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अब नहीं दिखेगा युवराज का जलवा

युवराज 2000 में भारतीय टीम का हिस्सा बने। इसके बाद उन्होंने कई विपक्षी गेंदबाजों को अपने सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। जब युवी टीम में शामिल किए गए थे तब उनकी उम्र 19 साल थी। ठीक 19 साल बाद ही उन्होंने क्रिकेट को अलविदा भी कह दिया।

मां और पत्नी हेजल के साथ युवराज सिंह

आत्माराम भाटी

भारतीय टीम को दूसरी बार विश्व कप दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले युवराज सिंह अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नहीं दिखेंगे। उन्होंने 10 जून (सोमवार) को यह फैसला कर सबको चौंका दिया। मजबूत इच्छाशक्ति व बुलंद इरादों से क्रिकेट की दुनिया में पैठ जमाने वाले युवराज को कई महत्त्वपूर्ण पारियों के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने भारत को 2007 में टी-20 विश्व कप का खिताब दिलाने में भी अहम किरदार निभाया था। वे इन दोनों ही विश्व कप में मैन आॅफ द टूर्नामेंट रहे थे।

युवराज 2000 में भारतीय टीम का हिस्सा बने। इसके बाद उन्होंने कई विपक्षी गेंदबाजों को अपने सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। जब युवी टीम में शामिल किए गए थे तब उनकी उम्र 19 साल थी। ठीक 19 साल बाद ही उन्होंने क्रिकेट को अलविदा भी कह दिया। युवी के लिए 2011 के बाद का समय काफी प्रतिकूल रहा। विश्व कप 2011 मैच के दौरान ही पिच पर युवराज को खून की उल्टियां होने लगीं। मैच के दौरान इस घटना से सभी स्तब्ध थे। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और पूरा मैच खेला। बाद में जांच में पता चला कि उन्हें कैंसर है। इस खबर के बाद मीडिया में यह बातें कही जाने लगी कि उनका मैदान पर उतरना लगभग नामुमकिन है। युवराज ने अपने मजबूत इरादों की बदौलत कैंसर को हराकर मैदान पर वापसी की।

यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए कि क्रिकेट प्रेमियों में युवराज की बल्लेबाजी के प्रति अलग ही आकर्षण था। जब वे मैदान पर उतरते तो हर क्रिकेट प्रेमी को इनसे यही उम्मीद रहती की अब हमें धूम-धड़ाके वाली बल्लेबाजी देखने को मिलेगी। युवराज की 2007 टी-20 विश्व कप में खेली गई पारी को नहीं भुलाया जा सकता है। इंग्लैंड के गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर की सभी छह गेंदों को छक्के के रूप में मैदान के बाहर पहुंचाकर वे हीरो बन गए। इस मैच में युवराज ने 12 गेंद में अर्धशतक पूरा किया था।

युवराज की बल्लेबाजी का जलवा 2002 में नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में ठीक उसी तरह दिखा जिस तरह 1983 में जिंबाब्वे के खिलाफ कपिल देव की खेली गई 175 रन की पारी का था।  इंग्लैंड ने भारत को फाइनल में 327 रन का लक्ष्य दिया। भारत के पांच प्रमुख बल्लेबाज 146 रन पर पवेलियन लौट गए थे। तब युवराज ने मोहम्मद कैफ के साथ 121 रन की साझेदारी कर हारे हुए मैच को जीत में बदल दिया।

युवराज के क्रिकेट करिअर पर निगाह डालें तो इन्होंने 2000 में केन्या के खिलाफ एकदिवसीय में, 2003 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टैस्ट में और स्कॉटलैंड के खिलाफ टी-20 में पदार्पण किया। इनका अंतिम वनडे और टी-20 सफर 2017 तक रहा। जबकि आखिरी टैस्ट 2012 में खेला। इसके बाद लगातार आइपीएल में और घरेलू क्रिकेट में भाग लेते रहे। युवराज ने 40 टैस्ट में लगभग 1900 रन और 304 वनडे में 8701 रन बनाए। टी-20 में 58 मैचों में कुल 1177 रन इनके नाम रहे।

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