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World Cup 2019: अब तक का कुल जमा हासिल, पहले बल्लेबाजी फिर जीती मैच की बाजी

जीत-हार के इस अंतर के कारण विश्व कप के ज्यादातर मैच नीरस ही रहे। 1987 के विश्व कप में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। इस महाकुंभ में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों को जहां 19 मैच में जीत मिली वहीं महज 8 मैच में ही लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम विजयी रही।

Author July 11, 2019 2:37 AM
इंग्लैंड की सरजमीं पर खेले जा रहे इस क्रिकेट महाकुंभ में लीग चरण के मुकाबले भारत और श्रीलंका की भिड़ंत के साथ समाप्त हो गया। न्यूजीलैंड और भारत के बीच मैच से फाइनल में भिड़ने वाले एक टीम का नाम भी तय हो गया है।

संदीप भूषण
विश्व कप के 12वें संस्करण के विजेता की घोषणा में अब महज दो मैच का फासला रह गया है। इंग्लैंड की सरजमीं पर खेले जा रहे इस क्रिकेट महाकुंभ में लीग चरण के मुकाबले भारत और श्रीलंका की भिड़ंत के साथ समाप्त हो गया। न्यूजीलैंड और भारत के बीच मैच से फाइनल में भिड़ने वाले एक टीम का नाम भी तय हो गया है। कीवी टीम खिताबी भिड़ंत में पहुंच गई है। टूर्नामेंट के इस सत्र में कुल दस टीमों के बीच 45 लीग मैच खेले गए। राउंड रोबिन होने के कारण सभी टीमों को एक दूसरे के खिलाफ खेलने का मौका भी मिला। इस दौरान ज्यादातर मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ही जीत दर्ज करने में कामयाब रही। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि खिताबी भिड़ंत में जो टीमें आमने-सामने होंगी वे इस टोटके को आजमाती है या फिर अपनी काबिलियत पर ही भरोसा जताती हैं।

दरअसल, इस विश्व कप में इंग्लैंड की पिच और मौसम को देखते हुए यह माना जा रहा था कि ज्यादातर मैचों में स्कोर बोर्ड पर 400 से अधिक रन दिखेंगे। आइसीसी और इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने इसे लेकर तैयारिया भी की थीं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। कुछ मैचों में जरूर 300 से 350 रन बनें लेकिन, ज्यादातर मुकाबले कम स्कोर वाले ही रहे। उसमें भी जो टीम पहले बल्लेबाजी करती उसके लिए विपक्षी टीम को हराना काफी आसान हो जाता। लीग चरण के 45 में से 27 मैचों में उस टीम ने जीत दर्ज की जिसे पहले बल्लेबाजी का मौका मिला। महज 14 मैच ही ऐसे थे जिसमें टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए जीतने में कामयाब रही। वहीं 30 मई से पहले के मुकाबलों को देखें तो आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। विश्व कप अभ्यास मैच के दौरान कुल 10 मैच खेले गए जिसमें महज तीन में ही पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीत दर्ज कर सकी।

क्या कहते हैं आंकड़े
इस पूरे मसले को समझने के लिए हमें लीग चरण के मुकाबलों को दो भागों में देखना होगा। 30 मई से कुछ समय पहले जब दुनिया की 10 दिग्गज क्रिकेट टीम इंग्लैंड पहुंची थीं तब मौसम और हालात अलग थे। वहीं 15 जून के बाद के हालात काफी बदल गए। आंकड़े इसकी गवाही भी देते हैं। पहले के 21 मुकाबले को देखें तो उसमें से 11 में वे टीम विजयी रहीं जो पहले बल्लेबाजी के लिए उतरीं, 10 मैचों में टीम ने लक्ष्य का पीछा कर जीत दर्ज की। बाद के 20 मैचों में यह फासला काफी बढ़ गया। इस दौरान महज चार मैचों में ही लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को जीत नसीब हुई, वहीं 16 में पहले बलल्लेबाजी करने वाले को ही फायदा हुआ।

जीत-हार के इस अंतर के कारण विश्व कप के ज्यादातर मैच नीरस ही रहे। 100 ओवर के मैच में 70 ओवर के खेल के बाद लगभग यह तय हो जाता कि जीत किस टीम के पाले में जाएगी। लगभग 32 साल बाद ऐसा हो रहा था। 1987 के विश्व कप में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। इस महाकुंभ में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीमों को जहां 19 मैच में जीत मिली वहीं महज 8 मैच में ही लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम विजयी रही। पिछले चार विश्व कप के आंकड़ों को देंखें तो यह कहना मुश्किल नहीं होगा कि 2019 का सत्र पहले बल्लेबाजी करने वाले को जीत दिलाने के मामले में सबसे आगे रहा। 2007 में जहां पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम के जीत-हार का आंकड़ा 25-25 का था तो 2011 में 24-23 का। 2015 विश्व कप में एक बार फिर इसका अनुपात 50:50 ही रहा।

इसके पीछे क्या रही वजह
विश्व कप 2019 में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम के लिए जीत दर्ज करना इतना आसान कैसे रहा? इस सवाल का जवाब ढूढ़ें तो पता चलेगा कि इसमें इंग्लैंड के मौसम की भूमिका अहम रही। जब टीम विश्व कप के लिए यहां पहुंची थी तब आसमान साफ और पिच सपाट थी। यही कारण रहे कि पहले खेले गए 21 मैचों में जीत-हार का अनुपात लगभग बराबर रहा। धीरे-धीरे मौसम के बदलने के साथ पिच के स्वभाव में भी बदलाव आया। 100 ओवर तक बल्लेबाजों के अनुकूल रहने वाली पिच अब बीच में ही धोखा देने लगी। दूसरी पारी में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना मुश्किल होने लगा। बचे दो मैच अब एजबेस्टन और लॉर्ड्स के मैदान पर होने हैं। एजबेस्टन में जहां जीत हार का अनुपात 50-50 का है तो वहीं लॉर्ड्स पर खेले गए सभी मैच पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने ही जीते हैं।
विश्व कप के दूसरे भाग में रनरेट में भी गिरावट देखने को मिली। विश्व कप से पहले अप्रैल 2015 से मई 2019 तक इंग्लैंड की धरती पर खेले गए कुल 58 मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम महज 20 मैचों में ही सफल हो पाई वहीं लक्ष्य का पीछा वाली टीम ने 32 मैचों में जीत दर्ज की। इस दौरान लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम का रन औसत लगभग छह का रहा। वहीं विश्व कप के दौरान यह 5.47 का रहा। ऐसे में आगे बचे मैचों में भी यह कहा जा सकता है कि जो टॉस जीतने के साथ बल्लेबाजी करता है उसके जीत दर्ज करने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

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