील के उनकी अपील को महत्त्व नहीं देने के बाद वे सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद लगा सकते हैं। वर्मा ने श्रीनिवासन के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

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