Bhuvenshwar Kumar said his cricket story of new episode of Break fast With Champions - माता-पिता को नहीं पसंद था भुवी का क्रिकेट खेलना, फिर इस तरह बन गए स्विंग के सुल्तान - Jansatta
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माता-पिता को नहीं पसंद था भुवी का क्रिकेट खेलना, फिर इस तरह बन गए स्विंग के सुल्तान

अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एक मात्र टेस्ट मैच के लिए भुवनेश्वर कुमार को आराम दिया गया है। भुवी ने शो के दौरान बताया कि मैदान पर वह ज्यादातर शांत ही रहा करते थे, लेकिन भारतीय टीम में शामिल होने के बाद ईशांत शर्मा ने उनकी आदतों को बदलने का काम किया।

भुवनेश्वर कुमार।

टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने गौरव कपूर के शो ‘ब्रेकफास्ट विद चैंपियन’ में अपनी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातों का जिक्र किया। अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एक मात्र टेस्ट मैच के लिए भुवनेश्वर कुमार को आराम दिया गया है। भुवी ने शो के दौरान बताया कि मैदान पर वह ज्यादातर शांत ही रहा करते थे, लेकिन भारतीय टीम में शामिल होने के बाद ईशांत शर्मा ने उनकी आदतों को बदलने का काम किया। भुवी ने कहा, ”टीम में शामिल होने के बाद ईशांत शर्मा ने उनकी काफी मदद की”। भुवी ने आगे कहा, ”वह बचपन से पढ़ाई में काफी कमजोर थे, इस वजह से माता-पिता उनके भविष्य को लेकर काफी चिंतित रहते थे”। भुवनेश्वर कुमार अपनी बड़ी बहन के काफी क्लोज हैं और वह उनसे अपनी सारी बातें शेयर करते हैं। भुवी ने बताया कि दसवीं क्लास में बोर्ड एग्जाम के दौरान वह अंडर-15 खेल रहे थे। भुवी की पढ़ाई को देखते हुए किसी को उम्मीद नहीं थी कि वह दसवीं पास हो पाएंगे।

भुवनेश्वर कुमार।

हालांकि, भुवी ने एक महीने के दौरान तीन-तीन ट्यूशन में पढ़ाई की, इसके अलावा वह घर में भी मेहनत करने लगे। भुवी को इस मेहनत का फल रिजल्ट के रूप में मिला और वह 60 पर्सेंट लेकर फर्स्ट डिविजन से पास हो गए। भुवी के इस नंबर से खुश होकर उनकी बहन ने पूरी गली में मिठाई भी बांटी। हालांकि, भुवी के माता-पिता चाहते थे कि वह अपना ध्यान पढ़ाई में और लगाए और कुछ बेहतर करें। उन्हें भुवी का इस तरह खेल के पीछे अपना सारा समय बर्बाद करना पसंद नहीं था।

भुवी ने कहा, ”जब पहली बार वह माता-पिता के पास क्रिकेट खेलने की बात करने के लिए गए तो उनके घर वालों ने पार्क में खेलने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें स्टेडियम में प्रोपर ट्रेनिंग लेकर क्रिकेट खेलना है। इस बात से वह खुश तो नहीं थे, लेकिन बेटे की खुशी के लिए उन्होंने अपनी रजामंदी दे दी। बता दें कि भुवनेश्वर कुमार का नाम आज वर्ल्ड के टॉप क्लास गेंदबाजों में लिया जाता है। क्रिकेट में डेथ स्पेशलिस्ट के रूप में एक अलग छवि बनाने में भुवी पूरी तरह से कामयाब रहे हैं।

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