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2002 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हेडिंग्ले टेस्ट में जीत कैरियर का ‘निर्णायक क्षण’: अनिल कुंबले

वीरेंद्र सहवाग की तारीफों के पुल बांधते हुए कुंबले ने कहा कि दिल्ली के इस बल्लेबाज ने शीर्ष पर अपनी आक्रामकता से भारतीय बल्लेबाजी का चेहरा ही बदल दिया।

Author कोलकाता | September 30, 2016 6:31 PM
कुंबले ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत श्रीलंका के खिलाफ वनडे में अप्रैल 1990 में की। इसी वर्ष इंग्लैड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला। (फोटो-बीसीसीआई)

भारतीय क्रिकेट में मुख्य गेंदबाज से अब राष्ट्रीय कोच की अहम जिम्मेदारी निभा रहे लेग स्पिनर अनिल कुंबले ने इंग्लैंड के खिलाफ हेडिंग्ले में 2002 में मिली जीत को अपने कैरियर का ‘निर्णायक क्षण’ करार किया। कुंबले ने कहा कि वह इस जीत को अपने कैरियर का निर्णायक क्षण मानते हैं क्योंकि इसके बाद उन्होंने टीम की कप्तानी की जो महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में नंबर एक टीम बनी। पूर्व भारतीय कप्तान ने भारत की पारी और 46 रन की जीत के बारे में बंगाल क्रिकेट संघ द्वारा भारत के घरेलू मैदान पर 250वें टेस्ट के मौके पर आयोजित ‘टॉक शो’ के दौरान कहा, ‘सर्वश्रेष्ठ क्षण चुनना काफी मुश्किल है लेकिन हां, हेडिंग्ले टेस्ट मेरे और भारतीय क्रिकेट के लिए निर्णायक क्षण था। इसके बाद यह जारी है।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे अपने कैरियर के अंत की ओर कप्तानी मिली, शायद संयोग से मिली क्योंकि तब गांगुली कप्तानी के अपने कार्यकाल को खत्म कर चुके थे, वीरू टीम में नहीं था, राहुल कप्तानी नहीं चाहता था और शायद धोनी काफी युवा था। इस जिम्मेदारी के लिए केवल मैं ही एकमात्र खिलाड़ी था। मैं जानता था कि यह बहुत कम समय के लिए होगी।’ वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यादगार 2001 कोलकाता टेस्ट में नहीं खेल पाए थे जिसमें भारत ने फॉलो आन के बाद 171 रन की जीत दर्ज की थी लेकिन उन्हें लगता है कि इस जीत ने सोच बदल दी।

कुंबले ने कहा, ‘हमारी पीढ़ी अलग-अलग चुनौतियों से गुजरकर और अधिक मजबूत बन गई थी। कोलकाता टेस्ट ने हमारी सोच में बदलाव किया और हेडिंग्ले टेस्ट से शायद हमने सोचा कि हम भी विदेश में जीत सकते हैं। पर्थ टेस्ट की जीत शानदार थी और हमने इसके बाद मुड़कर नहीं देखा।’ वीरेंद्र सहवाग की तारीफों के पुल बांधते हुए कुंबले ने यह भी कहा कि दिल्ली के इस बल्लेबाज ने शीर्ष पर अपनी आक्रामकता से भारतीय बल्लेबाजी का चेहरा ही बदल दिया। उन्होंने कहा, ‘10 से ज्यादा वर्षों के लिए मध्यक्रम स्थिर था, वीरू आए और उन्होंने गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दी। यह चैम्पियन बल्लेबाजी लाइन अप था और वीरू इसके सिरमौर।’

सहवाग के साथ बैठे कुंबले ने मजाकिया लहजे में हालांकि इस पूर्व सलामी बल्लेबाज को उनसे दूसरा टेस्ट शतक छीनने का भी आरोप लगाया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडीलेड में 2008 की याद करते हुए कुंबले ने कहा कि चाय तक वह 86 रन पर थे जब आक्रामक सहवाग ने उन्हें खुलकर खेलने के लिए उकसाया लेकिन इसके बाद वह सिर्फ एक रन जोड़कर आउट हो गए। कुंबले ने हंसते हुए कहा, ‘मैं अपना दूसरा शतक पूरा नहीं करने देने के लिए वीरू को दोषी ठहराऊंगा, उसने मुझे ब्रेक में कहा ‘तुम इतना समय क्यों ले रहे हो?’। और मैं ब्रेक के बाद एक गेंद बाद ही आउट हो गया।’

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