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बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहली मई का आइपीएल मैच पुणे में कराने की अनुमति दी

बंबई हाई कोर्ट ने 12 अप्रैल को फैसला दिया था कि 30 अप्रैल के बाद महाराष्ट्र में होने वाले आइपीएल के सारे मैच अन्यत्र कराए जाएं।

Author मुंबई/ चेन्नई | April 21, 2016 1:22 AM
बंबई उच्च न्यायालय (फाइल फोट)

बंबई हाई कोर्ट ने बुधवार (20 अप्रैल) को बीसीसीआइ को पहली मई को मुंबई इंडियंस और राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स का मैच पुणे में कराने की अनुमति दे दी जबकि कुछ दिन पहले ही 30 अप्रैल के बाद होने वाले आइपीएल के सभी मैच सूखाग्रस्ट महाराष्ट्र से बाहर कराने का फैसला दिया था। न्यायमूर्ति वीएम कनाडे और एम एस कर्णिक की खंडपीठ ने यह अनुमति बीसीसीआइ महाप्रबंधक (खेल विकास) रत्नाकर शेट्टी की याचिका पर दी। उन्होंने अदालत से अपील की थी कि बीसीसीआइ को पहली मई का मैच पुणे में ही कराने की अनुमति दी जाए। उधर, मद्रास हाई कोर्ट ने बोर्ड के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है।

बंबई हाई कोर्ट ने 12 अप्रैल को फैसला दिया था कि 30 अप्रैल के बाद महाराष्ट्र में होने वाले आइपीएल के सारे मैच अन्यत्र कराए जाएं। इसके बाद 13 मैच अन्य राज्यों को स्थानांतरित किए गए। शेट्टी ने याचिका में पहली मई को होने वाला मैच पुणे में ही कराने की अनुमति मांगी थी क्योंकि एक दिन के भीतर मैच दूसरी जगह कराने का बंदोबस्त संभव नहीं था। पुणे को 29 अप्रैल को गुजरात लायंस के खिलाफ पुणे में खेलना है और बीसीसीआइ व पुणे फ्रेंचाइजी के लिए पहली मई को महाराष्ट्र के बाहर मैच शिफ्ट करना संभव नहीं था क्योंकि एक दिन में सारे इंतजाम नहीं किए जा सकते। अदालत ने बीसीसीआइ की दलीलें सुनने के बाद अनुमति दे दी लेकिन कहा कि यह अपवाद है। बंबई हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र में 30 अप्रैल के बाद होने वाले मैचों का आयोजन दूसरी जगह कराने को कहा था।

उधर, मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार (20 अप्रैल) को सीबीआइ के पूर्व निदेशक आर के राघवन और अन्य की जनहित याचिका खारिज कर दी जिसमें भारतीय क्रिकेट बोर्ड और इसके अध्यक्ष शशांक मनोहर को ऐसा कोई भी बदलाव करने से रोकने की मांग की गई थी जिससे आइसीसी के राजस्व में से बीसीसीआइ का हिस्सा कम हो। राघवन के वकील विजय नारायणन की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने याचिका खारिज कर दी।

याचिकाकर्ता ने कहा था कि राजस्व वितरण माडल में छह फीसद कटौती के मनोहर के एकतरफा प्रस्ताव से बीसीसीआइ को कम से कम 1000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अखबार में छपी खबरों और तमिलनाडु क्रिकेट संघ से मिले ब्योरे के आधार पर याचिका दायर की थी।

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